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Jet Airways Crisis: ‘जेट एयरवेज में बड़ा घोटाला, फ्लाइट भरी रहती थीं, कार्गो फुल जाते थे, फिर कैसे कंगाल हो गई कंपनी?’

Jet Airways Crisis: जेट एयरवेज के सीईओ विनय दुबे ने भी 14 मई, 2019 को इस्‍तीफा दे दिया। एक दिन पहले सीएफओ ने भी कंपनी छोड़ दी थी।कंपनी के फिर से खड़े होने की उम्‍मीदें खत्‍म होती जा रही हैं। ऑल इंडिया जेट एयरवेज ऑफिसर्स ऐंड स्टाफ असोसिएशन के प्रेसिडेंट किरन पावस्कर ने अंदेशा जताया है कि जेट के माली संकट के पीछे कोई बड़ा घोटाला हो सकता है। उन्हें शक है कि विजय माल्या की तरह ही जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल भी विदेश भाग सकते हैं।

jet airwaysJet Airways Crisis: जेट एयरवेज स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बातचीत के दौरान कई खुलासे किए हैं।

Jet Airways Crisis: 25 साल से भी ज्यादा पुरानी एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। कंपनी के पास कर्मचारियों के वेतन, विमानों और तेल कंपनियों के किराए, हवाई अड्डे तक के भुगतान आदि तक के लिए पैसे नहीं हैं। यह वो कंपनी है, जिसने कभी एविएशन सेक्टर में सरकारी एयर इंडिया के एकाधिकार को खत्म करते हुए प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियों के लिए बाजार खोला था। आज हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि करीब 22 हजार कर्मचारियों की रोजी-रोटी संकट में है। आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसकी वजह से ये हालात पैदा हुए? इस बारे में हमने ऑल इंडिया जेट एयरवेज ऑफिसर्स ऐंड स्टाफ असोसिएशन के प्रेसिडेंट किरन पावस्कर से विस्तार से बात की। 30 अप्रैल, 2019 को हुई इस बातचीत में पावस्‍कर ने बताया कि 17 अप्रैल को जब जेट ने ऑपरेशंस बंद किए तो उस वक्त कंपनी के पास फ्यूल तक के पैसे नहीं थे। इससे पहले तक, फ्लाइटें फुल जा रही थीं। कार्गो बिजनेस भी बढ़िया चल रहा था। ऐसे में अचानक से कंपनी की माली हालत इतनी खराब कैसे हो गई? पावस्कर ने अंदेशा जताया कि इसके पीछे कोई बड़ा घोटाला हो सकता है। असोसिएशन प्रेसिडेंट को यह भी शक है कि विजय माल्या की तरह ही जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल भी विदेश भाग सकते हैं।

पावस्कर ने बताया कि कंपनी ने भले ही क्लोजर ऑफ ऑपरेशंस का ऐलान 17 अप्रैल को किया हो, लेकिन इससे पहले जनवरी से ही मीडिया में ऐसी खबरें आ रही थीं कि कंपनी की हालत बेहद खराब है। लोगों को सैलरी नहीं मिल रही। हालात ये थे कि पायलट और इंजीनियरों को बीते 6 महीनों से वेतन मिलने में दिक्कतें आ रही थीं। पावस्कर ने खुद को खुशकिस्मत बताते हुए कहा कि उन्हें फरवरी तक का वेतन मिल गया। पावस्कर के मुताबिक, कंपनी ने मार्च से तनख्वाह देना बंद कर दिया। उन्होंने एक बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि कभी जिस कंपनी के पास 119 एयरक्राफ्ट हुआ करते थे, वो महज डेढ़ महीने में कैसे ग्राउंड हो गई?

पावस्कर ने कहा कि इतनी बड़ी कंपनी को महज डेढ़ महीने में बंद करने का यह पूरी दुनिया में इकलौता मामला हो सकता है। पावस्कर के मुताबिक, यह दिखाया जा रहा है कि कंपनी के पास पैसे नहीं हैं। हालांकि, टॉप मैनेजमेंट के साथ हुई बैठकों में कंपनी ने जो कारण गिनाए हैं, वो पचाने लायक नहीं हैं। फ्लाइट फुल जाती थीं, कारगो का काम भी बढ़िया चल रहा था। इसके बावजूद कंपनी का कहना है कि उनके पास पैसे नहीं हैं। पावस्कर ने पूछा कि आखिर कमाई से आए पैसे कहां गए? पावस्कर को अंदेशा है कि किसी अंदरूनी घोटाले की वजह से जेट एयरवेज की यह हालत हुई है।

ऑल इंडिया जेट एयरवेज ऑफिसर्स ऐंड स्टाफ असोसिएशन के प्रेसिडेंट किरन पावस्कर।

पावस्कर के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल अप्रैल में कंपनी के सामने चार्टर डिमांड रखे थे। इनमें वेतन वृद्धि और कुछ दूसरी मांगें रखी गई थीं। कंपनी ने कहा था कि फिलहाल वो वेतन वृद्धि पर बात नहीं करेगी। पावस्कर ने बताया कि उन्हें जुलाई में जाकर पता चला कि पायलटों को वक्त से वेतन नहीं मिल रहा। 1 तारीख को मिलने वाली सैलरी 10 और 15 तारीख तक मिलने लगी। वेतन मिलने में देर होने के बारे में सवाल पूछे जाने पर कंपनी जवाब देती थी कि आप चिंतित क्यों हैं? सैलरी तो सबको मिल रही है। यह चीजें इस साल फरवरी तक जारी रहीं। असोसिएशन प्रेसिडेंट ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में एक मौका ऐसा आया जब एक विमान को खड़ा करना पड़ा। उस वक्त कंपनी के पास इस विमान की मरम्मत कराने के लिए भी पैसे नहीं थे।

नीचे क्लिक करके सुनें 30 अप्रैल को पावस्‍कर से की गई पूरी बातचीत 

 

पावस्कर ने कहा कि मार्च में जब वेतन न मिलने की शिकायत की गई तो उन्हें कहा गया कि अगर तत्कालीन चेयरमैन नरेश गोयल अपना पद छोड़ देते हैं कि तो स्टेट बैंक 1500 करोड़ रुपये लगाने के लिए तैयार है। हालांकि, बाद में जब नरेश गोयल ने पद छोड़ दिया तो भी हालात ठीक नहीं हुए। पता लगा कि कर्मचारियों का वेतन देने के लिए भी पैसा नहीं बचा है। पावस्कर ने पूछा कि जो पैसा स्टेट बैंक देने वाली थी वो कहां गया? उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से जानकारी दी गई है कि 10 मई तक नए निवेशकों की ओर से बोली लगाई जाने वाली है। हालांकि, अब ऐसा पता लग रहा है कि जेट एयरवेज को जमीन में दफनाने की तैयारी है। कंपनी के सारे रूट दूसरी एयरलाइंस को दिए जा चुके हैं। विमान का रंग बदलकर स्पाइजेट को भेजा चुका है। जेट के पार्किंग स्लॉट दूसरों को दे दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जेट एयरवेज को दोबारा खड़ा करना है तो उसके पास संसाधन बचे ही कहां हैं?

पावस्कर ने आरोप लगाया कि कंपनी को दोबारा खड़ी करने का बस कोरा आश्वासन दिया जा रहा है। सरकार या बैंक की ओर से इस मुद्दे पर एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, कंपनी ने जब ऑपरेशन बंद किए तो कहा कि यह टेंपररी सस्पेंशन है। यह किसके कहने पर किया गया क्योंकि उस वक्त नरेश गोयल चेयरमैन का पद छोड़ चुके थे। पावस्कर ने कहा कि जिन लोगों को बाहर नौकरी मिल भी गई, उनकी ग्रैजुएटी का क्या होगा? सरकार इस दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है? अगर नया मैनेजमेंट आता भी है तो पिछले 20 साल का हिसाब क्यों देगा? यह रकम छोटी नहीं है। यह भी हजार या दो हजार करोड़ का होगा।

असोसिएशन प्रेसिडेंट ने आरोप लगाया कि सरकार भी इस मामले में दोषियों की मदद कर रही है। पावस्कर ने बताया कि उन्होंने फौरी ऐक्शन लेते हुए वेतन के लिए लेबल कमिश्नर ऑफिस में केस फाइल किया है। इसके बाद न्यायालय का रुख करने का रास्ता खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि वह पुलिस के पास गए लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पावस्कर ने अंदेशा जताया कि जैसे विजय माल्या ने देश के बाहर का रुख कर लिया, उसी तरह नरेश गोयल और जेट के सीईओ भी देश छोड़कर चले गए तो कर्मचारियों की ग्रैजुएटी का क्या होगा। सरकार एफआईआर दर्ज नहीं कराने दे रही, इसका मतलब साफ है कि वह भी ऐसे लोगों की मदद कर रही है। पावस्कर के मुताबिक, जेट के कर्मचारी 1 मई को मार्च निकालेंगे। वे सभी पुलिस स्टेशन जाएंगे और एफआईआर दर्ज करने के लिए कहेंगे। पावस्कर ने यह भी प्रस्ताव दिया कि अगर सरकार या कोई कंपनी दिलचस्पी नहीं दिखाती तो कर्मचारी आधी सैलरी लेकर खुद कंपनी चलाने को तैयार हैं।

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