जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में नोएडा की एक लड़की के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गयी थी। सुप्रीम कोर्ट की वकील जिन्होंने यह शिकायत दर्ज कराई थी उन्होंने इसे वापस लेने का फैसला किया है। वकील ने कहा कि उनका इरादा लड़की को उसकी गलती का एहसास कराना था।

सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली स्मृति सिंह चंदेल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मेरा इरादा उसे गिरफ्तार करवाने का नहीं था। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था। माता-पिता को भी लगा कि उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द अनुचित थे। वो स्टूडेंट है। चूंकि, वो पहले ही माफी मांग चुकी है और प्रधानमंत्री ने उन्हें माफ कर दिया है इसलिए कानूनी कार्रवाई की कोई जरूरत नहीं है।”

दिल्ली पुलिस से मामला रद्द करने का अनुरोध

स्मृति चंदेल ने कहा कि शिकायत वापस लेने का फैसला करने के बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस से मामला रद्द करने का अनुरोध किया है। स्मृति ने कहा, “मुझे दिल्ली पुलिस का फोन आया और मैंने उन्हें सूचित किया कि मैं अपनी शिकायत वापस ले रही हूं। अब कोई कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।” इस मामले के बाद लड़की को लोगों द्वारा परेशान किए जाने के आरोपों का जवाब देते हुए स्मृति चंदेल ने कहा कि वह पहले ही माफी मांग चुकी हैं।

स्मृति ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई उसे परेशान कर रहा है लेकिन अगर उन्हें खतरा महसूस होता है, तो उन्हें पुलिस से संपर्क करना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “चूंकि मैंने पुलिस से अपनी शिकायत वापस लेने को कहा है, इसलिए उन्हें लड़की के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, यह केवल जीरो एफआईआर है।”

लड़की ने मांगी थी माफी

1 अगस्त को सामने आए एक कथित वीडियो में लड़की ने माफी मांगते हुए कहा कि यह उसकी पहली और आखिरी गलती थी। वीडियो में उसे यह कहते हुए सुना गया, “मैं विरोध प्रदर्शन स्थल पर थी और वहां कई समूह प्रधानमंत्री मोदी को गालियां दे रहे थे। वे दूसरों को भी ये बातें कहने के लिए उकसा रहे थे। मुझे उन बातों को कहने पर इतनी शर्म आ रही है कि मैं आंखें भी नहीं उठा पा रही हूं। मैं इसके लिए पूरे देश से माफी मांगती हूं।”

29 जुलाई को नोएडा पुलिस ने लड़की के खिलाफ जानबूझकर अपमान करने, शांति भंग करने के इरादे से बयान देने, सार्वजनिक उपद्रव फैलाने और मानहानि करने के आरोप में शून्य एफआईआर दर्ज की थी। बाद में उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए मामला दिल्ली पुलिस को सौंप दिया। एफआईआर में लड़की की उम्र 21 वर्ष दर्ज की गई थी। हालांकि, बाद में उसकी मां ने मीडिया को बताया कि उसकी बेटी 15 वर्ष की थी। लड़की की मां ने यह भी दावा किया था कि लगातार उत्पीड़न के कारण परिवार को अपना नोएडा स्थित घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

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पश्चिम बंगाल में सौरव दास, अभिजीत दीपके और सीजेपी आयोजकों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज करने की शिकायत की गयी है। पश्चिम बंगाल की वकील रिंकी चटर्जी सिंह का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक 12 साल की बच्ची को लाया गया जिसके साथ पुलिस लाठीचार्ज में बदसलूकी हुई। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें