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‘जनता परिवार’ का एलान अगले हफ्ते, मुलायम सिंह होंगे अध्यक्ष

जद (एकी) ने रविवार को कहा कि बहुचर्चित जनता परिवार के विलय की घोषणा अगले हफ्ते हो सकती है क्योंकि महत्वपूर्ण विषयों को सुलझा लिया गया है। जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव के मुताबिक विलय होना तय है और यह जल्द ही होगा। सूत्रों ने बताया कि इस समूह में संसद में सबसे अधिक सांसदों […]

जद (एकी) ने रविवार को कहा कि बहुचर्चित जनता परिवार के विलय की घोषणा अगले हफ्ते हो सकती है क्योंकि महत्वपूर्ण विषयों को सुलझा लिया गया है। जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव के मुताबिक विलय होना तय है और यह जल्द ही होगा।

सूत्रों ने बताया कि इस समूह में संसद में सबसे अधिक सांसदों वाली पार्टी समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह विलय के बाद बनने वाली नई पार्टी के अध्यक्ष होंगे। लोकसभा में सपा के पांच सदस्य, राजद के चार और जद (एकी), जद (एस) और इनेलो के दो-दो सदस्य हैं।

निचले सदन में इनके केवल 15 सदस्य हैं। राज्यसभा में सपा के 15 सदस्य हैं जबकि जद (एकी) के 12 व इनेलो, जद (एस) और राजद के एक-एक सदस्य हैं। ऊपरी सदन में इस तरह इनके 30 सदस्य हैं। जद (एकी) महासचिव केसी त्यागी ने बताया कि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव इस बारे में इनेलो प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला और जद (एस) प्रमुख व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से बात करने के बाद विलय की योजना को एक-दो दिन में अंतिम रूप देंगे क्योंकि सपा, जद (एकी) और राजद में इस मुद्दे पर सहमति बन गई है। इस बारे में सोमवार से शुरू होने वाले हफ्ते में घोषणा हो सकती है। एक या दो दिन में मुलायम सिंह पूर्ववर्ती जनता परिवार के सभी घटकों की बैठक बुला सकते हैं। अब पार्टी के झंडे, चिन्ह और घोषणापत्र को लेकर कोई मतभेद नहीं है।

उन्होंने कहा कि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझा लिया गया है और कुछ छोटे विषयों को एक-दो दिन में सुलझा लिया जाएगा। जद (एकी) नेता ने कहा कि शुक्रवार को सपा प्रमुख की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी विषयों पर बारीकी से चर्चा की गई। जिसमें राजद प्रमुख लालू प्रसाद, जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिस्सा लिया।

भूमि विधेयक के मौजूदा स्वरूप को जनता परिवार का समर्थन नहीं:

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक के प्रति क्षेत्रीय दलों से समर्थन जुटाने के राजग सरकार के प्रयासों के बीच जद (एकी) ने रविवार को कहा कि जनता परिवार का कोई सदस्य प्रस्तावित कानून के मौजूदा रूप को समर्थन नहीं देगा। जद (एकी) के महासविच केसी त्यागी ने राज्यसभा के सत्र को स्थगित किए जाने के सरकार के फैसले पर हैरानी जताते हुए सवाल किया कि इतनी जल्दबाजी की क्या जरूरत थी।

त्यागी ने बताया कि जनता परिवार से जुड़े दलों और संगठनों ने शुक्रवार को एक बैठक में निर्णय किया कि इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप के खिलाफ ग्रामीण स्तर से लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक प्रदर्शन किए जाएंगे। विधेयक को उसके मौजूदा रूप में पास नहीं होने देने का दम भरते हुए उन्होंने कहा कि जरूरी हुआ तो हम संसद में व्यवधान डालेंगे। भावी रणनीति की घोषणा कुछ दिन में की जाएगी। उन्होंने बताया कि साझा रणनीति तैयार करने के लिए बीजद और तृणमूल कांग्रेस से भी चर्चा की जाएगी।

कांग्रेस की ओर से इस विधेयक के विरुद्ध विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास कर रहे जयराम रमेश ने भी रविवार को त्यागी से विचार विमर्श किया। जद (एकी) के अध्यक्ष शरद यादव ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को इस विधेयक के बारे में लिखे पत्र में कहा कि वे इससे संबंधित पुराने विधेयक में संशोधन किए जाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआइए) प्रावधान को हटाए जाने के विरुद्ध है। त्यागी ने साथ ही कहा कि जनता परिवार सरकार के साथ चर्चा के लिए तैयार है, क्योंकि लोकतंत्र में विचार विमर्श की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को कोई फैसला करने से पहले विपक्षी दलों और किसान संगठनों की बैठक बुलानी चाहिए। अन्यथा जनता परिवार से संबंधित दल भूमि विधेयक में लाए गए संशोधनों का कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने बताया कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में जनता परिवार के दलों की शुक्रवार को हुई बैठक में भूमि विधेयक पर अपना रुख तय कर लिया गया है। इस बैठक में राजद प्रमुख लालू प्रसाद, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव भी उपस्थित थे।

राज्यसभा का सत्र स्थगित करने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए त्यागी ने कहा कि ऐसा केवल इसलिए किया गया है कि भूमि अध्यादेश को फिर से जारी किया जा सके। भूमि विधेयक मामले में सभी विपक्षी दलों और हितधारकों को शामिल किए जाने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा- पहली बात तो यह कि हम 2013 में यूपीए के समय पास भूमि विधेयक में कोई खामी नहीं पाते हैं और अगर सरकार वही विधेयक लाती है तो हम उसे समर्थन देने को तैयार हैं। सरकार कथित जन हित के नाम पर कुछ संशोधन लाना भी चाहती है तो हम उसके साथ बैठने को तैयार हैं। लेकिन सरकार को इसके लिए सभी विपक्षी दलों और किसान संगठनों को शामिल करना होगा।

भूमि अध्यादेश को फिर से जारी करने के लिए सरकार ने राज्यसभा के सत्र को स्थगित कर दिया है। संविधान के तहत प्रावधान है कि अध्यादेश जारी करने के लिए संसद का कोई एक सदन स्थगित होना चाहिए। 23 फरवरी को शुरू हुए संसद के बजट सत्र की इन दिनों महीने भर की छुट्टी चल रही थी। पिछले साल दिसंबर में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश जारी हुआ था और इसकी जगह लेने वाले विधेयक को संसद के पास नहीं किए जाने के कारण पांच अप्रैल को इसकी मियाद समाप्त हो जाएगी।

इस अध्यादेश का स्थान लेने वाले विधेयक को नौ संशोधनों के साथ लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन संयुक्त विपक्ष ने राज्यसभा में इस पास कराने के सरकार के प्रयासों को नाकाम कर दिया।

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