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किसान आंदोलन: जदयू प्रवक्ता के.सी. त्यागी बोले- सरकार से हमें भी है शिकायत

आज किसानों और सरकार के बीच हुई बातचीत फिर से बेनतीजा रही। सरकार और किसानों के बीच दोबारा बातचीत 8 जनवरी को होगी।

जेडीयू के केसी त्यागी।

आज तक पर डिबेट के दौरान जेडीयू के केसी त्यागी ने कहा कि जेडीयू को सरकार से शिकायत इस बात की है कि सरकार ने कृषि कानून सहयोगी पार्टी को विश्वास में लेकर नहीं लाए। जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि संसद में हमने कृषि कानूनों का समर्थन किया है। हम एक मात्र विश्वसनीय और इकलौती सहयोगी पार्टी हैं। लेकिन हमारी भी शिकायतें हैं। सरकार को सहयोगी दलों को भी विश्वास में लेना चाहिए था।

त्यागी ने कहा कि किसान संगठनों से वार्ता करनी चाहिए थी। आज तक जब भी विपक्षी दलों ने कहा कि बिल को स्टैंडिंग कमेटी में भेजा जाए तो अब तक भेजा जाता रहा है। फिर जो समिति फैसला देती है वो सबको मान्य होता है। सरकार ने ये भी नहीं किया। सरकार द्वारा बातचीत किए जाने का मैं समर्थन करता हूं। किसानों की मांगों के साथ हमारी सहानुभूति है। किसानों की मौतों को देखते हुए सरकार को अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है।

त्यागी ने कहा कि सरकारी खरीद के अलावा किसानों को एमएसपी के दाम नहीं मिलते हैं। जब एमआरपी के नीचे कोई चीज नहीं खरीदी जा सकती है तो क्यों प्राइवेट कंपनियों को किसानों को एमएसपी का दाम नहीं देना चाहिए। त्यागी ने नितिन गडकरी के उस बयान को लेकर आलोचना की जिसमें गडकरी ने कहा कि समस्या की जड़ सरप्लस फूड ग्रेन है।

किसान आंदोलन: BJP प्रवक्ता ने कहा- कानून वापस ले ल‍िया जाएगा, पर…

रिपब्लिक भारत पर डिबेट के दौरान बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस के आनंद शर्मा ने किसानों को बहकाने का काम किया। उन्होंने कहा कि कानून किसानों को अदालत जाने नहीं देते हैं। दूसरी मांग एमएसपी की थी और तीसरी मांग थी कि किसानों की जमीन का कॉन्ट्रैक्ट न हो। लेकिन आज कृषि कानून को वापिस लेने की मांग की जा रही है। बीच में बिजली और पराली का मुद्दा भी उठा था। प्रवक्ता ने कहा कि किसान बता नहीं रहे कि उन्हें समस्या क्या है। सरकार ने तो बस एपीएमसी की मोनोपॉली खत्म की है। सरकार ने तो बाजार खोलने का काम किया है।

बता दें कि आज किसानों और सरकार के बीच हुई बातचीत फिर से बेनतीजा रही। सरकार और किसानों के बीच दोबारा बातचीत 8 जनवरी को होगी। किसान इस बात पर अड़े हुए हैं कि कृषि कानून की वापसी हो लेकिन सरकार भी कानून वापिस लेना नहीं चाहती है।

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