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बीजेपी को सहयोगी जेडीयू ने दिया झटका, CAA पर भारी रोष और विरोध के बाद NRC पर साथ नहीं देने का फैसला

बिहार के मुख्यमंत्री के साथ करीब दो घंटे की बैठक के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि एनआरसी के साथ सीएए खतरनाक है। अगर एनआरसी लागू नहीं होता तो सीएए ठीक है।

Author , कोच्चि, पटना | Updated: December 15, 2019 10:12 AM
नागरिकता कानून के खिलाफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते लोग। (Express photo by Praveen Khanna)

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने शनिवार (14 दिसंबर, 2019) को देशभर में प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) पर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे लागू किए जाने के खिलाफ हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि जेडीयू ने आधिकारिक तौर पर फैसला लिया है कि एनआरसी को ना कहा जाए।

केसी त्यागी ने द संडे एक्सप्रेस से कहा, ‘एनआरसी को ना कहने कहने के लिए पूरी पार्टी मजबूती से अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ है। हमने पहले भी ऐसा ही कहा था कि लेकिन सीएबी को हमारे समर्थन ने भ्रम पैदा किया होगा।’ जेडीयू एनआरसी के खिलाफ खुलकर सामने आने वाली भाजपा की पहली सहयोगी पार्टी है। जेडीयू ने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का समर्थन किया था।

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री के साथ करीब दो घंटे की बैठक के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि एनआरसी के साथ सीएए खतरनाक है। अगर एनआरसी लागू नहीं होता तो सीएए ठीक है। किशोर ने सीएम नीतीश के हवाले से कहा, ‘सीएए नागरिकता देने वाला कानून है। मगर अगर यह एनआरसी के साथ जुड़ा हुआ है तो यह भेदभावपूर्ण हो जाता है।’ प्रशांत किशोर ने नागरिकता कानून का उनकी पार्टी द्वारा समर्थन किए जाने की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी।

प्रशांत किशोर ने बीते बुधवार को ट्वीट किया था कि यह कानून एनआरसी के साथ मिलकर व्यवस्थित ढंग से लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव और यहां तक कि उन्हें प्रताड़ित करने के लिए घातक गठजोड़ बन सकता है। किशोर ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून ‘बड़ी चिंता की बात नहीं है’ लेकिन यह प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के साथ मिलकर समस्या बन सकता है। कानून में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने प्रावधान है जबकि एनआरसी में भारत के सभी वास्तविक नागरिकों का नाम होगा।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लगातार दोहराया है कि वह अपने राज्य में एनआरसी लागू नहीं होने देंगी। CAB के कानून की शक्ल लेने के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा कि प्रदेश में संविधान विरोधी कानून का कोई स्थान नहीं होगा। केरल में सत्तापक्ष की कड़ी प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और सीपीएम ने सोमवार (16 दिसंबर, 2019) को राजधानी तिरुवनंतपुरम में नए नागरिकता कानून के विरोध में एकजुट होने की योजना बनाई है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैपटन अमरिंदर सिंह ने भी दोहराया है कि उनकी सरकार ‘पंजाब में इस कानून को लागू नहीं होने देगी।

बता दें संशोधित नागरिकता कानून का उत्तर-पूर्व में भारी विरोध हो रहा है। पश्चिम बंगाल में इस कानून से नाराज लोगों ने ट्रेनों और अन्य वाहनों को आग तक लगा दी। इसी बीच असम में भाजपा की अहम सहयोगी पार्टी असम गण परिषद ने इस कानून का विरोध करने का निर्णय लिया है। पार्टी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगी।

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