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Intolerance: भारत सहिष्‍णु लेकिन कुछ हिंदू समूह मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरह बर्ताव कर रहे हैं: जावेद अख्तर

उन्होंने आमिर खान अभिनीत हिंदी फिल्म ‘पीके’ का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुओं ने ही इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सफल बनाया।
Author कोलकाता | January 27, 2016 15:13 pm
गीतकार जावेद अख्तर। (फाइल फोटो)

जाने माने गीतकार एवं पटकथा लेखक जावेद अख्तर का कहना है कि मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरह बर्ताव करने वाले कुछ हिंदू समूहों को छोड़ दिया जाए तो भारतीय समाज हमेशा सहिष्णु रहा है। अख्तर ने मंगलवार रात एक साहित्य समारोह में कहा, ‘मैंने 1975 में मंदिर में एक हास्य दृश्य दिखाया था। मैं आज ऐसा नहीं करूंगा लेकिन 1975 में भी मैं मस्जिद में ऐसा दृश्य नहीं दिखाता क्योंकि वहां असहिष्णुता थी। अब दूसरा पक्ष उसकी तरह व्यवहार कर रहा है। अब वे इस जमात में शामिल हो रहे हैं….यह त्रासदीपूर्ण है। हिंदू मत कहिए। यह गलत नुमांइदगी है। ये कुछ हिंदू समूह हैं।’

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हालांकि उन्होंने आमिर खान अभिनीत हिंदी फिल्म ‘पीके’ का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुओं ने ही इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सफल बनाया। सलीम खान के साथ मिलकर ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘सीता और गीता’ और ‘दीवार’ समेत बॉलीवुड की कई सफल फिल्मों की पटकथा लिखने वाले अख्तर ने कहा, ‘मुझे वाकई इस बात को लेकर संदेह है कि यदि आप किसी इस्लामी देश में मुस्लिम प्रतीकों को लेकर इसी प्रकार की फिल्म बनाएंगे तो क्या वह सुपरहिट होगी। हम विवादों की स्थिति में अतिवादी रूख अपना लेते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि समाज में असहिष्णुता खतरे के स्तर पर पहुंच गई है। मुझे इस बात पर भरोसा नहीं है। कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि कोई असहिष्णुता नहीं है। मुझे उन पर भी भरोसा नहीं है। असलियत इस दोनों स्थितियों के बीच है। सच्चाई यह है कि भारतीय समाज हमेशा सहिष्णु था और है। समाज के कुछ ऐसे वर्ग हैं जो हमेशा भिड़े रहते हैं।’

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उनके अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला देश में कोई नया चलन नहीं है। अख्तर ने कहा, ‘अभिव्यक्ति की आजादी पर हमेशा किसी न किसी तरह का हमला होता रहा है। हम एक लेख में और सम्मेलन में कोई बात कह सकते हैं लेकिन आप एक डॉक्यूमेंट्री और एक फीचर फिल्म में वही बात नहीं कह सकते। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है।’ उन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने से इनकार करते हुए कहा, ‘क्योंकि मैं जानता हूं कि यह पुरस्कार मुझे लेखकों ने दिया है तो मुझे इसे क्यों लौटाना चाहिए? लेखक इस जूरी का हिस्सा होते हैं, न कि पुलिसकर्मी या नौकरशाह।’ लेखक रस्किन बॉन्ड ने कहा कि साहित्य निकाय लोगों की हत्या होने से नहीं रोक सकता। उन्होंने भी अपना अकादमी पुरस्कार लौटाने से इनकार कर दिया है।

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  1. D
    DHANRAJ C.
    Jan 27, 2016 at 10:50 am
    1975 Aaj ka fark Javed sahab batate hai to kuch Jara si Man ko Rahat hoti hai ki chalo thoda bahoot to HINDU jaga hai ! Agar ye jagruti Sampoornta ko nahi prapt huyi to HINDU himdustan me 2050 tak shayad hi nazar aaye | kya maloom 2050 takHindustan ka naam hi Badal diya jaye Shayad Babaristan,Gouristan,Akabaritan,ya Khiljistan bana diya jaye ? Hum Hindu kabhi Asahisnu ya Vistarwadi nahi ho sakte Deshwasio magar Kya Koi humko ye Guarantee De sakta hai ki Kashmiri pandito wala haal HAMARA Nhi hoga
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    Reply
    1. D
      DHANRAJ C.
      Jan 27, 2016 at 10:31 am
      Khud Jaaved ikraar karte hai ki Desh me Musalmaan bahoot kattar roop se Asahishnu hai Jabki Hindu Apne hi desh me inko sahan karte huye Khud par hone wale Sanskrutik hamlo par bhi Chupchaap rahe to hi Hum HINDU Sahinshnu Kahlaye jayenge nahi to Nahi | Waah Kya Takreer hai ki Hum Apni hi Janmbhoomi me Ek tarah ki Goolaami ko sweekaare Aour MULLO ko APNA TAALIBANI Chehra nikharne me Madad bhi kare ! Isi Maansikta se HINDU Ekdam Sikude huye Bhoo-Bhaag tak simate vrna IRAAN-RUSIA-MALASIA Padosi the
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      1. A
        Aghoranand
        Jan 27, 2016 at 3:33 pm
        ये फ़िल्मी दुनिया की कारोबारी वजहों से ऐसी बहकी हुयी बात कह रहा है. इसकी इतिहास दृष्टि 1975 से शुरू होती है, और कट्टरपंथियों पर पहुँच कर अटक जाती है. अपने को हिन्दू मानने वाले- ब्राह्मणवादी- हजारों सालों से यहाँ की मूल आबादी दलितों और आदिवासियों के प्रति कितने 'िष्णु' रहे हैं, यह सब को पता है. आज भी जहाँ औरते मंदिरों में पूजा करने के अधिकार तक से वंचित हों वहां हिंदूवादी 'उदारता' का जयघोष करने वालों की कलई अपने आप दुनिया के सामने खुल गयी है. जावेद अख्तर जैसे लोगों को शर्म से डूब मरना चाहिए.
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        1. R
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          Jan 28, 2016 at 4:30 am
          यह सब मुस्लिम कट्टर पंथ के कारण हुआ है जितना अधिक मुस्लिम कट्टर पंथ बढ़ता जायेगा उतनी ही हिन्दुओं में कट्टरता आती जाएगी इसके लिए मुसलमानो को ही आगे आना होगा और अपने धर्म से कट्टरता को हटाना होगा कट्टरपंथियों का पूर्ण बहिस्कार करना होगा काफिर और जिहाद शब्दों को अपने शब्दकोश से ही हटाना पड़ेगा हिन्दू कभी कट्टर नहीं रहा है जिहाद उसे कट्टर बना रहा है क्योकि अब वह असुरक्षित महसूस कर रहा है ISIS पूरे संसार को मुस्लमान बनाना चाहता है तो अब उसके सामने कोई रास्ता ही नहीं बचा है
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          1. Bhagawana Upadhyay
            Jan 28, 2016 at 12:23 am
            स्वतंत्रता संग्राम के मुस्लमान क्रांतकारियो का इतिहास जिन्हे भुला दिया गया ! Posted on January 26, 2016 by Hindi Muslims India – भारत – ﮨﻨﺪﻭﺳﺘﺎﻥ के स्वतंत्रता संग्राम के मुस्लमान क्रांतकारियो का इतिहास जिन्हे भुला दिया गया ! 126
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