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बस इस एक गलती से मारा गया रियाज नायकू, जानिए हिजबुल सरगना के ढेर होने की कहानी

घाटी में हाल में हुई कुछ वारदात में रियाज नायकू की बड़ी भूमिका थी। हालांकि, हर बार वह वारदात को अंजाम देने के बाद बच निकलता था। यह खूंखार आतंकी बुधवार को भी सुरक्षा बलों को चकमा देने में सफल हो जाता, अगर एक गलती नहीं करता।

Security forces south Kashmir Pulwama district 850दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के बेगीपोरा गांव में मुठभेड़ स्थल के पास सुरक्षा बल के जवान। (सुहैब मसूदी)

Jammu Kashmir, Hizbul Commander Riyaz Naikoo killed Story: सुरक्षा बलों ने आतंक-रोधी अभियान के तहत बुधवार को हिजबुल मुजाहिद्दीन के शीर्ष कमांडर रियाज नायकू को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। 8 जुलाई 2016 को बुरहान वानी के मारे जाने के बाद रियाज नायकू हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर बना था। उसके सिर पर 12 लाख का इनाम था।

नायकू एक निजी स्कूल में गणित का शिक्षक था। उसे पेंटिंग का भी शौक था। खासकर गुलाब की तस्वीरों पर रंग भरने का ज्यादा ही शौकीन था। घाटी में हाल में हुई कुछ वारदात में उसकी बड़ी भूमिका थी। हालांकि, हर बार वह वारदात को अंजाम देने के बाद बच निकलता था। यह खूंखार आतंकी बुधवार को भी सुरक्षा बलों को चकमा देने में सफल हो जाता, अगर एक गलती नहीं करता।

नायकू को जम्मू कश्मीर पुलिस, इंडियन आर्मी और सीआरपीएफ ने एक संयुक्त ऑपरेशन में मार गिराया है। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) विजय कुमार ने हमारे सहयोगी समाचार पत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, ‘हां, हमने उसे मार दिया है। वह अवंतीपोरा में एक मुठभेड़ में अपने सहयोगी के साथ मारा गया।’

पुलिस ने अभी उसके सहयोगी की पहचान नहीं की है। सूत्रों ने बताया कि उसने एक गलती की और उसका फोन नंबर पुलिस के रडार पर आ गया। टेक्निकल इनपुट मिलने के बाद उसने सर्च अभियान शुरू किया और मुठभेड़ में उसे ढेर कर दिया।

विजय कुमार ने बताया, ‘नायकू को मार गिराना घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता है। पिछले 10 दिनों में हमने हिजबुल और एजीएच (अंसार गजवातुल हिंद) का असर कम करने में सफल रहे हैं। हमारा आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।’

पुलिस सूत्रों ने बताया, ‘सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि नायकू बेगीपोरा गांव छिपा है। इसके बाद मंगलवार रात, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों ने गांव को घेर लिया। बुधवार सुबह उसके ठिकाने का पता चला, लेकिन तभी नायकू और उसके सहयोगी ने फायरिंग शुरू कर दी। हमने भी जवाबी फायरिंग की। इसी दौरान वे पास के घर में छिप गए, लेकिन गोलीबारी जारी रखी।’

सूत्रों ने बताया, ‘गांव में यह बात फैल गई कि नायकू फंस गया है। बेगीपोरा और आसपास के ग्रामीण मुठभेड़ वाली जगह पहुंचने लगे, ताकि आतंकियों को भागने का मौका मिल जाए, लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन्हें रोक दिया। इसका उन्होंने विरोध किया। इस कारण उनकी पुलिस से झड़प भी हुई।’

सूत्रों ने बताया, ‘रियाज बात करने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का इस्तेमाल करता था। वह मुश्किल से फोन का इस्तेमाल करता था। वह बैट (BAT) मैसेंजर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था। इसमें उसका नाम विलियमसन था। इस कारण उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाती थी। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से पुलिस एक फोन नंबर पर नजर रखे हुए थी। उसे शक था कि नायकू इसका इस्तेमाल करता है।’

सूत्रों के मुताबिक, ‘एक ही फोन का इस्तेमाल करना उसके लिए असामान्य था। लेकिन उसने यह गलती की और उसका फोन नंबर पुलिस के रडार पर आ गया। उसके टेक्निकल इनपुट लेकर सर्च अभियान शुरू हुआ। लंबी घेराबंदी और सर्च में उसका ठिकाना ढूंढ़ निकाला गया।’

पुलिस ने बताया कि अवंतीपोरा में मंगलवार रात आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच एक अन्य मुठभेड़ में भी दो आतंकवादी मारे गए हैं। उनके पहचान अभी उजागर नहीं हुई।

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