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तीर्थस्थल: चौमुहां में ब्रह्मा का दुर्लभ मंदिर

एक कहानी के अनुसार, ब्रह्मा द्वारा भगवान शिव से झूठ बोलने के कारण उनकी पूजा नहीं किए जाने की बात कही जाती है। कहानी कुछ इस तरह है कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु में एक दूसरे से अधिक श्रेष्ठ होने की बहस छिड़ गई। इस विवाद के निर्णय के लिए दोनों भगवान शिव के पास पहुंचे और निर्णय करने का अनुरोध किया।

यूपी के मथुरा शहर के चौमुहां में स्थित ब्रह्मा का दुर्लभ मंदिर।

धर्मेंद्र कुमार
माना जाता है कि ब्रह्मा का मंदिर सिर्फ राजस्थान के पुष्कर में है लेकिन मथुरा शहर के नजदीक चौमुहां कस्बे में भी सृष्टि के इस रचयिता का एक मंदिर है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा ने इस जगत की रचना की। लेकिन, इसे कुदरत की एक अजीब बिडंबना ही कहा जाएगा कि जिसे सारी दुनिया का रचयिता माना जाता है, उसकी न तो पूजा करने का कोई विधान है और न ही उनके नाम का कोई खास मंदिर। दरअसल, इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं।

एक कहानी के अनुसार, ब्रह्मा द्वारा भगवान शिव से झूठ बोलने के कारण उनकी पूजा नहीं किए जाने की बात कही जाती है। कहानी कुछ इस तरह है कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु में एक दूसरे से अधिक श्रेष्ठ होने की बहस छिड़ गई। इस विवाद के निर्णय के लिए दोनों भगवान शिव के पास पहुंचे और निर्णय करने का अनुरोध किया।

भगवान शिव ने इस संदेह को दूर करने के लिए अपने शरीर का आकर विशाल कर लिया और ब्रह्मा को पैरों की ओर पाताल में और विष्णु को सिर की ओर आकाश में थाह लेने के लिए भेजा। शर्त यह रखी कि जो इस काम को जल्दी करेगा, वही श्रेष्ठ कहलाएगा। काफी देर बाद भगवान विष्णु आए और माफी मांगते हुए बोले कि उन्हें भगवान शिव के सिर की कोई थाह नहीं मिली है। लेकिन, ब्रह्मा ने भगवान शिव से झूठ बोलते हुए कहा कि काफी गहराई में जाकर सिर्फ पानी ही पानी है और पानी में बहुत अंदर जाकर पाताल लोक में शिव के पैरों की थाह मिली है।

इस झूठ पर भगवान शिव ने ब्रह्मा को शाप दे दिया और कहा कि जाओ तुम्हारी न तो कोई पूजा करेगा और न ही तुम्हारा कोई मंदिर बनेगा। इसी शाप के कारण कहीं भी आज तक न तो ब्रह्मा की कोई विशेष पूजा होती है और न ही कोई मंदिर है। लेकिन, राजस्थान के पुष्कर में मंदिर होने की एक अलग कहानी है।

पुराणों के अनुसार, हुआ कुछ यूं कि पुष्कर में ब्रह्मा को एक यज्ञ करना था और उस वक्त पत्नी सावित्री उनके साथ नहीं थीं। पत्नी वक्त पर यज्ञस्थल नहीं पहुंच पाईं। यज्ञ का समय निकला जा रहा था। लिहाजा, ब्रह्मा एक स्थानीय ग्वाल बाला से शादी करके यज्ञ में बैठ गए। देर से पहुंचीं सावित्री यज्ञ में अपनी जगह पर किसी और महिला को देखकर क्रोधित हो गईं। उन्होंने पति को शाप दे दिया कि जाओ इस पृथ्वी लोक में तुम्हारी कहीं कोई पूजा नहीं होगी।

सावित्री के क्रोधित रूप को देखकर सभी देवता डर गए। उन्होंने शाप वापस लेने की विनती की। गुस्सा शांत होने पर सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही ब्रह्मा की पूजा होगी। तदोपरांत, ब्रह्मा ने पुष्कर झील के किनारे यज्ञ किया। इसी स्मृति में यहां कार्तिक मेला लगता है। यहीं ब्रह्मा का एक प्राचीन मंदिर है। मथुरा के कस्बे चौमुहां में ब्रह्मा के मंदिर पीछे भी बड़ी रोचक कहानी है।

इस कहानी के अनुसार, ब्रह्मा एक बार आकाश मार्ग से गुजर रहे थे। इधर, मथुरा की धरती पर भगवान श्री कृष्ण अपने ग्वाल-बालों के साथ गाय चरा रहे थे और उनके साथ बेहद साधारण भोजन कर रहे थे। इस दृश्य से ब्रह्मा के मन में आया कि यह साधारण बालक जो गायें चरा रहा है और झूठा खाना भी खा रहा है, भला एक अवतारी पुरुष कैसे हो सकता है। ब्रह्मा ने उसी क्षण भगवान श्री कृष्ण की परीक्षा लेने की ठान ली।

उन्होंने विमान से उतरे गाय व बछड़ों सहित ग्वाल-बालों को एक गुफा में छिपा दिया। ब्रह्मा कभी गुफा की ओर देखते तो कभी मैदान की ओर लेकिन उन्हें हर तरफ एक जैसा ही नजारा दिख रहा था। ब्रह्मा समझ गए कि यह बालक नहीं बल्कि स्वयं अवतारी भगवान हैं।

उनका न केवल भ्रम दूर हुआ बल्कि उनका अहम भी चकनाचूर हो गया। अंतत: ब्रह्मा ने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना की। भगवान ने उन पर प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा तो ब्रह्मा ने यहां अपनी प्रतिस्थापना की इच्छा जाहिर की। साल 1960 के दशक में यहां विधिवत ब्रह्मा की मूर्ति स्थापना के बाद वर्तमान मंदिर बनाने की बात कही जाती है। माना जाता है कि यहां जो भी भक्त अपनी कोई इच्छा लेकर आता है तो वह अवश्य ही पूरी होती है।

वर्तमान में यह मंदिर बेहद दुर्दशाग्रस्त है। लेकिन, स्थानीय लोक भावना के अनुसार इस मंदिर का भी एक बड़ा महत्व है। यहां हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा को ब्रह्मा का वार्षिकोत्सव पर्व मनाया जाता है। कस्बे का नामकरण भी ब्रह्मा के चार मुख होने के कारण चौमुहां हुआ। पूर्व में इस कस्बे का नाम चौमुख भी हुआ करता था।

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