जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में शुक्रवार तड़के उस समय हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया जब एक संदिग्ध कार पुलिस की चेकपोस्ट को नजरअंदाज कर फरार हो गई। घटना के बाद पुलिस, सीआरपीएफ और भारतीय सेना ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। कई घंटे की तलाश के बाद कार को रामबन जिले के दलवास लिंक रोड से बरामद कर लिया गया।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, कार श्रीनगर से जम्मू की ओर जा रही थी। शुक्रवार सुबह करीब 3:30 बजे चंदरकोट पुलिस चेकपोस्ट पर पुलिसकर्मियों ने वाहन को रुकने का इशारा किया। लेकिन चालक ने वाहन नहीं रोका और नाशरी की ओर तेज रफ्तार से निकल गया।
पूरे जिले में तलाशी अभियान
घटना के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिलेभर में अलर्ट जारी कर तलाशी अभियान शुरू किया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ सीआरपीएफ और भारतीय सेना के जवान भी मौके पर पहुंचे। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) और उससे जुड़े प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा जांच और तलाशी अभियान तेज कर दिया गया।
व्यापक तलाशी के बाद सुरक्षा बलों ने संदिग्ध कार को दलवास लिंक रोड से बरामद कर जब्त कर लिया। हालांकि, कार में सवार लोगों की पहचान और उनका पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
जांच एजेंसिया कर रहीं जांच
पुलिस यह जांच कर रही है कि वाहन चालक ने चेकपोस्ट से भागने की कोशिश क्यों की। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं पर काम कर रही हैं जिनमें आपराधिक गतिविधि, सुरक्षा संबंधी खतरा या जांच से बचने की कोशिश जैसे एंगल भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि एहतियात के तौर पर पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जांच आगे बढ़ने के साथ अधिक जानकारी साझा की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकवाद विरोधी अभियानों और सुरक्षा संबंधी घटनाओं के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं। विशेष रूप से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर वाहनों की जांच, पहचान सत्यापन और क्षेत्र में गश्त लगातार बढ़ाई गई है ताकि आतंकियों, हथियारों और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
370 हटाने के सात साल: जम्मू-कश्मीर में क्या बदला?
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे और राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन को सात साल पूरे हो चुके हैं। साल 2019 में पांच अगस्त के दिन भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत दिए गए विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था। भारत सरकार के इस फैसले का न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की कुछ पार्टियां बल्कि अन्य कई सियासी दल भी विरोध कर रहे हैं।
