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जदयू-भाजपा के अलगाव से बिहार पर ‘नकारात्मक असर’

अत्यधिक महत्वपूर्ण बिहार चुनाव से पहले भाजपा द्वारा मान्यता प्राप्त थिंक टैंक ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के विकास के दावों को खारिज किया है और कहा है कि राजग..

नई दिल्ली | September 13, 2015 3:10 PM
बिहार चुनाव से पहले भाजपा द्वारा मान्यता प्राप्त थिंक टैंक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास के दावों को खारिज किया है (पीटीआई फाइल फोटो)

अत्यधिक महत्वपूर्ण बिहार चुनाव से पहले भाजपा द्वारा मान्यता प्राप्त थिंक टैंक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास के दावों को खारिज किया है और कहा है कि राजग से उनके अलग हो जाने के कारण राज्य में शासन की गुणवत्ता पर ‘नकारात्मक असर’ पड़ा है।

भाजपा के उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाले जन नीति शोध केंद्र (पीपीआरसी) ने कहा, ‘‘इस अध्ययन में विकास के सभी प्रमुख संकेतकों के विश्लेषण में यह पाया गया है कि भाजपा और जदयू के अलगाव का बिहार के शासन और बिहार के लोगों के जीवन पर बेहद नकारात्मक असर रहा है।’’

पीपीआरसी ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला कि वर्ष 2013 में पार्टी की चुनाव प्रचार समिति में प्रमुख के रूप में नरेंद्र मोदी का कद बढ़ने के बाद, नीतिश के भाजपा नेतृत्व वाले राजग से अलग हो जाने पर विकास कार्य प्रभावित हुआ है।

अध्ययन में कहा गया कि राज्य की आर्थिक विकास दर वर्ष 2012-13 में 15 प्रतिशत से गिरकर नौ प्रतिशत रह गई। इस अलगाव के शासन पर पड़े असर का अध्ययन करने का दावा करने वाली पीपीआरसी ने कहा कि राज्य के सिर्फ 70 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय हैं। लड़कियों के लिए यह प्रतिशत महज 58 है। लड़कियों द्वारा बीच में ही पढ़ाई छोड़ दिए जाने की एक प्रमुख वजह यह है।

वर्ष 2011-12 और 2012-13 के दौरान स्कूलों में क्रमश: 22,575 और 17,009 नए शौचालय बनाए गए लेकिन वर्ष 2013-14 में नीतीश और भाजपा के रास्ते अलग हो जाने के बाद यह संख्या गिरकर 5076 पर आ गई।

बिहार में शिशु मृत्युदर राष्ट्रीय औसत 40 की तुलना में 42 (प्रति 1000 बच्चों पर) होने पर पीपीआरसी के शोधार्थी और प्रमुख अध्ययनकर्ता उज्ज्वल अग्रेन ने कहा, ‘‘शिशु मृत्युदर एक अन्य कारक है, जो दिखाता है कि बिहार स्वास्थ्य मानकों पर लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है।’’

शोधपत्र में कहा गया है कि वर्ष 2009 में बिहार में 533 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थे और वर्ष 2014 तक यह संख्या यही बनी रही। प्रति 10 लाख लोगों पर इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या राष्ट्रीय औसत 4.43 की तुलना में 0.67 रही।

इसमें यह भी कहा गया कि अवसंरचनात्मक विकास के मामले में नीतीश के कार्यकाल में वार्षिक तौर पर बनाई जाने वाली सड़क की लंबाई में काफी गिरावट आई है। आगे कहा गया, ‘‘वर्ष 2006707 में, बिहार ने 337 किलोमीटर नयी सड़कें बनाईं। वर्ष 2010-11 में (जब दोनों दल एकसाथ थे) 383.35 किलोमीटर नयी सड़कें जोड़ी गईं। यह संख्या वर्ष 2013-14 (दोनों के अलग होने के बाद) 192 किलोमीटर रही।’’

इन नतीजों का इस्तेमाल भाजपा विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जदयू-राजद-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना साधने के लिए कर सकती है। शोधपत्र में कहा गया कि वोट-बैंक की राजनीति के चलते भाजपा से जबरन गठबंधन तोड़ने से नीतीश कुमार की सरकार पर गंभीर प्रभाव पड़ा। इसकी स्थिरता पर भारी असर पड़ा क्योंकि (जदयू, राजद और कांग्रेस) का जो नया गठबंधन बना है, उसमें विश्वसनीयता का अभाव है।

शोधपत्र में कहा गया, ‘‘यह पूर्व-शत्रुओं का अवसरवादी गठबंधन है, जिन्होंने लंबे समय तक एक-दूसरे को भला बुरा कहा है। इसलिए इसे कभी चिरस्थायी साझेदारी नहीं माना जा सकता।’’

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