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नोट बदलने की लाइन से बन रही है दिहाड़ी

दिहाड़ी मजदूरों का दूसरों के नोट बदलवाने में इस्तेमाल होने के सवाल का बैंक अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया है।
Author नोएडा | November 14, 2016 04:06 am
एटीएम से पैसा निकालने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते लोग। (Source: Reuters)

एक हफ्ता पहले दिल्ली एनसीआर की आबोहवा के खराब होने पर निर्माण कार्यों पर लगी रोक से जहां दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट पैदा कर दिया था, उनमें से काफी लोगों को मोदी सरकार के 500 और 1 हजार रुपए के नोट बंद करने के फरमान से राहत मिली है। नोएडा के सेक्टर- 8, 9, 16 की झुग्गी बस्तियों, सदरपुर कालोनी, छिजारसी कालोनी, खोड़ा कालोनी और गेझा गांव में रहने वाले ऐसे काफी लोगों को पिछले 3 दिनों से नया काम मिल गया है। यह काम बैंकों के बाहर नोट बदलने की लाइन में लगने का है। जिसकी एवज में उन्हें 400- 500 रुपए मिल रहे हैं। इससे बे-परवाह कि नोट बदलने वाला कौन है, या मिलने वाले नए नोटों का इस्तेमाल कहां होगा? दिहाड़ी पर बेलदारी या अकुशल मिस्त्री का काम करने वाले पूरी तल्लीनता से घंटों लाइन में खड़े रहकर नोट बदलवाने वालों की भीड़ को बढ़ाए हुए हैं। हालांकि दिहाड़ी मजदूरों का दूसरों के नोट बदलवाने में इस्तेमाल होने के सवाल का बैंक अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया है।

नोएडा के सेक्टर- 62 रजत विहार से खोड़ा कॉलोनी जाने वाली रोड़ के तिराहे और थाना सेक्टर- 49 के पास ग्रीन वैली चौक पर रोजाना कई दर्जन की संख्या में दिहाड़ी मजदूर काम की तलाश में खड़े होते थे। ये लोग मकान, घर, दुकान बनाने आदि में मजदूर, मिस्त्री, रंगाई- पुताई आदि का काम करते हैं। रोजाना दिहाड़ी के रूप में 300- 500 रुपए लेने वाले ज्यादातर ऐसे लोग नोएडा में बिहार, झारखंड और मध्यप्रदेश से आए हैं। जो कई सालों से बदस्तूर इस काम को कर रहे हैं। 6 नवंबर को दिल्ली- एनसीआर के वातावरण में भारी स्मॉग होने पर जिलाधिकारी ने सभी तरह के निर्माण कार्यों पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। इस निर्देश से रोजाना मिलने वाली दिहाड़ी से परिवार का पालन पोषण करने वाले मजदूरों के आगे संकट पैदा हो गया था।

सलारपुर में रहने वाले ऐसे ही एक दिहाड़ी मजदूर रोशन ने बताया कि राशन देने वाले दुकानदार का उधार और मकान का किराया, दोनों के लिए महीने में 20 दिन काम मिलना जरूरी है। सर्दियों में गर्मियों के मुकाबले कम काम होता है। एक सप्ताह की बंदी के बाद तुरंत काम शुरू होंगे या नहीं, इस अनिश्चित्ता की वजह से कई साथी दूसरे काम की तलाश में दिल्ली या गांव जाने को तैयार हो गए थे। खोड़ा कॉलोनी में किराए पर रहने वाले दिहाड़ी मजदूर सोमेश ने बताया कि तीन दिनों पहले उन्हीं के गांव के एक आदमी ने बैंकों के बाहर लाइन में लगकर नोट बदलवाने की एवज में 400 रुपए दिलाने को कहा था। 4 हजार रुपए बदले जाने पर यह रकम मिलनी थी।

करीब 4 घंटे रोजाना लाइन में लगकर वह दो दिनों से सेक्टर- 6 के एक बैंक से रुपए बदलवा रहा है। पहले दिन 4 हजार रुपए बदले गए थे। उसी शाम को 400 रुपए मिल गए थे। दूसरे दिन 4 की जगह 2 हजार रुपए ही बैंक वाले ने लिए। तब केवल 200 रुपए ही ठेकेदार ने दिए। जानकारों के अनुसार कई फैक्ट्रियों और बड़े निर्माण ठेकेदारों ने नोट बदलवाने का जिम्मा कुछ लोगों को सौंपा हैं। जिन मजदूरों के पास आधार या वोटर कार्ड है, उनका नोट बदलने में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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