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जद(एकी) व राजद चाहते हैं बिहार में एक ही चरण में चुनाव

जदयू-राजद गठंबधन चाहता है कि बिहार में इस बार विधानसभा चुनाव एक चरण में होना चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य में छह चरण में मतदान हुआ था...
Author July 27, 2015 08:59 am
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री व जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार। (पीटीआई फाइल फोटो)

जदयू-राजद गठंबधन चाहता है कि बिहार में इस बार विधानसभा चुनाव एक चरण में होना चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य में छह चरण में मतदान हुआ था। राज्य में इस बार सत्ता पाने के लिए जदयू-राजद गठंबधन और भाजपा नीत एनडीए के बीच कड़ा मुकाबला है।

जदयू नीत गठबंधन को लगता है कि यदि चुनाव कई चरणों में होता है तो हफ्तों चलने वाले चुनाव प्रचार अभियान में धन और संसाधन के मामले में संपन्न भाजपा को लाभ मिल सकता है। इसलिए जदयू नीत गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल कल निर्वाचन आयोग जाएगा और राज्य की 243 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान कराने की मांग करेगा।

जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने दावा किया कि बिहार चुनाव, जो संभवत: अक्तूबर और नवंबर में होगा, ‘‘अत्यधिक खर्चीला’’ चुनाव होगा, जिसमें भाजपा नीत प्रतिद्वंद्वी गठबंधन ‘‘बेतहाशा खर्च’’ कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले गठबंधन को आशंका है कि भाजपा राजनीतिक लाभ उठाने के लिए त्यौहारों के समय स्थिति का ‘‘सांप्रदायीकरण’’ कर सकती है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इन सप्ताहों में दुर्गा पूजा, दीवाली और छठ जैसे त्यौहार पड़ेंगे। दशहरा और मोहर्रम एक ही दिन पड़ रहे हैं। भाजपा और इससे जुड़े संगठन राजनीतिक कारणों से स्थिति का सांप्रदायीकरण कर सकते हैं। हम इस अवधि के आसपास मतदान नहीं चाहते। सबसे अच्छा होगा कि एक ही दिन में चुनाव संपन्न करा लिया जाए।’’

निर्वाचन आयोग जाने वाले जदयू गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी अध्यक्ष शरद यादव द्वारा किए जाने की संभावना है। इस गठबंधन में जनता परिवार के सपा, जद (एस), इनेलो और राजद जैसे संगठन शामिल हैं।

रोचक बात यह है कि जदयू उस समय मतदान कई चरणों में कराए जाने के पक्ष में था जब इसने लालू प्रसाद नीत राजद को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन में काम किया था। तब जदयू कहता था कि यदि राज्य में एक ही दिन में चुनाव कराए जाते हैं तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो सकेगी और इससे राजद को मतदाताओं को डराने का मौका मिल सकता है।

राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में अपेक्षाकृत सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी ऐसी पर्याप्त परिस्थितियां हैं जिससे निर्वाचन आयोग वहां कई चरणों में चुनाव करा सकता है। राज्य का एक बड़ हिस्सा माओवाद से भी प्रभावित है। पिछले साल लोकसभा चुनाव छह चरणों में हुआ था।

त्यागी ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे समान बड़े राज्यों में एक चरण में चुनाव करा सकता है तो बिहार में ऐसा क्यों नहीं करा सकता।

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