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फिर एक हुआ जनता परिवार

जनता दल के तकरीबन दो दशक पहले हुए विभाजन के बाद बुधवार को ‘जनता परिवार’ के छह दलों के नेता एक पार्टी बनाने के लिए रजामंद हुए। इसके नेता समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव होंगे।

जनता दल के तकरीबन दो दशक पहले हुए विभाजन के बाद बुधवार को ‘जनता परिवार’ के छह दलों के नेता एक पार्टी बनाने के लिए रजामंद हुए। इसके नेता समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव होंगे। सूत्रों का कहना है कि इस दल का नाम ‘समाजवादी जनता दल’ हो सकता है। सपा की ‘साइकिल’ इस पार्टी का चुनाव निशान हो सकता है। हालांकि इस पर पक्का फैसला एक समिति करेगी।

मुलायम सिंह के आवास पर बुधवार को हुई बैठक के बाद जद (एकी) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि हमने सर्वसम्मति से अपनी पार्टियों के विलय का फैसला किया है। यादव ने कहा कि एक छह सदस्यीय समिति नई पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और झंडे व अन्य मुद्दों के बारे में फैसले करेगी। जिन दलों का विलय हुआ है उनमें सपा, राजद, जद (एकी), जद(सेकु), इनेलोद और समाजवादी जनता पार्टी शामिल हैं। मुलायम सिंह यादव के घर पर इन दलों के शीर्ष नेताओं की हुई बैठक के बाद शरद यादव ने संवाददाताओं से कहा- हमारा विलय हो गया है।

जद (एकी) अध्यक्ष ने कहा कि सभी दलों ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि नए दल के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे। वे इस नए दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ ही संसदीय दल के भी अध्यक्ष होंगे। इस मौके पर मुलायम सिंह ने कहा- यह एक ऐतिहासिक फैसला है। हम एकजुट हैं और लोगों को आश्वस्त करते हैं कि बंधन मजबूत रहेगा। हम जनता की भावनाओं का सम्मान करेंगे। छह सदस्यीय समिति में जद(एस) के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राजद प्रमुख लालू प्रसाद, जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव, सपा नेता रामगोपाल यादव, इनेलोद के ओम प्रकाश चौटाला और समाजवादी जनता पार्टी के कमल मोरारका शामिल होंगे।

मुलायम सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार का मुकाबला करने के लिए एक नई राष्ट्रीय पार्टी की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावों के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि यह एक अहंकारी सरकार है। पहली बार केंद्र में एक ऐसी सरकार है जो विपक्षी दलों की राय नहीं लेती है। उन्होंने हर तरह के वादे किए। उन वादों का क्या हुआ।

मुलायम ने कहा कि जब कभी भी हम एक साथ आए हैं हमने दिल्ली में सरकार बनाई है। हम फिर ऐसा करेंगे। मुलायम का इशारा 1977 और 1989 की ओर था, जब समाजवादी दलों ने एक साथ मिल कर कांग्रेस का मुकाबला किया था और केंद्र में सरकार बनाई थी। इन दोनों मौकों पर भाजपा कांग्रेस विरोधी गठबंधन का हिस्सा थी। विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में 1989 में सरकार गठित होने के बाद उस समय के जनता दल का विभाजन हुआ और मुलायम, देवगौड़ा, नीतीश, लालू जैसे क्षत्रपों ने एक के बाद एक अपनी-अपनी पार्टी बनाई।

इस बीच सूत्रों ने यह जानकारी दी कि नए दल का नाम समाजवादी जनता दल हो सकता है। इस पार्टी के झंडे में दो तिहाई रंग लाल (समाजवादी झुकाव के कारण), और एक तिहाई हरा होगा। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के नेता संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने से पहले व्यापक मशविरा करने के हक में हैं। फिलहाल इस बात पर सहमति बनी है कि नई पार्टी संघीय दल होगा। लेकिन क्षेत्रीय नेताओं को अपने क्षेत्र में खुली छूट होगी।

लोकसभा में सपा के पांच, राजद के चार और जद (एकी), जद (सेकु) व इनेलोद के दो-दो सांसद हैं। यानी कुल 15 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में सपा के 15, जद (एकी) के 12 और जद (सेकु), राजद और इनेलोद के एक-एक सांसद सहित कुल 30 सदस्य हैं।

बिहार में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जद (एकी) और राजद ने एक दूसरे का धुर विरोधी होते हुए भी न केवल एक दूसरे से हाथ मिलाया है, बल्कि जनता परिवार से अलग हुई अन्य पार्टियों को भी एक करने की मुहिम छेड़ी है।

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