मानहानि केस: अमित शाह के बेटे के मामले में The Wire से SC का कड़ा सवाल- यह कैसी पत्रकारिता है?

नाराजगी जताते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि यह एक सभ्य देश है और यह कैसी संस्कृति हम विकसित कर रहे हैं, जिसमें हम रात में किसी को नोटिस भेजते हैं और फिर सुबह रिपोर्ट प्रकाशित कर देते हैं?

Author नई दिल्ली | Updated: August 28, 2019 9:58 AM
jay shah defamation caseजय शाह ने न्यूज पोर्टल के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया था। (pti photo)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को न्यूज पोर्टल The Wire को अमित शाह के बेटे जय शाह के मानहानि के मामले में अपनी याचिका वापस लेने के निर्देश दे दिए। हालांकि इस दौरान कोर्ट ने द वायर को कड़े शब्दों में कहा कि ‘आजकल यह मीडिया की संस्कृति बन गई है कि वह लोगों को जवाब देने के लिए सिर्फ 10-12 घंटे का नोटिस देती है और इसके बाद रिपोर्ट पब्लिश कर देती है!’

बता दें कि जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। द वायर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अपील की कि वो गुजरात की अदालत में ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं, इसलिए उनकी याचिका को वापस लेने की अनुमति दी जाए। इस पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि यह एक सभ्य देश है और यह कैसी संस्कृति हम विकसित कर रहे हैं, जिसमें हम रात में किसी को नोटिस भेजते हैं और फिर सुबह रिपोर्ट प्रकाशित कर देते हैं?

बता दें कि साल 2017 में द वायर में छपे एक लेख के खिलाफ अमित शाह के बेटे जय शाह ने न्यूज पोर्टल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा कर दिया था। इसके खिलाफ न्यूज पोर्टल ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने मानहानि के मामले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद द वायर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “यह बेहद ही गंभीर मामला है। अब हमें याचिका को वापस लेने की अनुमति क्यों देनी चाहिए? क्यों ना हम इस पर स्वतः संज्ञान लें…एक जज के तौर पर हम इसे लेकर चिंतित हैं।” जस्टिस गवई ने कहा कि “यह और कुछ नहीं बल्कि पीत पत्रकारिता है। यह कैसी पत्रकारिता है?” इस दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि “प्रेस की स्वतंत्रता सर्वोपरि है, लेकिन यह एक तरफा नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका वापस लेने की अनुमति देने के बाद मानहानि के इस मामले में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी निर्देश दिए कि इस मामले की सुनवाई 6 महीने में पूरी होनी चाहिए। हालांकि इस पर द वायर के वकील कपिल सिब्बल ने आपत्ति की और कहा कि कोर्ट ऐसा निर्देश नहीं दे सकता। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई जितनी जल्दी संभव हो सके पूरी करने के निर्देश दिए।

सुनवाई पूरी करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘हम बहुत सारी बातें कहना चाहते हैं, लेकिन हम यह नहीं कहेंगे।’’  सिब्बल ने जवाब में कहा, ‘‘मैं भी कई बातें कहना चाहता हूं, लेकिन नहीं कहूंगा।’’  बाद में शाम में समाचार पोर्टल के संस्थापक संपादकों में से एक सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा, ‘‘हमने न्यायालय से कहा कि हम अपील वापस लेकर मुकदमे का सामना करना चाहते हैं। पीठ के पास जय शाह पर ‘द वायर’ की खबर के गुण-दोष पर दोनों में से किसी भी पक्ष को सुनने का कोई अवसर नहीं था। इसके बावजूद न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति बी आर गवई ने इसे ‘पीत पत्रकारिता’ कहा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुकदमे में इन चीजों से लड़कर हम साक्ष्यों के जरिये साफ तौर पर साबित करेंगे कि हमने हर पत्रकारीय मानकों का पूरी सावधानी से पालन किया और हमने सिर्फ उसी चीज को प्रकाशित किया, जिसका हम बचाव कर सकते हैं।’’ शाह ने दो मामले- एक आपराधिक मानहानि और एक 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दीवानी मुकदमा दायर किया है।

जय शाह ने पत्रकार रोहिणी सिंह, समाचार पोर्टल के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वर्द्धराजन, सिद्धार्थ भाटिया और एम के वेणु, प्रबंध संपादक मोनोबिना गुप्ता, जन संपादक पामेला फिलिपोज और ‘द वायर’ का प्रकाशन करने वाली संस्था ‘फाउण्डेशन फार इंडिपेन्डेन्ट जर्नलिज्म’ के खिलाफ अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Next Stories
1 Reliance JioFiber Broadband: आपके मोहल्ले में सर्विस मिलेगी कि नहीं? ऐसे लगा सकते हैं पता
2 ‘आई लव मोदी जी…’, छह महीने में कांग्रेस से दिया इस्तीफा, अब पीएम मोदी की तारीफ करने लगीं एक्ट्रेस अर्शी खान
यह पढ़ा क्या?
X