ताज़ा खबर
 

जनसत्ता विशेष: मछली उत्पादन बढ़ाने को खास एंबुलेंस का सहारा

कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने राज्य सरकार की उक्त अनूठी पहल की तारीफ करते हुए ‘जनसत्ता’ से कहा कि इस तरह की विशेष एंबुलेंस से मछली पालन करने वाले किसानों को काफी लाभ मिलेगा।

Author Published on: February 19, 2020 1:23 AM
बंगाल में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए खास तरह की एंबुलेंस चलाई गई है (फोटो – इंडियन एक्सप्रेस)

शंकर जालान
पश्चिम बंगाल में मुख्य भोजन मछली-भात (चावल) है। धान के उत्पादन में बंगाल की स्थिति अन्य राज्यों से कहीं बेहतर है। अब मछली उत्पादन में भी राज्य सरकार पहले पायदान पर जाने के लिए कोशिश कर रही है। राज्य में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में सूबे की सरकार एक अनोखी पहल की है, जिसके तहत मछलियों के लिए एक खास तरह की एंबुलेंस चलाई जाएगी। इस एंबुलेंस में चिकित्सकों की देखरेख में मछलियों का समुचित इलाज किया जा सकेगा। फिलहाल प्रयोग के तौर पर दक्षिण चौबीस परगना जिले से सुंदरवन में एक ऐसी एंबुलेंस चलाई जा रही है, जिसमें मछलियों के इलाज की पूरी व्यवस्था है।

कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने राज्य सरकार की उक्त अनूठी पहल की तारीफ करते हुए ‘जनसत्ता’ से कहा कि इस तरह की विशेष एंबुलेंस से मछली पालन करने वाले किसानों को काफी लाभ मिलेगा। वहीं, जानकारों की राय है कि मछली पालन के दौरान मछुआरों को समय-समय पर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके कारणों का खुलासा करते हुए इन लोगों ने बताया कि कई बार जलाशय का पानी दूषित होने से मछलियों की मौत हो जाती है या फिर कई अलग-अलग प्रकार के रोगों के कारण मछलियों की शारीरिक दशा खराब हो जाती है। खास एंबुलेंस के जरिए न केवल बीमार मछलियों को निरोग किया जाएगा, बल्कि उन्हें मरने से भी बचाया जा सकेगा।

मछलियों की एंबुलेंस के आने से मछुआरों में भी खुशी की लहर है। सुंदरवन के मछली पालक विष्णु माझी का कहना है कि मछुआरे काफी खुश हैं। उन लोगों ने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था कि उनकी मछलियों के इलाज के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू की जाएगी। शस्य श्यामला कृषि विज्ञान केंद्र के अधीन चलने वाली इस खास एंबुलेंस के चिकित्सक स्वागत घोष ने बताया कि एंबुलेंस के भीतर एक वाटर टैंक है, जिसमें मछलियों को रखा जाता है। इसके अलावा एंबुलेंस के अंदर की मछलियों की सामान्य जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। इतना ही नहीं अत्याधिक अस्वस्थ मछली को जीवत अवस्था में प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचाने की सारी व्यवस्था इस खास एंबुलेंस में है।

एंबुलेंस की खासियत का जिक्र करते हुए घोष ने कहा कि इसके अंदर पानी की जांच के लिए अलग-अलग कंप्यूटराइज्ड प्रक्रिया भी मौजूद हैं। आने वाले दिनों में इस तरह की एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जाएगी। फिश एंबुलेंस सुंदरवन के मछुआरों के लिए वरदान तो साबित होगी ही साथ ही मछली उत्पादन का ग्राफ भी बढ़ेगा। वहीं, यूनियन रूरल सेल्फ एंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक उदय कुमार लाहिड़ी ने बताया कि उन्होंने इस तरह की एंबुलेंस पहली बार देखी है जो काफी अलग है और इससे मछुआरों को काफी फायदा होगा। खास तरह की यह एंबुलेंस मछलियों के इलाज में नि:संदेह कारगर साबित होगी।

Next Stories
1 जनसत्ता विशेष: शिक्षकों के एक लाख पद खाली
2 जनसत्ता विशेष: कैंसर पीड़ित बच्चों को मिले पढ़ाई-जीविका का सहारा
3 ‘अपराधियों जैसा हुआ सलूक, असभ्य इमिग्रेशन अधिकारी चिल्लाने लगे थे मुझ पर’, दिल्ली एयरपोर्ट से लौटाई गईं ब्रिटिश MP की आपबीती
ये पढ़ा क्या?
X