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चार साल में 25 दलित समेत 49 छात्रों ने की JNV में खुदकुशी, सरकार ने 635 नवोदय विद्यालयों में बहाल किए 1176 काउंसलर

नवोदय विद्यालय स्कूल कमिश्नर बिश्वजीत कुमार सिंह ने बताया कि 250 छात्रों से कम वाले स्कूलों में एक काउंसलर और 250 छात्रों से अधिक संख्या वाले स्कूलों में दो काउंसलर (एक महिला और एक पुरुष) की नियुक्ति की गई है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 8, 2019 9:23 AM
नवोदय विद्यालयः चार साल में 25 दलित समेत 29 छात्रों ने की आत्महत्या

जवाहर नवोदय विद्यालय में पिछले चार साल में 49 छात्र खुदकुशी कर चुके हैं। इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 से 2017 के दौरान नवोदय विद्यालय में 49 छात्रों ने आत्महत्या की। इसमें 25 छात्र दलित और आदिवासी समुदाय से थे।

इस दौरान सरकार ने इन आवासीय स्कूलों के लिए 1176 पूर्णकालिक काउंसलर की नियुक्ति की है।मंत्रालय ने 635 स्कूलों के लिए 634 महिलाओं और 542 पुरुषों की भर्ती की है।  मालूम हो कि नवोदय विद्यालय मानव संसाधन मंत्रालय के तहत संचालित स्वायत्त संस्था है। नवोदय विद्यालय स्कूल कमिश्नर बिश्वजीत कुमार सिंह ने बताया कि 250 छात्रों से कम वाले स्कूलों में एक काउंसलर और 250 छात्रों से अधिक संख्या वाले स्कूलों में दो काउंसलर (एक महिला और एक पुरुष) की नियुक्ति की गई है।

सिंह ने कहा कि सभी काउंसलर मनोविज्ञान में मास्टर्स डिग्री/ क्लिनिकल साइकोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा  होल्डर या चाइल्ड डेवलपमेंट/सोशल वर्क में मास्टर्स हैं। इन लोगों को 10 महीने को कॉन्ट्रेक्ट पर भर्ती किया गया है। इस कॉन्ट्रेक्ट को 5 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इन लोगों को लगभग 45000 रुपये प्रतिमाह सैलरी दी जाएगी। सिंह के अनुसार इन लोगों का काम बच्चों को व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से काउंसलिंग करना है।

इसके अलावा ये लोग नए छात्रों को स्कूल के माहौल के अनुकूल खुद को ढालने में मदद करेंगे। इन सभी लोगों को नियुक्ति पत्र मिल गए हैं। इन लोगों को 12 नवंबर तक रिपोर्ट करने को कहा गया है। इससे पहले इंडियन एक्सप्रेस ने 24 दिसंबर 2018 को अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में पाया था कि जेएनवी में बहुत कम प्रशिक्षित काउंसलर हैं। इससे वहां के शिक्षकों पर अधिक भार पड़ता है। इन सब पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी किया था।

आयोग ने इस संबंध में छह सप्ताह के भीतर जवाब भी मांगा था। इस मामले को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर ने संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में उठाया था। इसके अतिरिक्त मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में एक टास्क फोर्स का गठन भी किया था।

मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल को इस टास्कफोर्स का अध्यक्ष बनाया गया था। टास्कफोर्स को बच्चों की आत्महत्या के मामलों को रोकने के संदर्भ में सुझाव देने को कहा गया था। साथ ही सरकार ने पूर्णकालिक काउंसलरों की नियुक्ति के लिए 56 करोड़ का बजट भी मंजूर किया था।

 

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