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WhatsApp: जासूसी की वजह से 3 दशक पहले एक सीएम को छोड़नी पड़ी कुर्सी, प्रधानमंत्री भी गंवा चुके हैं पद!

1988 में मीडिया में फोन टैपिंग को लेकर एक रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में कहा गया कि कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सत्ताधारी जनता पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: November 10, 2019 11:15 AM
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर (बाएं) और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री राम कृष्ण हेगड़े। (फाइल फोटो)

कर्नाटक में फोन टैपिंग और इस साल लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय पत्रकारों और एक्टिविस्ट के वाट्सएप हैकिंग का मामला इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। केंद्र सरकार ने जहां वाट्सएप हैकिंग पर आश्चर्य जताया वहीं फेसबुक के स्वामित्व वाली मैसेंजर कंपनी ने कहा कि उसने मई में ही इस बारे में अधिकारियों को जानकारी दे दी थी।

इंडियन एक्सप्रेस में छपे अपने कॉलम में प्रदीप कौशल का कहना है कि यह पहली बार नहीं है कि देश में जासूसी का मामला इतनी सुर्खियों में बना हुआ है। 1980 के दशक में मीडिया में ‘मिस्टर क्लीन’ की छवि रखने वाले राजीव गांधी जब अपनी ढलान पर थे, उस समय भी जासूसी का मामला उठा था।

जनता पार्टी के करिश्माई नेता रामकृष्ण हेगड़े उस समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। गैर कांग्रेसी खेमे में उन्हें संभावित पीएम पद के उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था। वह 1983 और 1985 में लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके थे। इस वजह से अपनी ही पार्टी में उनके कई विरोधी भी बन गए थे। 1988 में मीडिया में फोन टैपिंग को लेकर एक रिपोर्ट आई।

रिपोर्ट में कहा गया कि कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सत्ताधारी जनता पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं। मोइली ने राजनीतिक रूप से अनुपयुक्त मामले में माफी मांगने की बजाय इसे एक जासूसी का मामला बताते हुए इसके खिलाफ बिगुल फूंक दिया।

इस तरह के आरोप सामने आए की हेगड़े ने कर्नाटक में 51 राजनेताओं के फोन टैपिंग के आदेश दिए थे। ऐसे में हेगड़े के विरोधी, विशेष रूप से सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हेगडे़ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह मूल्यों पर आधारित राजनीति करते हैं। ये मामला संसद तक पहुंचा। इसके बाद 10 अगस्त 1988 को हेगड़े को अपना इस्तीफा देना पड़ा।

उसके बाद एसआर बोम्मई उनकी जगह मुख्यमंत्री बने। इसके तीन साल बाद ही 2 मार्च 1991 को 10 जनपथ रोड से दो लोगों प्रेम सिंह और राज सिंह को पकड़ा गया। इन लोगों ने स्वीकार किया कि वे हरियाणा सीआईडी के आदमी हैं। ये लोग कथित रूप से राजीव गांधी की जासूसी कर रहे थे।

चंद्रशेखर की सरकार से समर्थन लेने के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त कारण था। इसके बाद चार दिन बाद ही चंद्रशेखर ने 6 मार्च 1991 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, यह कभी सामने नहीं आ सका कि राजीव गांधी की जासूसी का आदेश किसने दिया था।

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