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राजा मानसिंह की छतरी को संवारने की हुई पहल

इतिहासकारों के मुताबिक राजा मानसिंह की छतरी (गंगा मंदिर) मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता था।

Author Published on: September 11, 2019 1:29 AM
यह देखना है कि इस प्राचीन निर्माण को पुराने स्वरूप में किस तरह वापस लाया जाए।

उत्तराखंड की तीर्थनगरी हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर ब्रह्मकुंड में गंगा के बीच बने गंगा मंदिर को उसके पुराने स्वरूप में वापस लाने के लिए हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण और कुंभ मेला प्रशासन ने कमर कस ली है। 22 सालों से अधूरा पड़ा यह मंदिर शुरू से ही विवादों में घिरा रहा है। जहां हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित इसे राजा मानसिंह की छतरी के नाम से पुकारते हैं, वहीं मंदिर के प्रबंधक और पुजारी इसे प्राचीन गंगा मंदिर मानते हैं। 1998 के कुंभ मेला से पहले अक्तूबर 1997 में इस मंदिर के मुख्य पुजारी बुधकर परिवार ने गंगा बंदी के समय मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया था। राजा मानसिंह की छतरी के नाम से मशहूर इस स्थापत्य निर्माण के मूल स्वरूप को बदलकर इसे बड़े मंदिर का रूप प्रदान किया गया था।

तीर्थ पुरोहितों की संस्था गंगा सभा ने इस मंदिर का आकार बदलने का विरोध किया था। तब बुधकर परिवार इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने पर यह मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंच गया। कुछ साल पहले हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण ने बुधकर परिवार को इस मंदिर के निर्माण की अनुमति प्रदान की थी। जिस पर बुधकर परिवार ने इस मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू किया था और इस पर फिर से विवाद शुरू हो गया।
तीर्थ पुरोहितों ने निर्माण कार्य कर रहे मजदूरों को मार-पीटकर मौके से भगा दिया था। जिस पर बुधकर परिवार मंदिर के निर्माण कार्य के लिए नैनीताल हाई कोर्ट सुरक्षा मांगने के लिए गया था। तब से यह मामला नैनीताल हाईकोर्ट में चल रहा था। एक पक्ष बुधकर परिवार मंदिर निर्माण की वकालत कर रहा था, जबकि दूसरा पक्ष गंगा सभा मंदिर निर्माण के खिलाफ अपना पक्ष रखते हुए इस मंदिर को पुराने स्वरूप में वापस लाने की मांग कर रहा था।

पिछले दिनों नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण को इस मंदिर को पुराने स्वरूप में लाने और इसके लिए प्राधिकरण को विशेषज्ञों की एक टीम बनाने और इसका निरीक्षण करने के आदेश दिए थे। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण ने आइआइटी रूड़की के निदेशक, सीबीआरआइ रूड़की के निदेशक और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के मनोनीत इंजीनियर सदस्य की एक समिति बनाई।

समिति को इस मंदिर उर्फ राजा मानसिंह की छतरी को मूल स्वरूप में वापस लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। समिति के सदस्यों, हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत, गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा, गंगा मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ कमलकांत बुधकर की पत्नी संगीता बुधकर इस मंदिर के स्थलीय निरीक्षण के समय मौजूद थे। यह समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण को सौंपेगी और यह रिपोर्ट प्राधिकरण नैनीताल हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। उसके बाद इस मंदिर को मूल स्वरूप में वापस लाने का कार्य प्रारंभ हो पाएगा। समिति अक्तूबर में गंगा बंदी के दौरान इस मंदिर का फिर मौका मुआयना करेगी और उसके बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना

इतिहासकारों के मुताबिक राजा मानसिंह की छतरी (गंगा मंदिर) मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता था। इतिहासकार प्रोफेसर डॉ ललित पांडे के मुताबिक इसका निर्माण मिर्जा राजा मानसिंह ने अकबर के शासनकाल के समय यानी लगभग साढे चार सौ साल पूर्व कराया था। यह प्राचीन मंदिर छतरीनुमा था और इसके चारों ओर खंभे थे। 1997 में बुधकर परिवार ने इस मंदिर के प्राचीन स्वरूप को ज्यों-का-त्यों रखकर उसके ऊपर नए मंदिर का ढांचा खड़ा कर दिया, जिसको लेकर हरिद्वार के पंडों और उनकी संस्था गंगा सभा ने जमकर विरोध किया।
विरोध के कारण हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण ने इस मंदिर का निर्माण बीच में ही रुकवा दिया, तब से इस मंदिर का निर्माण अधूरा पड़ा है और न्यायालय में यह मामला विचाराधीन है।

हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत का कहना है कि इस निर्माण को नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक उसके मूल स्वरूप में वापस लाया जाएगा। तीन सदस्यीय तकनीकी समिति ने इस मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया है। तीन महीने में कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। यह देखना है कि इस प्राचीन निर्माण को पुराने स्वरूप में किस तरह वापस लाया जाए। यदि इसका पुराना ढांचा मजबूत नहीं होगा तो उसके स्थान पर पुराने ढांचे से मिलता जुलता नया ढांचा कैसे बनाया जाएगा, इन सभी बिंदुओं पर समिति विचार करेगी। गंगा सभा के अध्यक्ष पंडित प्रदीप झा का कहना है कि राजा मानसिंह की छतरी एक ऐतिहासिक धरोहर है, इस धरोहर की जगह इसे जो नया स्वरूप दिया गया है, वह गलत है। नैनीताल हाई कोर्ट ने इसके ऐतिहासिक स्वरूप को पुन: बहाल करने का जो आदेश दिया है, उसका गंगा सभा ने स्वागत किया है।

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