आरक्षित कोष: रिजर्व बैंक के खजाने पर खींचतान

सरकार ने रिजर्व बैंक के कोष से राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए पैसे मांगे। सरकार चाहती है कि बैंकिंग क्षेत्र को आरबीआइ और अधित तरलता दे। इसके अलावा 11 सरकारी बैंकों पर अपने उधार प्रतिबंधों को खत्म करने लिए सरकार रिजर्व बैंक से आग्रह कर रही है।

प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

जनसत्ता संवाद

रिजर्व बैंक के आरक्षित कोष के बारे में सरकार को सुझाव देने के लिए पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित करने के दो दिन बाद ही शीर्ष बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बैंकों के साथ-साथ पूरी अर्थव्यवस्था के लिए घातक हो सकता है पूंजी भंडार कम करना। देश का राजकोषीय घाटा कम करने में आरबीआइ पहले भी सरकार की थोड़ी-बहुत मदद करता रहा है। लेकिन कई कारणों से हाल में इसमुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया।

आरक्षित कोष का ढांचा
रिजर्व बैंक के पास 9.7 लाख करोड़ रुपए का आरक्षित कोष है। इसमें से कॉन्टिजेंसी फंड (जिसे नहीं छूना है) 2.3 लाख करोड़ रुपए है। करंसी एवं स्वर्ण पुनर्मूल्यांकन खाते में बैंक ने 6.92 लाख करोड़ रुपए रखे हैं, जो बीते साल के 5.3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हंै। पिछले वित्त वर्ष में यह आरक्षित कोष 8.38 लाख करोड़ था। बैंक के आरक्षित कोष में तीन माध्यमों से धन आता है- पहला, सरकारी बॉन्ड पर ब्याज, सरकार के द्वारा बाजार के उधारी लेने की फीसद और विदेशी मुद्रा में निवेश से हुई आय। दूसरा, सरकार को डिविडेंड देने के बाद बची आय और तीसरा, करंसी एवं स्वर्ण पुनर्मूल्यांकन के जरिए।

दुनिया के केंद्रीय बैंकों से तुलना
इसमें कोई शक नहीं कि आरबीआइ के पास भरपूर आरक्षित कोष है। इस मामले में आरबीआइ का स्थान दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों में चौथा है। आरबीआइ का परिसंपत्ति की तुलना में नकदी का कोष 26.8 फीसद है। नॉर्वे, रूस, मलेशिया और कोलंबिया में नकदी का कोष भारत के इस केंद्रीय बैंक से अधिक हैं। इजरायल, चिली और थाईलैंड के केंद्रीय बैंक नाम मात्र का आरक्षित कोष रखते हैं। बैंक आॅफ इंग्लैंड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का कैपिटल रेशियो 0.9 फीसद है। दुनिया में नॉर्वे के केंद्रीय बैंक का सर्वाधिक 40 फीसद, रूस का 36 फीसद, मलेशिया का 30 फीसद, भारत का 26.8 फीसद, स्विट्जरलैंड का 16 फीसद, इंडोनेशिया का 12 फीसद, फ्रांस का 10.7 फीसद, जर्मनी का आठ फीसद, अमेरिका का 0.9 फीसद और चीन का 0.1 फीसद है।

कब-कब समितियां
शीर्ष बैंक के आर्थिक पूंजी ढांचे (ईसीएफ) की रूपरेखा पर छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा चुका है, जिसे 90 दिनों के भीतर वित्त मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट देनी है। रिजर्व बैंक के पास कितना आरक्षित या अधिशेष कोष होना चाहिए, इस बारे में अतीत में तीन समितियां बन चुकी हैं। वर्ष 1997 में वी सुब्रमणियम समिति, वर्ष 2004 में उषा थोरट समिति और 2013 में वाई एच मालेगांम समिति ने इस मुद्दे पर गौर किया था। नई समिति यह सिफारिश देगी कि क्या केंद्रीय बैंक के पास आरक्षित कोष और बफर पूंजी आवश्यकता से अधिक है। वित्त मंत्रालय का विचार है कि रिजर्व बैंक अपनी कुल संपत्ति के 28 फीसद के बराबर बफर पूंजी रखे हुए है। इस बारे में वैश्विक नियम 14 फीसद का है। बीते साल अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने वहां की सरकार को अपने कोष में से 19 बिलीयन डॉलर दिए थे।

खींचतान के बड़े कारण
सरकार ने रिजर्व बैंक के कोष से राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए पैसे मांगे। सरकार चाहती है कि बैंकिंग क्षेत्र को आरबीआइ और अधित तरलता दे। इसके अलावा 11 सरकारी बैंकों पर अपने उधार प्रतिबंधों को खत्म करने लिए सरकार रिजर्व बैंक से आग्रह कर रही है। 11 बैंकों को तब तक के लिए उधार देने से रोक दिया गया है, जब तक उनका कर्ज भार खत्म नहीं होता। सरकार का कहना है कि इन प्रतिबंधों के कारण मध्यम और छोटे वर्ग के व्यवसायों को कर्ज मिलना मुश्किल हो गया है।

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