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जनसत्ता विशेष: शिक्षकों के एक लाख पद खाली

शिक्षकों की कई भर्तियां तो कानूनी दावपेंच में फंसी हुई हैं। इस वर्ष सरकार ने 34 हजार पदों पर अध्यापकों की भर्ती की घोषणा कर दी है। इनमें से तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के 31 हजार और स्कूली व्याख्याताओं के तीन हजार पदों पर भर्ती होगी।

राजस्थान के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। (फोटो – इंडियन एक्सप्रेस)

राजस्थान के शिक्षा महकमे में शिक्षकों के पद खाली रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और स्कूली शिक्षा की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं पर अध्यापकों की कमी के कारण छात्रों का निर्धारित कोर्स भी पूरा नहीं हो पाया है। शिक्षा विभाग में शिक्षकों के एक लाख पद खाली हैं। सरकार ने शिक्षकों की जो भर्ती निकाली है उनमें सिर्फ 34 हजार अध्यापकों की भर्तियां होंगी। इसके कारण अगले शिक्षा सत्र में फिर से स्कूलों में अध्यापकों का टोटा रहेगा। राज्य के शिक्षा विभाग में तीन साल से लगातार भर्तियां निकाल कर शिक्षक और कमर्चारियों के पद भरे जा रहे हैं। इसके बावजूद हर वर्ष शिक्षकों की कमी का सामना सरकारी स्कूलों को करना पड़ रहा है।

शिक्षकों की कई भर्तियां तो कानूनी दावपेंच में फंसी हुई हैं। इस वर्ष सरकार ने 34 हजार पदों पर अध्यापकों की भर्ती की घोषणा कर दी है। इनमें से तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के 31 हजार और स्कूली व्याख्याताओं के तीन हजार पदों पर भर्ती होगी। शिक्षा विभाग में खाली पदों के मुकाबले भर्ती के पद बेहद कम है। इसका सीधा नुकसान विद्याथिर्यों को होगा। उनकी पढाई फिर अगले वर्ष पूरी नहीं हो पाएगी और हर स्कूल में शिक्षकों की कमी रहेगी।

मौजूदा समय में प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा में 5 लाख 10 हजार 285 पद हैं। इनमें से 4 लाख 14 हजार 177 पद ही भरे हुए हैं। इसके हिसाब से 96 हजार 108 पद रिक्त चल रहे है। इन खाली पदों में से 68 हजार 370 माध्यमिक शिक्षा और 27 हजार 738 पद प्रारंभिक शिक्षा में रिक्त है। शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रदेश में हर वर्ष नये विद्यालय खोलने के साथ ही मिडिल और सेकंडरी स्तर के स्कूल लगातार क्रमोन्नत होते हैं। इसके कारण भी शिक्षकों के पदों पर हमेशा कमी बनी रहती है। प्रदेश में तीन वर्षों में शिक्षकों की भर्तियां निरंतर की जा रही है। वर्ष 2016 में तृतीय श्रेणी के 15 हजार शिक्षकों की तो वर्ष 2018 में 54 हजार पदों पर भर्ती की गई थीं। इसी तरह से वर्ष 2015 में 13 हजार 98 व्याख्याताओं के पदों पर भर्ती की गई थी। वर्ष 2018 में पांच हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी जो अभी चल रही है।

वरिष्ठ अध्यापक के लिए वर्ष 2016 में 6 हजार और वर्ष 2018 में 9500 पदों पर भर्ती की गई। शिक्षा विभाग का कहना है कि दो साल में 68 हजार 544 भर्तियां की गई थीं पर उनमें से आठ हजार 428 अभ्यर्थियों ने काम पर ही नहीं आए। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव का कहना है कि सरकार को हर वर्ष रिक्तियों के हिसाब से भर्तियां निकालनी चाहिए। इससे शिक्षकों के पद खाली रहने की समस्या से निजात मिलेगी। इसके साथ ही सरकार को रीट की प्रक्रिया भी जल्द से जल्द शुरू करनी चाहिए। इससे तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकेगी। रीट के आयोजन के बिना तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती ही शुरू नहीं हो सकती है।

इसके अलावा अन्य पदों की भर्ती की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करवाई जानी चाहिए। दूसरी तरफ शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि सरकार बेरोजगार शिक्षकों को रोजगार देने के प्रति गंभीर है। इसलिए तृतीय श्रेणी के 31 हजार और व्याख्याताओं के तीन हजार पदों पर भर्ती की घोषणा कर दी गई है। सरकार पिछली भर्तियों में आई परेशानियों को दूर करने में लगी हुई है। इसके साथ ही रीट का आयोजन 2 अगस्त को होगा। इसके पैटर्न को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके बाद शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर कर लिया जाएगा।

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