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हरियाणा: जांच रिपोर्ट में खुलासा जाट पुलिसकर्मियों ने कर दिया था विद्रोह, नहीं माने थे सरकार के आदेश

हरियाणा में फरवरी में जाट आंदोलन के दौरान हिंसा को लेकर गठित कमिटी की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले बयान दर्ज किए गए हैं। इसमें सामने आया है कि हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मियों ने विद्रोह कर दिया था।

Author चंडीगढ़ | April 18, 2016 8:33 AM
हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान आगजनी और हिंसा के शिर लोगों ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी मदद नहीं की। (Express file Photo)

हरियाणा में फरवरी में जाट आंदोलन के दौरान हिंसा को लेकर गठित कमिटी की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले बयान दर्ज किए गए हैं। इसमें सामने आया है कि हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मियों ने विद्रोह कर दिया था। उन्‍होंने ऊपर से मिले आदेशों को भी मानने से इनकार कर दिया था। इनमें से ज्‍यादातर पुलिसकर्मी जाट समुदाय से थे और इनकी संख्‍या सैंकड़ों में थी। रोहतक और झज्‍जर में इस तरह की ज्‍यादा घटनाएं हुई।

प्रकाश सिंह पैनल की जांच में सामने आया कि प्रत्‍येक जिले में औसतन 60-70 पुलिसकर्मियों ने अपने पद की जिम्‍मेदारियों को छोड़ा। इस दौरान भीड़ ने कई दुकानों और घरों को जला दिया। जांच पैनल में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विजय वर्धन और डीजीपी केपी सिंह शामिल है। पैनल ने इस तरह के पुलिसकर्मियों की लिस्‍ट बनाई है। इसमें उनके नाम, रैंक, बेल्‍ट नंबर, पोस्टिंग की जगह और पोस्‍ट से गायब रहने के दिनों की संख्‍या लिखी गई है।

वरिष्‍ठ अधिकारियों ने बताया कि पुलिस कर्मियों के पद छोड़ जाने के कारण राज्‍य सरकार ने तुरंत पैरामिलिट्री और सेना की मदद ली। अपनी रिपोर्ट में पैनल ऐसे पुलिस‍कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का सुझाव दे सकता है। पैनल ने 26 फरवरी से जांच शुरू की थी। इसके तहत 3000 चश्‍मदीदों को बुलाया गया। उनके बयान वीडियो और लिखित दोनों रूपों में दर्ज किए गए। सूत्रों का कहना है कि यह रिपोर्ट 350-400 पन्‍नों की हो सकती है।

पैनल की रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक‍ तथ्‍य ये सामने आए कि 19 फरवरी को हिंसा के भड़कने के बाद जाट समुदाय से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने अपने पद और दफ्तर छोड़ दिए। रोहतक, झज्‍जर, सोनीपत और गोहाना में लगभग एक दर्जन पुलिस चौकियों और थानों को नुकसान पहुंचाया गया था। साथ ही यह भी सामने आया कि कई जगहों से पुलिसकर्मी जानबूझकर नदारद रहे। कुछ डीएसपी अधिकारियों ने बताया कि कांस्‍टेबल्‍स ने उनके आदेश मानने से इनकार कर दिए थे। साथ ही सार्वजनिक रूप से समुदाय के लोगों के प्रति एकता दिखाई।

पैनल की जांच में सामने आया कि हिंसा के दिनों में पुलिसकर्मी 6-7 दिनों तक ड्यूटी से गायब रहे। इसके बाद जब हिंसा रूकी तो वे वापस ड्यूटी पर आ गए मानो वे छुट्टी पर गए हुए हों। वहीं डीजीपी वायके सिंघल भी किसी प्रभावित इलाके में नहीं गए। वे केवल सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ रोहतक दौरे पर गए। पैनल आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्‍त करने की सिफारिश भी कर सकता है। हालांकि पुलिस में जाट समुदाय के कितने व्‍यक्ति हैं इसका कोई वास्‍तवकि आकंड़ा नहीं है। लेकिन कांस्‍टेबल और हैड कांस्‍टबेल्‍स में जाटों का दबदबा है।

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