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‘ड्राइंग रूम में आकर चुपके बैठ गए आतंकी, बहू ने लाकर दिया पानी, फिर तान दी बंदूक’, बीजेपी नेता ने सुनाया खौफनाक मंजर

विजय कुमार वर्मा ने बताया कि "आतंकियों ने उनके साथ गाली-गलौज या मारपीट नहीं की, लेकिन मेरा फोन ले लिया। इसके बाद उन्होंने फोन से किसी से कश्मीरी भाषा में बात भी की, जो मुझे समझ नहीं आयी।"

प्रतीकात्मक तस्वीर, (PTI Photo)

भारतीय सुरक्षाबलों ने शनिवार को जम्मू के रामबन इलाके में हुई एक मुठभेड़ में तीन आतंकियों को ढेर कर दिया था। ये आतंकी रामबन के बटोते कस्बे में स्थित एक घर में छिपे हुए थे। बता दें कि जिस घर में आतंकी घुसे, वो घर भाजपा के बूथ प्रेसीडेंट विजय कुमार वर्मा का है। आतंकियों ने भाजपा नेता के घर में घुसकर उन्हें करीब 5 घंटे तक बंधक बनाए रखा। सुरक्षाबलों द्वारा मुठभेड़ में आतंकियों को खत्म कर दिए जाने के बाद ही विजय कुमार वर्मा आजाद हो सके।

आतंकियों के चंगुल में करीब 5 घंटे तक फंसे रहने के बाद विजय कुमार ने मीडिया के साथ अपनी आप-बीती साझा की। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में भाजपा नेता विजय कुमार वर्मा ने बताया कि “शनिवार सुबह करीब 11.30 बजे तीन आतंकी उनके घर में घुसे। उस वक्त घर में मेरे साथ मेरी पत्नी, बहु और एक पड़ोसी थे। ये हथियारबंद लोग, जिनमें से दो ने दाढ़ी रखी हुई थी वहीं एक क्लीन शेव था, अंदर आए और चुपचाप आकर कमरे में बैठ गए। उनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच होगी। उन्होंने हमसे कोई बात नहीं की लेकिन हम इससे डर गए।”

भाजपा नेता ने बताया कि उनकी बहु ने उन्हें पानी लाकर दिया, लेकिन उन्होंने पीने से मना कर दिया। वर्मा ने बताया कि इस दौरान उन्होंने अपने परिजनों को आंखों का इशारा कर घर से बाहर जाने को कहा। वर्मा के अनुसार, “एक-एक कर उनके परिवार वाले घर से बाहर चले गए और जब मैंने घर से बाहर जाने की कोशिश की तो उनमें से एक आतंकी ने बंदूक से इशारा कर मुझे चुपचाप बैठने को कहा।”

विजय कुमार वर्मा ने बताया कि “आतंकियों ने उनके साथ गाली-गलौज या मारपीट नहीं की, लेकिन मेरा फोन ले लिया। इसके बाद उन्होंने फोन से किसी से कश्मीरी भाषा में बात भी की, जो मुझे समझ नहीं आयी।”

वर्मा ने बताया कि ‘आतंकियों ने उनसे यह भी पूछा कि क्या उनके पास कोई वाहन है, लेकिन मैंने उनसे झूठ बोला। संभवतः वह श्रीनगर जाना चाहते थे। उनके पास हैंड ग्रेनेड, एके 47 राइफल, पिस्टल और एक इंसास राइफल भी थी।’

वर्मा के अनुसार, “जब मुठभेड़ शुरू हुई तो वह एक कमरे में थे और एक आतंकी भी उनके साथ था, जबकि दो आंतकी दूसरे कमरों में थे। इसके बाद धमाकों और गोलियां चलने की आवाज आने लगी। गोलियां चलने की आवाज बंद होने के बाद मैं बाहर निकला।”

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