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शोध-अनुसंधान: खून की जांच का अनूठा ‘एल्गोरिदम’

भारतीय शोधकर्ताओं ने खून की सैकड़ों कोशिकाओं में से दुर्लभ या अलग कोशिका को ढूंढ़ने के लिए एक एल्गोरिदम या सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इससे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग जैसी बड़ी व घातक बीमारियों की जांच और उनके निदान में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की संभावना है। यह एल्गोरिदम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जयदेव, पीएचडी छात्र आशी जिंदल व प्रशांत गुप्ता और इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) दिल्ली के सेंटर फोर कंप्युटेशनल बायोलॉजी के प्रोफेसर देबारक सेनगुप्ता ने तैयार किया है।

Author Published on: January 1, 2019 5:12 AM
प्रोफेसर देबारक सेनगुप्ता (फाइल)

भारतीय शोधकर्ताओं ने खून की सैकड़ों कोशिकाओं में से दुर्लभ या अलग कोशिका को ढूंढ़ने के लिए एक एल्गोरिदम या सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इससे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग जैसी बड़ी व घातक बीमारियों की जांच और उनके निदान में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की संभावना है। यह एल्गोरिदम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जयदेव, पीएचडी छात्र आशी जिंदल व प्रशांत गुप्ता और इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) दिल्ली के सेंटर फोर कंप्युटेशनल बायोलॉजी के प्रोफेसर देबारक सेनगुप्ता ने तैयार किया है। इस टीम ने अपने शोध पत्र ‘डिस्कवरी ऑफ रेयर सेल्स फ्रॉम वालूमनस सेल एक्सप्रेसन डाटा’ का पेटेंट भी हासिल कर लिया है। इस शोध पत्र को ब्रिटेन की पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ ने भी छापा है। प्रोफेसर सेनगुप्ता ने बताया कि हमारे खून में सैकड़ों कोशिकाएं होती हैं, जो जीन स्तर पर एक-दूसरे से अलग होती हैं। जैसे खून की लाल और सफेद कोशिकाएं एक-दूसरे से अलग होती हैं। इनमें अलग या दुर्लभ कोशिका को पहचानना आसान नहीं है। उन्होंने एक उदाहरण देकर बताया कि मान लीजिए एक बाग में कुछ हजार पेड़ हैं जिनमें से हर पेड़ पर कई हजार पत्तियां हैं। इनमें से पांच से दस पत्तियां दुर्लभ हैं। उन्हें ढूंढ़ने के लिए हमें कई साल का समय लगेगा। ठीक इस तरह खून में मौजूद दुर्लभ कोशिका को खोजना आसान काम नहीं है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इस एल्गोरिदम को विकसित किया गया है।

प्रोसेफर सेनगुप्ता के मुताबिक इस एल्गोरिदम के माध्यम से कैंसर जैसी बीमारियों का पता शुरुआती चरणों में ही लग सकेगा। उन्होंने बताया कि कैंसर की कोशिकाएं खून की अन्य कोशिकाओं से बिलकुल अलग होती हैं। ऐसे में अगर खून की जांच के दौरान हमारे एल्गोरिदम के उपयोग से खून में कैंसर की कोशिकाओं का पता लग सकता है। इससे कैंसर का पता बहुत ही शुरुआती चरण में चल जाएगा, इससे मरीज के इलाज में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं कैंसर के इलाज के दौरान मरीज को कीमोथेरेपी दी जाती है। इस एल्गोरिदम के इस्तेमाल से कीमो के खिलाफ प्रतिरोध विकसित करने वाली कोशिकाओं के बारे में भी पता लग सकता है। इससे ऐसी कोशिकाओं को खून से अलग करने में भी आसानी होगी और इलाज बेहतर तरीके से हो पाएगा।

प्रोफेसर सेनगुप्ता के मुताबिक उन्हें इस एल्गोरिदम का पेटेंट मिल चुका है। अब इसका उपयोग कर आगे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए शोध शुरू होंगे जिसके बाद कुछ कंपनियां इससे उपकरण बनाकर लोगों तक पहुंचा पाएंगी। उनके मुताबिक इस एल्गोरिदम से खून की जांच भी महंगी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से खून की जांच में अधिक समय नहीं लगेगा। इसे जांच और उसके बाद इलाज में अधिक समय खराब नहीं होगा।

एम्स के साथ कैंसर पर हो रहा शोध
आइआइआइटी दिल्ली के सेंटर फोर कंप्युटेशनल बायोलॉजी ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के साथ मिलकर इस एल्गोरिदम का उपयोग कर कैंसर पर शोध करना शुरू भी कर दिया है। प्रोफेसर देबारक सेनगुप्ता के मुताबिक जल्द ही इस शोध के आधार पर चिकित्सा शुरू की जा सकेगी।

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