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जदयू उपाध्यक्ष ने किया कांग्रेस का धन्यवाद तो पार्टी नेता ने पूछा- राजद्रोह की बातें करने की सजा क्या है?

प्रशांत किशोर के ट्वीट के तुरंत बाद जदयू नेता अजय आलोक ने कहा कि सभी राज्य नए कानून को लागू करने के लिए बाध्य हैं। इसके साथ ही उन्होंने "राजद्रोह की भाषा बोलने पर सजा" जानने की भी मांग की।

Author Edited By रवि रंजन पटना | Updated: January 13, 2020 11:30 AM
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Bihar Politics on CAA NRC: सीएए और एनआरसी को लेकर बिहार की राजनीति में भी सियासी बयानबाजी जारी है। रविवार को जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने सीएए पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए कदम को लेकर धन्यवाद दिया और कहा कि बिहार में सीएए-एनआरसी लागू नहीं होगा। इस कदम पर जदयू के ही एक नेता अजय आलोक ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए पूछा कि राजद्रोह की बातें करने की सजा क्या है?

दरअसल, कांग्रेस पार्टी कार्य समिति ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की प्रक्रिया को रोकने और नए नागरिकता कानून को वापस लेने को कहा है। कांग्रेस के इस फैसले पर किशोर ने ट्वीट किया, “मैं कांग्रेस नेतृत्व को सीएए और एनआरसी को औपचारिक और स्पष्ट रुप से खारिज करने के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं उनका समर्थन करता हूं। राहुल गांधी और और प्रियंका गांधी दोनों इस मामले में विशेष धन्यवाद के पात्र हैं। साथ ही सभी को आश्वस्त करना चाहेंगे कि बिहार में सीएए और एनआरसी लागू नहीं होगा।”

प्रशांत किशोर के इस ट्वीट के तुरंत बाद जदयू नेता अजय आलोक ने कहा कि सभी राज्य नए कानून को लागू करने के लिए बाध्य हैं। इसके साथ ही उन्होंने “राजद्रोह की भाषा बोलने पर सजा” जानने की भी मांग की। आलोक ने ट्वीट किया, “CAA अब 10 जनवरी 2020 से देश का क़ानून बन चुका हैं, ये पुरे देश में लागू हो चुका हैं और सबको इसका पालन करना ही हैं नहीं तो article 365 के तहत राष्ट्रपति कार्यवाही करेंगे। सवाल ये हैं की राज द्रोह की भाषा बोलने पे क्या सजा होती हैं ? असमंजस की स्तिथि NDA में नहीं होनी चाहिए।”

प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए आलोक ने ट्वीट किया कि कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें नेतृत्व द्वारा मिलने वाला सम्मान और प्यार हजम नहीं हो पाता है। इस पूरे मामले पर भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि ‘ओवर इंटेलिजेंट’ लोग एनआरसी पर प्रोपगैंडा फैला रहे हैं। उनहोंने कहा, “लेकिन सच्चाई यह है कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कोई पहल नहीं है। हम लोकसभा और राज्यसभा में सीएबी के समर्थन के लिए हमारे एनडीए सहयोगियों की सराहना करते हैं। बिहार सरकार ने मई 2020 में एनपीआर शुरू करने के लिए पहले ही सूचित कर दिया है।”

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