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बंगालः बीजेपी के खिलाफ रणनीति पर चर्चा, जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने की तृणमूल सांसदों से गुप्त बैठक

एनडीए के सहयोगी दल जदयू के उपाध्यक्ष और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने टीएमसी सांसदों व पार्टी नेताओं के साथ मुलाकात की। मुलाकात में राज्य में भाजपा के प्रभाव को रोकने की रणनीति पर चर्चा हुई।

ममता ने लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद प्रशांत किशोर को विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। (फाइल फोटो)

एनडीए के सहयोगी दल जदयू के उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात की। राज्य में भाजपा को रोकने की रणनीति को लेकर हुई इस बैठक में टीएमसी सांसद, पार्टी के प्रवक्ताओं के साथ ही राज्य में चुनाव हार चुके पार्टी के उम्मीदवार भी शामिल हुए।

मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के बाद सीएम ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर को दी है। बैठक में राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने और साथ ही उन मुद्दों पर भी चर्चा हुई जिनसे राज्य में पार्टी को नुकसान हुआ है।

बैठक में टीएमसी के नवनिर्वाचित सांसदों के साथ ही इस बार चुनाव हार चुके पूर्व सांसद भी शामिल थे। इनमें राज्य सभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी, दमदम सांसद सौगत रॉय, हावड़ा सांसद प्रसून बनर्जी, कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा, सेरेमापुर सांसद कल्याण बनर्जी और कोलकाता नॉर्थ के सांसद और लोकसभा में पार्टी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय शामिल थे।

टीएमसी सूत्रों के अनुसार बैठक में पार्टी की भविष्य की रणनीति के साथ ही उन घटनाओं पर भी चर्चा हुई जो हाल ही राज्य में पार्टी के पक्ष में नहीं हुई हैं। हालांकि, बैठक में मौजूद कई सांसदों ने बाद में इसमें मौजूद होने की बात से इनकार किया। बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, ‘मैं वहां मौजूद नहीं थी, मैं अपने बेटे के साथ डिनर कर रही थी।’ वहीं, डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि ऐसी कोई बैठक नहीं हुई है।

एक सूत्र ने बताया कि बैठक में सबसे पहले लोकसभा चुनाव के परिणामों का विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही बैठक में मौजूद सभी लोगों से इसकी जानकारी गुप्त रखने को कही गई। सूत्रों ने कहा कि कुछ नए सांसदों ने जानबूझकर खुद को इस बैठक से दूर रखा। माना जा रहा है कि वे अभी भी खुद को भाजपा नेता मुकुल रॉय के करीब मान रहे हैं।

मालूम हो कि इस लोकसभा चुनाव में टीएमसी 2014 के 34 सीटों के मुकाबले 22 सीटें ही जीत पाई थी। वहीं भाजपा ने 18 सीटों पर कब्जा जमाया था। भाजपा और टीएमसी में मतों का अंतर भी महज 3 फीसदी ही रह गया।

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