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पीएम मुझे अपना दोस्त बताते हैं, पर उन्होंने भी मेरी नहीं सुनी- सीएम को जेल भिजवाने की चुनौती देने वाले पूर्व भाजपाई मंत्री ने कहा

'द इंडियन एक्सप्रेस' को दिए इंटरव्यू में सरयू राय ने कहा, "मैंने खुद को शर्मिंदा महसूस किया जब चौथी सूची में भी मेरा नाम नहीं आया। मुझे बताया गया कि सरकार के खिलाफ बोलने की वजह से मुख्यमंत्री ने बतौर प्रत्याशी मेरे नाम की मुखालफत की है।"

Author Published on: November 20, 2019 10:50 AM
भाजपा के वरिष्ठ नेता सरयू राय। (facebook image)

झारखंड में बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सरयू राय जब से बागी हुए हैं, प्रदेश की सियासत में हंगामा मचा हुआ है। बीजेपी के तीन बार विधायक और पूर्व राज्य मंत्री रहे सरयू राय ने पार्टी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है और मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है। बगावत, सीएम रघुबरदास से मदभेद और केंद्रीय नेतृत्व के रवैये पर सरयू राय ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ बातचीत में कई बातें कहीं। उनका कहना है कि उन्होंने पांच साल तक सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। लेकिन किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने पीएम मोदी को भी कटघरे में खड़ा किया।

इंटरव्यू के दौरान जब सरयू राय से पूछा गया कि बीजेपी हाईकमान ने उनकी शिकायतों पर गौर नहीं फरमाया, क्या वह इससे निराश हैं? इस पर जवाब देते हुए राय ने कहा, “मैंने भ्रष्टाचार के मामलों को काफी सहन किया…मैं पार्टी (BJP) के लिए काफी अर्से से काम करता रहा हूं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि वो मेरे मित्र हैं। लेकिन फिर भी, यदि मेरी सुनवाई नहीं है, तो मैं क्या बोल सकता हूं? यदि पार्टी मुझे टिकट नहीं देना चाहती थी, तो मुझे वह बता सकती थी।

सरयू राय से जब टिकट नहीं दिए जाने के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “एक महीना पहले झारखंड बीजेपी के चुनाव प्रभारी ने मुझसे चुनाव के लिए तैयारी करने को कहा। मैंने काम करना शुरू कर दिया। लेकिन, जब (प्रत्याशियों की) पहली सूची में मेरा नाम नहीं आया, तब मैंने कहा, यदि पार्टी सुनिश्चित ही नहीं है, तो मुझे कोई टिकट नहीं चाहिए।” राय ने आगे कहा, “मैंने खुद को शर्मिंदा महसूस किया जब चौथी सूची में भी मेरा नाम नहीं आया। मुझे बताया गया कि सरकार के खिलाफ बोलने की वजह से मुख्यमंत्री ने बतौर प्रत्याशी मेरे नाम की मुखालफत की है।”

बागी नेता सरयू राय ने इस दौरान बताया कि बीते पांच साल में राज्य सरकार ने एक संस्थान के रूप में काम नहीं किया, बल्कि सब कुछ मुख्यमंत्री रघुबर दास की मर्जी के मुताबिक हुआ। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाए कि तमाम टेंडर प्रक्रियाओं में धांधली की गई। उन्होंने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री रघुबर दास को भी भ्रष्टाचार के घेरे में लिया। उन्होंने कहा कि राज्य के 30 विभागों में से 16 विभाग अकेले सीएम के पास हैं। निश्चित रूप से इसके पीछे कोई गलत मंशा छिपी हुई है।

गौरतलह है कि सरयू राय ने सीएम रघुबर दास को चुनाव में शिकस्त देना अपनी नाक का सवाल बना लिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास मुख्यमंत्री दास के भ्रष्टाचार से जुड़ा लिखित सबूत है। उनका कहना है कि यह घोटाला संयुक्त बिहार के घोटालों से भी काफी बड़ा है। राय ने सीएम रघुबर दास को जेल भिजवाने की चुनौती भी दे डाली।

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