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CAA के बाद NPR और NRC पर जेडीयू में बगावत? पवन वर्मा ने CM नीतीश को लिखी चिठ्ठी, कहा- ये सब भारत को बांटने का एजेंडा

जदयू महासचिव पवन वर्मा ने कहा, ‘इस संबंध में आपका स्पष्ट सार्वजनिक बयान भारत के विचार को संरक्षित करने एवं मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। मैं जानता हूं कि आप खुद प्रतिबद्ध हैं।'

Author पटना | Updated: January 5, 2020 5:45 PM
biharजदयू महासचिव पवन वर्मा (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

जदयू महासचिव पवन वर्मा ने पार्टी अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीएए-एनपीआर-एनआरसी योजना को स्पष्ट तौर पर खारिज करने का अनुरोध किया है। इस पर बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि यह ‘भारत को बांटने और अनावश्यक सामाजिक अशांति को पैदा करने का नापाक एजेंडा’ है। रविवार (05 जनवरी) को कुमार को लिखे खुले पत्र में वर्मा ने बिहार के उपमुख्यमंत्री तथा भाजपा नेता सुशील मोदी की ‘एकतरफा’ घोषणा पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य में 15 मई से 28 मई के बीच राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का कार्य होगा जबकि नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ हैं। बता दें कि पूरे देश में CAA, NRC और NPR को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है।

पवन वर्मा ने क्या कहाः मामले में पवन वर्मा ने कहा, ‘सार्वजनिक रूप से दिए गए आपके विचारों और लंबे समय से चले आ रहे धर्मनिरपेक्ष नजरिए को देखते हुए क्या मैं आपसे अनुरोध कर सकता हूं कि आप सीएए-एनपीआर-एनआरसी योजना के खिलाफ सैद्धांतिक रुख लें और भारत को बांटने तथा अनावश्यक सामाजिक अशांति पैदा करने के के नापाक एजेंडा को खारिज करें।’

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वर्मा ने मांगा बड़े नेताओं का बयानः CAA, NRC और NPR को लेकर वर्मा ने बड़े नेताओं का पक्ष जाना है और पत्र में पूछा, ‘इस संबंध में आपका स्पष्ट सार्वजनिक बयान भारत के विचार को संरक्षित करने एवं मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। मैं जानता हूं कि आप खुद प्रतिबद्ध हैं। थोड़े समय के राजनीतिक लाभ के लिए सिद्धांत की राजनीति को बलि नहीं चढ़ाया जा सकता।’

सीएए-एनआरसी को बताया हिंदू-मुस्लिमों को बांटने वाला कानूनः अपने पत्र में वर्मा ने कहा कि सीएए-एनआरसी का संयुक्त रूप हिंदू-मुस्लिमों को बांटने और सामाजिक अस्थिरता पैदा करने का सीधा प्रयास है। जदयू नेता संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक का समर्थन करने के पार्टी के फैसले के आलोचक रहे हैं जो अब दोनों सदनों से पारित होने के बाद कानून बन गया है। कानून के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं। वहीं जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने भी सीएए के विरोध में आवाज उठाई है।

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