राजशाही ठाट-बाट से पालकी में जा रहे डीसी की तस्वीर वायरल, सफाई में कही ऐसी बात आप भी चौंक जाएंगे

डीसी ऐजाज भट ने कहा कि वह निश्चित नहीं थे कि वह उन रास्तों को तय कर पाएंगे जिस पर चलते हुए कई साथी बीमार पड़ गए। वहीं, उनको पालकी पर ढोने वाले लोगों का कहना है कि डीसी भट पहले ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने उनके गांव का दौरा किया है।

Author Updated: July 25, 2019 10:32 AM
पालकी में सुदूर इलाकों का दौरा करने जाते डीसी रामबन। (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

सोशल मीडिया पर इन दिनों जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के डीसी की एक तस्वीर काफी वायरल हो रही है और लोग इस पर जमकर ताने दे रहे हैं। वायरल ही रही तस्वीर में डेप्यूटी कमिश्नर (डीसी) शौकत ऐजाज भट एक पालकी पर बैठे हुए हैं और इसे पांच लोग उठाकर चल रहे हैं। यह फोटो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने इसे देखते ही “आधुनिक दिनों के राजा” और ”श्री श्री श्री डीसी रामबन जी” जैसे संबोधनों से ताने मारने शुरू कर दिए। लोगों की यह प्रतिक्रिया सिर्फ तस्वीर देखते ही शुरू हुई, इसके पीछे की कहानी शायद ही किसी को मालूम हो। दरअसल, डीसी रामबन जिले के सुदूर दुर्गम इलाके के उन गावों का दौरा कर रहे हैं, जहां आज तक कोई भी वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंच पाया है।

डीसी ऐजाज भट ने कहा कि वह निश्चित नहीं थे कि वह उन रास्तों को तय कर पाएंगे जिस पर चलते हुए कई साथी बीमार पड़ गए। वहीं, उनको पालकी पर ढोने वाले लोगों का कहना है कि डीसी भट पहले ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने उनके गांव का दौरा किया है। जिलाधिकार भट चका कुंडी इलाके का दौरा कर रहे थे। लेकिन, उनकी इस तस्वीर को देखकर लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा। हालांकि, ग्रामीण और कर्मचारी इसे दूसरे नजरिए से देखते हैं। शोपियां के रहने वाले भट कहते हैं, “प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते मेरा दायित्व बनता है कि मैं लोगों की सेवा करूं और यही वजह थी कि मैं उनके दरवाजे तक गया। वहां तक ट्रासपोर्ट के दूसरे माध्यम नहीं होने के चलते उन लोगों में मुझे पालकी पर बैठाकर गांव तक ले गए। मैं 58 साल का हूं और मुझे कुछ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कते हैं।”

स्थानीय कर्मचारियों के मुताबिक भट और अन्य कर्मचारी रामबन से 20 किलोमीटर दूर गांवों का दौरा किए थे। इसके लिए ग्रामीणों ने उनसे आग्रह भी किया था। इस दौरान डीसी ने चक्का A1, कक्का A2, बिबरोथा और सुचेतर पंचायतों का दौरा किया। इन इलाकों में लगभग 7 से 8 हजार लोग रहते हैं, लेकिन इलाके में सड़क नहीं है और ट्रांसपोर्ट का कोई माध्यम भी नहीं है। कभी डोडा का हिस्सा रहने वाला रामबन को 2014 में अलग जिला घोषित किया गया। लेकिन, अभी तक इसके अधिकांश कार्यालय डोडा में ही है। कुंडी गांव के लंबरदार सुभाष चंदर बताते हैं,”यहां प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। बीमार होने पर दुर्गम पहाड़ी रास्तों के जरिए और चेनाब के किनारे-किनारे 8 किलोमीटर दूर दवाई लेने जाना पड़ता है।”

चंदर बताते हैं कि तमाम असुविधाओं के बावजूद डीसी रामबन ने उनके क्षेत्र का दौरा किया और लोगों की मुसीबतें जानीं। यह क्षेत्र बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से काफी वंचित है। चंदर के मुताबिक, “डीसी भट जब गांव के सरकारी स्कूल में पहुंचे तब लोगों ने ढोल-नगाड़ों पर नाच-गाकर उनका स्वागत किया। यह पहली मर्तबा था जब कोई जिला अधिकारी उनके गांव पहुंचा था।”

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