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जनसत्ता विशेष: गर्व को मिलेगा चंद्रयान-2 को चंद्रमा की सतह पर उतरते हुए देखने का मौका

गर्व ने बताया कि वह बड़ा वैज्ञानिक बनना चाहते हैं और अब उन्हें अपने छात्र जीवन में इसरो जाने का मौका मिल रहा है।

Author Published on: September 4, 2019 2:26 AM
गर्व की इस सफलता से हरिद्वार का ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमका है।

उत्तराखंड के हरिद्वार के बीएचईएल के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) के कक्षा आठवीं के छात्र गर्व सक्सेना 7 सितंबर को बेंगलुरु में इसरो के मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चंद्रयान-2 को चंद्रमा की सतह पर सजीव उतरते हुए देखेंगे। गर्व 4 सितंबर को हरिद्वार से बेंगलुरु जाएंगे। जब इस बात की खबर गर्व सक्सेना के परिवार वालों और स्कूल के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गर्व की इस सफलता से हरिद्वार का ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमका है। जिससे गर्व और उसका परिवार तथा उसके स्कूल के शिक्षक और छात्र-छात्राएं खुशी के मारे झूम उठे। गर्व सक्सेना बेहद खुश हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री के साथ चंद्रयान दो के चंद्रमा में उतरने का सजीव चित्रण देखने का मौका मिलेगा।

गर्व सक्सेना ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें एक मेल से पता लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इसरो में चंद्रयान दो का सजीव चित्रण देखने के लिए पूरे देश के छात्र-छात्राओं के लिए एक आॅनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। गर्व सक्सेना ने भी इस प्रतियोगिता में भाग लिया और पूछे गए सभी 20 सवालों के जवाब दिए और जब उन्हें इसरो की सूचना से यह पता चला कि प्रधानमंत्री के साथ चंद्रयान-2 का सजीव चित्रण देखने के लिए चुना गया है तो बेहद खुशी हुई। गर्व ने बताया कि वह बड़ा वैज्ञानिक बनना चाहते हैं और अब उन्हें अपने छात्र जीवन में इसरो जाने का मौका मिल रहा है।

गर्व सक्सेना के पिता पंकज सक्सेना बीएचईएल हरिद्वार की उपनगरी शिवालिक नगर में रहते हैं और वे तथा गर्व की मां मिलकर कोचिंग सेंटर चलाते हैं। गर्व सक्सेना के दादा वीके सक्सेना बीएचईएल हरिद्वार से अपर महाप्रबंधक के पद से 2006 में सेवानिवृत्त हुए हैं। गर्व को अपने दादा की तरह ही इंजीनियर या वैज्ञानिक बनने की तमन्ना है।

गर्व के पिता पंकज सक्सेना का कहना है कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके बेटे ने इसरो की प्रतियोगिता को पास करके चंद्रयान-2 के चंद्रमा में उतरने के सजीव प्रसारण को देखने के प्रधानमंत्री के दल में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त किया है। इसरो में कोई जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता है और फिर प्रधानमंत्री के साथ जाने की बात तो कोई सोच भी नहीं सकता है।

गर्व की माता रश्मि सक्सेना भी अपने पति के साथ कोचिंग सेंटर चलाती हैं। उनका कहना है कि जब उन्हें इस बात का पता चला कि उनका बेटा इसरो में प्रधानमंत्री के साथ चंद्रयान-2 का सजीव प्रसारण बेंगलुरु में जाकर देखेगा तो उन्हें पहले तो विश्वास नहीं हुआ जब उन्होंने इसरो का पत्र देखा तो खुशी के मारे उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि उनके बेटे ने इतनी बड़ी सफलता प्राप्त की है।

गर्व के स्कूल डीपीएस, रानीपुर, बीएचएल, हरिद्वार के प्रधानाचार्य डॉ अनुपम जग्गा का कहना है कि गर्व सक्सेना ने हमारे स्कूल का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया है। हमें उस पर गर्व है। वह एक बहुत ही धीर-गंभीर छात्र है। उसकी इस महत्त्वपूर्ण सफलता से पूरा स्कूल आल्हादित है। नौकरशाही का कामकाज इतना ढीला है कि कई सालों तक अग्निशमन विभाग के जमीन मिल ही नहीं पाती है। एअरपोर्ट के पास भी एक फायर स्टेशन बनाने के लिए विभाग ने जमीन मांगी है। लेकिन अभी तक नहीं मिली है। कहीं डीडीए से जमीन मिल नहीं पा रही है तो कहीं डीडीए ने चिन्हित तो कर रखा है लेकिन आबंटित नहीं किया है।

केंद्रीय विद्यायलों के 16 विद्यार्थी प्रधानमंत्री के साथ देखेंगे चंद्रयान-2 की लैंडिंग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से कराई गई ऑनलाइन अंतरिक्ष प्रश्नोत्तरी के माध्यम से देश के विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों (केवी) से 16 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। ये देश भर से चुने गए 60 विद्यार्थियों के साथ सात सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चंद्रयान-2 की लैंडिंग के ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी बनेंगे। देश भर के विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों से कुल 1,50,279 विद्यार्थियों ने इसरो की प्रश्नोत्तरी में भाग लिया था।

चुने गए विद्यार्थियों में दिल्ली के मनोज्ञा सिंह, गुजरात के निश्चल बदाया व अनुष्का अग्रवाल, कर्नाटक के जिशान संजीब, मध्य प्रदेश की कनिष्का गुप्ता, चंडीगढ़ के अक्षत, लक्ष्यद्वीप की बीवी नफारसत निधा, असम की देवलीना हजारिका, राजस्थान की गरिमा शर्मा, जम्मू-कश्मीर के ऑजसव, सिक्किम के यश गुप्ता, छत्तीसगढ़ की श्रीजल चंद्रकार, मिजोरम की अनया सिंह, मेघालय की अविप्सा पति, मणिपुर की सोनी और अरुणाचल प्रदेश की तेजश्विनी शामिल हैं।

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