ताज़ा खबर
 

कश्मीर: सरकार का सीजफायर, रमजान के पहले दिन ही युवक की हत्या, शहीद की पत्नी ने भी उठाए सवाल

शहीद सीताराम की पत्नी का कहना है कि 'भारत ने सुरक्षाबलों को रमजान के दौरान ऑपरेशन करने से रोक दिया है, लेकिन मेरे पति पाकिस्तान द्वारा की गई गोलीबारी में शहीद हो गए, अब आर्थिक सहायता देने से क्या होगा?

जम्मू कश्मीर में रमजान के पहले ही दिन आतंकियों ने की एक युवक की हत्या। (image source-Facebook/representational image)

केन्द्र सरकार द्वारा रमजान के दौरान कश्मीर में सीजफायर के ऐलान के बावजूद घाटी में हिंसा जारी है। बता दें कि पवित्र माह रमजान के पहले ही दिन कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में एक युवक की अज्ञात आंतकियों द्वारा नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई है। घटना बांदीपोरा के हाजिन इलाके के बोना महोल्ला की है, जहां रहने वाले 23 वर्षीय युवक हिलाल अहमद पारे को 2 नकाबपोश आतंकी घीसटकर उसके घर से ले गए और फिर गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। गुरुवार को हिलाल अहमद पारे का शव उसके घर के नजदीक स्थित एक बगीचे से बरामद हुआ है। वहीं पाकिस्तान द्वारा भी जम्मू कश्मीर के आरएस पुरा सेक्टर में सीजफायर का उल्लंघन किया गया। पाकिस्तान की इस गोलीबारी में बीएसएफ का एक जवान सीताराम उपाध्याय शहीद हो गया।

शहीद की विधवा ने भी भारत सरकार के सीजफायर के ऐलान पर सवाल खड़े किए हैं। शहीद सीताराम की पत्नी का कहना है कि ‘भारत ने सुरक्षाबलों को रमजान के दौरान ऑपरेशन करने से रोक दिया है, लेकिन मेरे पति पाकिस्तान द्वारा की गई गोलीबारी में शहीद हो गए, अब आर्थिक सहायता देने से क्या होगा? यह मेरे पति को तो वापस नहीं ला सकती है ना!’ बता दें कि कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार और विपक्ष के निवेदन पर केन्द्र सरकार ने रमजान के दौरान घाटी में सीजफायर रखने का ऐलान किया है। इस समय में घाटी में आतंकियों के खिलाफ भी कॉम्बेट ऑपरेशन नहीं किए जाएंगे। हालांकि हमला होने की स्थिति में सुरक्षाबल जवाब देंगे। हालांकि अलगाववादी नेता केन्द्र सरकार के इस ऐलान से भी खुश नहीं हैं और इसे सरकार के बनावटी उपाय बताए हैं। जेकेएलएफ नेता यासीन मलिक का कहना है कि सरकार कश्मीरियों को जीने के लिए सिर्फ एक माह का समय दे रही है।

वहीं आतंकियों की तरफ से अभी तक सीजफायर की ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। बांदीपोरा में युवक की हत्या से घाटी में डर का माहौल बन गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले साल 2000 में भी तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने कश्मीर में रमजान के दौरान सीजफायर का ऐलान किया था। लेकिन इस दौर में घाटी में हिंसा की घटनाएं काफी बढ़ गईं थी। दरअसल आतंकियों ने सीजफायर का फायदा उठाकर आतंकी गतिविधियां बढ़ा दी थीं, जिससे घाटी में हिंसा का नया दौर शुरु हो गया था। ऐसे में सुरक्षाबल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App