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शीतकालीन सत्र में अध्यादेश संबंधी तीन विधेयक पास कराएगी सरकार

भूमि अध्यादेश विधेयक की समयावधि बीत जाने के साथ राजग सरकार अब प्राथमिकता के आधार पर संसद के 26 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में अध्यादेश संबंधी तीन विधेयकों को पारित कराएगी।

Author नई दिल्ली | Published on: November 23, 2015 3:53 AM

भूमि अध्यादेश विधेयक की समयावधि बीत जाने के साथ राजग सरकार अब प्राथमिकता के आधार पर संसद के 26 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में अध्यादेश संबंधी तीन विधेयकों को पारित कराएगी। इन तीन विधेयकों में चेक बाउंस मामलों से निपटने के लिए ‘द निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (एमेंडमेंट) बिल 2015 और उच्च न्यायालयों के वाणिज्यिक प्रभाग व वाणिज्यिक अपील प्रभाग और वाणिज्यिक विधेयक 2015 शामिल हैं, जो उच्च न्यायालयों में वाणिज्यिक प्रभागों के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

एक अन्य महत्त्वपूर्ण विधेयक भी एजंडे में है जो सुलह-समझौते के जरिए विवादों के तेजी से निपटान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लाया गया था। इसे ‘मध्यस्थता और सुलह समझौता (संशोधन) अध्यादेश 2015 को कानून का रूप देने के लिए लाया जाएगा। मानसून सत्र का लगभग पूरा समय बेकार चले जाने के बाद शीत सत्र में भी विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सदन के भीतर कामकाज की व्यवस्था संभालने वाले सरकार के वरिष्ठ प्रबंधक कम विवादास्पद विधेयकों को पारित कराने की रणनीति बनाने में जुटे हैं।

वे अहम जीएसटी विधेयक को भी पारित कराने पर विचार विमर्श में जुटे हैं। जिसके बारे में कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह हो सकता है कोई बड़ी बाधा खड़ी नहीं करे। संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू मंगलवार को दोनों सदनों के राजग नेताओं से मुलाकात करेंगे और इसके एक दिन बाद 25 नवंबर को अहम विधेयकों को पारित कराने में सरकार की मदद के लिए सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया जाएगा।

लोकसभा में आठ और राज्यसभा में 11 विधेयक लंबित हैं। अहम विधेयकों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व भूमि विधेयक शामिल हैं। जो इस समय संसद की संयुक्त समिति के समक्ष लंबित हैं। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्बसाहट (दूसरा संशोधन) विधेयक 2015 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार पर सरकार के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना नहीं है क्योंकि वह संकेत दे चुकी है कि वह राज्य सरकारों को इस संबंध में अपने अपने विधेयक तैयार करने को तरजीह देगी।

अन्य अहम लंबित विधेयकों में सचेतक संरक्षण (संशोधन) विधेयक, निरसन और संशोधन (तीसरा) विधेयक, बेनामी लेनदेन (निषेध) (संशोधन) विधेयक, उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्ते) संशोधन विधेयक व माइक्रो, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। राजग सहयोगियों के साथ बैठक में सरकार सदनों में उचित प्रबंधन के साथ अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए अपने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने के मकसद से सत्तारूढ़ गठबंधन की रणनीति पर विचार विमर्श करेगी।

सरकार 25 नवंबर को पारपंरिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठक के जरिए भी विपक्ष से संपर्क साधने का एक और प्रयास करेगी। बिहार विधानसभा चुनाव में राजग के औंधे मुंह गिरने के बाद संसद का यह पहला सत्र होगा। विपक्षी पार्टियां पहले ही असहिष्णुता समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की अपनी मंशा घोषित कर चुकी हैं। लंबित विधेयकों के संबंध में संसदीय सचिव अफजल अमानुल्लाह ने पिछले हफ्ते विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक बैठक की थी।

26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकार किए जाने की याद में और इसके रचियता दलित महानायक बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सत्र के पहले दो दिन संसद की दो दिवसीय विशेष बैठक बुलाई गई है। ऐसा माना जा रहा है कि आंबेडकर के संबंध में संवेदनशीलता और मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए विपक्ष पहले दो दिन संभवत: संसद को बाधित नहीं करेगा। लेकिन विपक्ष के 30 नवंबर से संसद का विधायी कामकाज शुरू होने पर असहिष्णुता, पुरस्कार वापसी, दादरी कांड , महंगाई व केंद्र राज्य संबंधों के मुद्दे को जोरशोर से उठाए जाने की संभावना है।

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