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वन्य जीवों और वन संपदा की तस्करी बढ़ी, नेपाल व भूटान तस्करों की पनाहगाह

एसएसबी की रिपोर्ट से साफ है कि जहां 2014 में वन संपदा की तस्करी के बमुश्किल 39 प्रकरण दर्ज हुए थे, वे बढ़कर 82 हो गए हैं।

Author नई दिल्ली  | October 11, 2017 5:58 AM
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विष्णु मोहन

तमाम कोशिशों के बाद भी वन्य जीवों को मार कर उनके अंगों की तस्करी का धंधा बेरोक टोक जारी है। तस्करों के सरगना पकड़ में नहीं आने के कारण जांच एजंसियों असहाय हैं। पिछले तीन साल में नेपाल और भूटान से लगे भारत के सीमावर्ती सघन वन क्षेत्रों में वन्य जीवों का अवैध शिकार कर उनके अंगों तथा अन्य वन संपदा की तस्करी के मामलों में सौ फीसद से ज्यादा का इजाफा हुआ है। विभिन्न जांच एजंसियों की ओर से इस अवधि में तस्करों से मिली वन संपदा की कीमत 2.21 करोड़ रुपए से बढ़कर 187.69 करोड़ रुपए हो चुकी है। इसकी पुष्टि उस आंकड़े से भी हो रही है जो सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की ओर से नेपाल और भूटान के सीमाई इलाकों में इस तस्करी को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान की तीन वर्षीय रिपोर्ट में दर्ज हैं।

एसएसबी की रिपोर्ट से साफ है कि जहां 2014 में वन संपदा की तस्करी के बमुश्किल 39 प्रकरण दर्ज हुए थे, वे बढ़कर 82 हो गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पिछले दिनों वन संपदा की तस्करी रोकने में सशस्त्र बलों की भूमिका विषय पर हुए सेमिनार में इस इजाफे पर चिंता भी जताई थी। यह स्थिति तब है जबकि केंद्र सरकार ने 2014-2016 के दौरान बाघों के संरक्षण के लिए 15 हजार करोड़ की रकम खर्च की। देश में बाघों के अवैध शिकार की दशा यह है कि महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व में एक वर्ष में 19 बाघों के मारे जाने का अंदेशा है।

वन्य जीवों के शिकारियों व वन संपदा के तस्करों के खिलाफ मुहिम चलाकर पिछले एक अरसे में खासी धर-पकड़ करने वाले यूपी एसटीएफ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ अरविंद चतुर्वेदी के मुताबिक महाराष्ट्र के इस टाइगर रिजर्व में हो रहे अवैध शिकार की जानकारी कुछ अरसे पहले एसटीएफ को बहराइच से पकड़े गए एक शिकारी पुत्तू के बयान से मिली थी। उधर, उत्तराखंड के कार्बेट नेशनल पार्क में पिछले तीन साल के दौरान 20 से अधिक बाघों के शिकार के मामले सामने आ चुके हैं। विभिन्न एजंसियों के अध्ययन से साबित हो चुका है कि 2014-2016 के दौरान बाघ के अवैध शिकार में 63 फीसद का इजाफा हुआ। अप्रैल माह में राज्यसभा में सरकार ने माना था कि जहां 2014 में बाघ के अवैध शिकार के कुल 19 मामले दर्ज हुए वहीं 2016 में यह संख्या 31 हो गई थी। यह पाया गया कि जिन पांचराज्यों में बाघों का अधिक अवैध शिकार हुआ उनमें उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक व उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

उधर, एसएसबी की रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल तीन साल में वन संपदा की तस्करी का गढ़ बन चुका है। नेपाल और भूटान के सीमावर्ती पांच भारतीय राज्यों के घने जंगलों से वन्य जीवों की होने वाली तस्करी में लगभग आधी हिस्सेदारी पश्चिम बंगाल की हो गई है। एसएसबी ने 2014 से 2017 के दौरान की गई वन्य जीवों की तस्करी का मूल्य 244.56 करोड़ रुपए आंका है। तस्करों के निशाने पर इन इलाकों के वन्य जीवों में हिम तेंदुआ, सफेद हिरण, बाघ, एशियाई हाथी, हिमालयन नीली भेड़ और किंग कोबरा शामिल हैं।हालांकि देश में बाघों के संरक्षण को लेकर जारी कवायद का नतीजा यह हुआ है कि उनकी संख्या लगातार बढ़ी है। 2008 में जहां देश में कुल 1, 411 बाघ गिने गए, वहीं 2014 में इनकी तादाद 2,226 हो गई थी। इनके अवैध शिकार को रोकने में जुटे यूपी एसटीएफ के आइजी अमिताभ यश ने कहा कि एसटीएफ शिकार रोकने का भरसक प्रयास कर रहा है, पर असली अपराधियों को अभी नहीं दबोचा जा सका है। वे नेपाल या अन्य स्थानों में छिपे हैं।

 

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