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UP में RLD और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना तलाश रहा है JDU

सूत्रों का कहना है कि रालोद के प्रमुख अजीत सिंह ने कुछ दिन पहले जदयू अध्यक्ष शरद यादव के साथ बैठक की है। बैठक में दोनों नेताओं ने भाजपा के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बनाने की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की।

Author नई दिल्ली | February 1, 2016 7:31 AM
JDU प्रमुख शरद यादव

बिहार चुनाव में जदयू-राजद-कांग्रेस गठबंधन के जरिए भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को करारी शिकस्त देने के बाद अब जदयू और रालोद उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और कुछ छोटे दलों के साथ मिलकर एक बड़ा गठबंधन करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि रालोद के प्रमुख अजीत सिंह ने कुछ दिन पहले जदयू अध्यक्ष शरद यादव के साथ बैठक की है। बैठक में दोनों नेताओं ने भाजपा के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बनाने की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की। चर्चा ऐसे समय में की जा रही है, जब राज्य के दोनों बड़े दलों सपा और बसपा ने किसी भी गठबंधन में शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया है। रालोद प्रमुख ने पिछले माह दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी। नीतीश उस समय यादव की आत्मकथा के विमोचन के अवसर पर यहां आए थे।
सूत्रों ने कहा कि पीस पार्टी के प्रमुख अयूब अंसारी ने भी इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नीतीश कुमार और जदयू के महासचिव केसी त्यागी से मुलाकात की थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में, विशेषकर गोरखपुर क्षेत्र में, पीस पार्टी की मौजूदगी है। सूत्रों ने कहा कि आज लखनऊ में जदयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होने के एक या दो दिन बाद ऐसे किसी गठबंधन के बारे में कुछ स्पष्टता बन सकती है।
उत्तरप्रदेश से आने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता त्यागी को पश्चिमी उत्तरप्रदेश में रालोद और जदयू की एक संयुक्त रैली आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा, ‘हम भाजपा विरोधी किसी भी अभियान या मोर्चे का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘पश्चिमी उत्तरप्रदेश में ऐसे किसी भी अभियान में रालोद एक अहम घटक है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में रालोद को लिए बिना कोई भी बड़ा गठबंधन सफल नहीं हो सकता।’

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जब त्यागी से पूछा गया कि क्या पार्टी उत्तरप्रदेश में गठबंधन बनाने के मुद्दे पर रालोद के साथ बात कर रही है, तो उन्होंने कहा, ‘हम रालोद के नेताओं से बात करते रहते हैं। नीतीशजी और शरदजी ने रालोद के नेतृत्व से बात की है।’ उधर जदयू के सूत्रों ने कहा है कि पार्टी असम में कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने के लिए उत्सुक है लेकिन कांग्रेस की प्रदेश इकाई इसके लिए इच्छुक नहीं है।
1991 में जब मुलायम सिंह यादव और चंद्रशेखर ने अपने रास्ते वी पी सिंह से अलग करके समाजवादी जनता पार्टी बनाई, उस समय उत्तरप्रदेश में जनता दल के 22 सांसद थे। उस समय से जनता दल और बाद में जदयू का ग्राफ वहां गिरता गया। 1996 में शरद यादव के नेतृत्व वाली पार्टी के पास छह विधायक थे। वर्ष 2002 के चुनाव में यह संख्या दो पर सिमट गई।

बिहार में जीत से उत्साहित पार्टी को लगता है कि वह उत्तरप्रदेश में रालोद और कांग्रेस जैसे दलों के साथ गठबंधन करके अपनी मृतप्राय पड़ी प्रदेश इकाई में नई जान फूंक सकती है। बिहार में राजद के साथ गठबंधन की सरकार चला रहे जदयू को उम्मीद है कि यदि यह धर्मनिरपेक्ष गठबंधन बन जाता ह,ै तो सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के साथ रिश्तेदारी होने के बावजूद लालू प्रसाद इसके लिए प्रचार करेंगे। बिहार चुनाव के दौरान सपा प्रमुख जदयू-राजद-कांगे्रस के महागठबंधन से बाहर हो गए थे और तब उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए तीसरा मोर्चा बना लिया था।

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