‘क्या तुम धोतीधारियों में इतना दम नहीं कि इसको चुप करा सको’, सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों से अपने ही नेताओं पर झल्लाईं थीं जयललिता

सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों से बौखलाकर जयललिता ने अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं की क्लास लगा दी थी। जयललिता ने कहा था कि क्या तुम धोतीधारियों में इतना दम नहीं कि इस आदमी को चुप करा सको।

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सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों से बौखला गईं थीं जयललिता (फाइल फोटो)

दक्षिण भारत की राजनीति में जयललिता एक बड़ा नाम हैं। भले ही आज वो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता अभी तक बरकरार है। राजनीति में उन्हें अम्मा (मां) और पुरातची तलाईवी (क्रांतिकारी नेता) कहते थे। वह लंबे समय तक तमिलनाडु की सीएम रहीं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1982 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) पार्टी से की थी।

वाकपटुता और प्रभावशाली व्यक्तित्व की वजह से पार्टी प्रमुख एमजी रामचंद्रन ने उन्हें राज्यसभा भिजवाया था। बाद में उन्हें राज्य विधानसभा के उपचुनाव में प्रत्याशी भी बनाया गया था। हालांकि बाद में रामचंद्रन के साथ उनके मतभेद हो गए थे।

वे 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित और कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं। हालांकि उन पर ये आरोप भी लगे कि उन्होंने अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की।

बदल गए थे सियासत के मायने: सत्ता में आने के बाद जयललिता की ताकत में कई गुना का इजाफा हुआ था। जयललिता पर वासंती द्वारा लिखी गई किताब ‘अम्मा’ में इस बात का जिक्र किया गया है कि उस दौर में जो भी आवाज जयललिता के खिलाफ उठी, उसे दबाया गया।

तमिल साप्ताहिक कुमुदम ने जब एमजीआर और जयललिता के शासन की तुलना करते हुए एक संपादकीय लिखा तो भीड़ ने पत्रिका के दफ्तर में तोड़-फोड़ कर दी और कुछ कर्मचारियों की पिटाई कर दी। जयललिता की पार्टी के लोग अपने नेता की आलोचना नहीं सुनना चाहते थे, इसीलिए राज्य में जयललिता के आलोचकों का रहना मुश्किल हो गया था।

साल 1992 में नक्कीरन पत्रिका ने भी सरकार पर ये आरोप लगाया था कि हमारे फोन टेप किए गए। इसके बाद संपादक और प्रकाशक को गिरफ्तार करके उन पर मुकदमे दायर किए गए और नक्कीरन पत्रिका के ऑफिस पर हमले हुए।

ये वो दौर था, जब पार्टी कार्यकर्ता अपने शरीर पर जयललिता के टैटू करवाते थे। जयललिता की कही गई हर बात एक फरमान होती थी। तमिलनाडु की सरकार सिर्फ एक नाम ‘जयललिता’ के आगे-पीछे घूमती थी।

इस दौर में एक IAS अधिकारी चंद्रलेखा ने जब सरकार के स्पिक के शेयरों को कम पैसों में बेचने के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा था, तो अधिकारी के चेहरे पर एसिड अटैक हुआ था। उस दौरान भी ये अफवाहें सामने आईं थीं कि हमलावरों को जयललिता की स्वीकृति थी। हालांकि ये बात कभी कानूनी रूप से साबित नहीं हुई। बाद में इस IAS अधिकारी ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों से आगबबूला हो गई थीं जयललिता: वर्तमान में बीजेपी के सीनियर नेता और तत्कालीन जनता पार्टी के प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने जयललिता पर तांसी भूमि घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ मामला दर्ज करवाया था।

ऐसे में ये खबरें भी आईं थीं कि जयललिता ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बुलाकर खूब लताड़ा था और कहा था कि तुम धोतीधारियों में से किसी के पास इतना दम नहीं है क्या कि वो इस आदमी को चुप करा सके।

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