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अपनी उपेक्षा से खफा जयंती ने छोड़ी कांग्रेस

कांग्रेस को करारा झटका देते हुए पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी और राहुल गांधी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने (जयंती) परियोजनाओं को मंजूरी देने में कांग्रेस उपाध्यक्ष के निर्देश का पालन किया लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी ‘उपेक्षा, तिरस्कार और अपमान किया’। लंबे समय से कांग्रेस […]

Author January 31, 2015 8:17 AM
जयंती नटराजन ने छोड़ी कांग्रेस, सोनिया को लिखे खत में राहुल पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस को करारा झटका देते हुए पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी और राहुल गांधी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने (जयंती) परियोजनाओं को मंजूरी देने में कांग्रेस उपाध्यक्ष के निर्देश का पालन किया लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी ‘उपेक्षा, तिरस्कार और अपमान किया’। लंबे समय से कांग्रेस की वफादार रहीं जयंती ने कहा कि वे यूपीए शासन में मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपने हाथों दी गईं पर्यावरण संबंधी मंजूरियों को लेकर जांच का सामना करने का तैयार हैं। उन्होंने हालांकि कहा कि ‘इस तरह के कड़वे अनुभवों’ के बाद किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है।

उन्होंने यहां जल्दबाजी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा- मैंने सभी पर्यावरण मुद्दों पर केवल पार्टी लाइन और नियम पुस्तिका का पालन किया। मैंने लोगों के वन से जुड़े अधिकारों और वेदांत जैसे मामलों में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया। मैंने अपनी ओर से कुछ गलत नहीं किया। जयंती ने कहा कि वह पार्टी के ‘घुटन भरे माहौल’ में नहीं रह सकतीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी के निर्देश पर पर्यावरण मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद राहुल गांधी के कार्यालय ने उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए गलत खबरें फैलाई। जयंती ने राहुल पर निर्णय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए कहा- राहुल गांधी के कार्यालय से विशेष ‘इनपुट’ मिलते थे जो कुछ बड़ी परियोजनाओं पर चिंता जताने वाले गैर सरकारी संगठनों के ब्योरों पर आधारित थे।

जयंती ने कहा- मैंने कुछ गलत नहीं किया। मेरे खिलाफ अगर कुछ गलत साबित होता है तो मैं फांसी पर चढ़ने या जेल जाने को तैयार हूं। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए-2 में मंत्री के तौर पर वह स्नूपगेट (जासूसी) मुद्दे पर नरेंद्र मोदी पर हमला नहीं करना चाहती थीं लेकिन उनसे कहा गया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि वह ऐसा करें। जयंती ने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा- मैं अपनी जिंदगी और भविष्य के बारे में सोचना चाहती हूं। किसी दूसरी पार्टी में जाने की मेरी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल पार्टी आलाकमान से परेशानियां थीं, तमिलनाडु (कांग्रेस) शाखा से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु कांग्रेस शाखा के ट्रस्टी का पद भी छोड़ दिया है।

जयंती ने कहा कि मीडिया में आई खबरों में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और आक्षेपों के बाद शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री पद के तत्कालीन भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र मोदी द्वारा ‘जयंती टैक्स’ के नाम से की गई आलोचना को तूल नहीं देते हुए कहा- अगर मेरी खुद की पार्टी मेरे साथ इतना बुरा बर्ताव करती है, मैं उन्हें (मोदी) क्यों दोष दूं? वे विपक्ष में थे। अगर मोदी ‘जयंती टैक्स’ की बात कर रहे हैं तो उन्हें जांच करने दीजिए। सीबीआइ जांच करे। मैं इसका स्वागत करूंगी। मैं इसे लेकर आशान्वित हूं क्योंकि इससे मुझे अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।

तमिलनाडु की नेता ने कहा- मुझे सिर्फ राष्ट्रीय आलाकमान से दिक्कतें हैं। आलाकमान ने मुझे नजरअंदाज किया। मैंने सोनिया और राहुल गांधी से बार बार मिलने की कोशिश की लेकिन मुझे इसका मौका नहीं दिया गया जबकि ‘एक हत्यारे तक को’ अदालत अपना रुख साफ करने का एक मौका देती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर उनका कठोर रुख राहुल गांधी की वजह से था जिसके कारण उन्होंने निवेश की बड़ी परियोजनाओं के लिए मंजूरी को रोके रखा और ऐसा कर वे ‘पार्टी लाइन’ का पालन कर रही थीं।

जयंती ने कहा कि इस रुख को लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में तेज बहस हुई क्योंकि कई सहयोगी मंत्रियों को लगा कि इन फैसलों से निवेश व विकास बाधित हो रहा है। लेकिन तब भी वह अपने रुख पर कायम रहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने भी वन अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत पर बल दिया था। पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा- मुझे अपने सहयोगियों की नाराजगी व गुस्से का सामना करना पड़ा, उन लोगों का मानना था कि निवेश बाधित हो रहा है…मैंने पूरी तरह पार्टी लाइन का पालन किया।

उन्होंने कहा कि चीजें ऐसी जगह पर आ गई हैं जहां उन्हें कांग्रेस पार्टी से खुद को अलग करना पड़ रहा है और यह उनके लिए ‘बहुत दुखद’ दिन है। जयंती के परिवार की चार पीढ़ियां कांग्रेस के साथ रही हैं। उन्होंने युवा कांग्रेस के दिनों से पार्टी के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए और अपने गांधी परिवार का ‘वफादार’ होने पर कोई संदेह नहीं छोड़ते हुए कहा- मैं ऐसे परिवार से हूं जहां कांग्रेस का खून हमारी रगों में दौड़ता हूं….कांग्रेस का खून मेरी रगों में दौड़ता है। लेकिन कांग्रेस अब वह कांग्रेस नहीं रही जो उनके पार्टी में शामिल होने के समय थी।

जयंती की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पिछले साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अब तक की सबसे बुरी हार मिलने के बाद राहुल गांधी के कामकाज की शैली को लेकर पार्टी में सवाल उठ रहे हैं।

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने 2013 में अपने इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रमों को याद करते हुए कहा- ‘तनावपूर्ण व गंभीर’ लग रहे (तत्कालीन) प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष उनका इस्तीफा चाहती हैं क्योंकि पार्टी को संगठन के कार्यों के लिए उनकी (जयंती) जरूरत है। जयंती ने कहा कि उन्होंने बाद में सोनिया गांधी से फोन पर बात की और उन्हें निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके इस्तीफा देने पर उनके काम की तारीफ करते हुए उन्हें एक चिट्ठी भी लिखा था।

जयंती ने कहा कि बाद में दिल्ली की मीडिया में राहुल गांधी के कार्यालय ने खबरें चलवाईं कि उन्हें पार्टी के काम में नहीं लगाया जाएगा और कुछ समय बाद उन्हें पार्टी प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया। बाद में एक सवाल के जवाब में जयंती ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर ‘हस्तक्षेप’ करने जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। उनसे पूछा गया था कि कांग्रेस आलाकमान ने उनके पर्यावरण मंत्री रहते उनके कामकाज में हस्तक्षेप किया था।

 

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