14 सितंबर को सचिन खजूरिया ने अपने परिवार को फोन करके बताया कि उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध में अग्रिम मोर्चों पर भेजा जा रहा है और वे कुछ समय तक उनसे बात नहीं कर पाएंगे। रूस में पढ़ाई और रोजगार की तलाश में गए 24 साल के सचिन के परिवार ने उनसे आखिरी बार इसी दौरान बात की थी।

28 मार्च को जम्मू के अखनूर जिले के पहाड़ीवाला गांव में रहने वाले खजूरिया परिवार को वह खबर मिली जिसका उन्हें महीनों से डर था। वह यह थी कि सचिन मोर्चे पर शहीद हो गए, वहां जाने के कुछ ही दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई। रविवार को परिवार ने गांव में ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया।

सचिन जम्मू के तीन युवाओं में शामिल थे। वह 5 अगस्त को दिल्ली से रूस जाने वाले विमान में सवार हुए थे। उनमें से एक सुरक्षित लौट आया, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। उनके छोटे भाई कौशल खजूरिया ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “उसकी (सचिन) की सितंबर में मृत्यु हो गई, लेकिन परिवार को इसकी सूचना नहीं दी गई।”

पढ़ाई और काम करने की उम्मीद से गए थे सचिन

रूस-यूक्रेन युद्ध में जम्मू से मरने वाला सचिन दूसरा व्यक्ति है। पिछली फरवरी में आरएस पुरा के गोवाना गांव के मनिंदर सिंह का शव वापस लाया गया था। 50 साल के सब्जी विक्रेता बनारसी दास के दो बेटों में सबसे बड़े सचिन, पढ़ाई और काम करने की उम्मीद से रूस गए थे।

जब सचिन ने प्रस्थान किया, तब वह अखनूर के सरकारी डिग्री कॉलेज में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे और उन्होंने एक दोस्त के साथ रूस जाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने एक स्थानीय एजेंट से संपर्क किया। उसने उन्हें स्टडी वीजा के लिए आवेदन करने में मदद की। परिवार ने बताया कि सचिन का वह दोस्त भी लापता है, जिसके कहने पर उसने एजेंट से संपर्क किया था। 25 अगस्त को सचिन ने अपने परिवार को फोन करके बताया कि उसे सेना में कुली की नौकरी मिल गई है।

परिवार से सचिन ने लगाई थी गुहार

दिसंबर में एक वीडियो सामने आने के बाद जिसमें सचिन और एक अन्य युवक अपने परिवारों से उन्हें घर वापस लाने में मदद की गुहार लगाते नजर आए, खजूरिया परिवार ने हस्तक्षेप की मांग शुरू कर दी। कौशल ने कहा, “हमने बीजेपी सांसद जुगल शर्मा और यहां तक ​​कि कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा से भी मदद के लिए संपर्क किया। हम चाहते थे कि केंद्र सरकार इस मामले को रूसी अधिकारियों के साथ उठाए।”

कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि एक बड़ा माफिया बेरोजगार युवाओं को रूस की ओर आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखूंगा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी आग्रह करूंगा कि वे राजनयिक चैनलों के माध्यम से रूस के साथ मुआवजे के मामले को उठाएं।”

युवा विदेश में नौकरी के प्रस्तावों के झांसे में आ जाते हैं- देवेंद्र सिंह

पिछले दिसंबर में परिवार से डीएनए सैंपल मांगे गए थे और उसके बाद उन्हें उनकी मृत्यु की सूचना दी गई। उनके अवशेष पिछले हफ्ते लौटाए गए। पहाड़ीवाला गांव के पूर्व सरपंच देवेंद्र सिंह के अनुसार, बेरोजगारी के कारण स्थानीय युवा विदेश में नौकरी के प्रस्तावों के झांसे में आ जाते हैं। सरकार का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश में कुल बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 3.5 प्रतिशत है। मिशन युवा के तहत पिछले साल जनवरी में 64.8 लाख की आबादी पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि 18-50 उम्र के 4.73 लाख लोग बेरोजगार थे, लेकिन काम करने के इच्छुक थे।

रूस-यूक्रेन जंग के चार साल

यूक्रेन और रूस के बीच जंग के 4 साल हो गए हैं। इसी बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि रूस के साथ लगभग चार साल के युद्ध के बाद यूक्रेनी लोग थक चुके हैं, लेकिन उन्होंने यह साफ कर दिया कि मॉस्को की मांगों के आगे झुकना कोई विकल्प नहीं है। साथ ही जेलेंस्की ने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन की संप्रभुता को कमजोर करने वाला कोई भी समझौता देश को पूरी तरह से खोने के बराबर होगा। पढ़ें पूरी खबर…