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कश्मीर: सांप काटने पर 16 घंटे अस्पताल दर अस्पताल भटकती रही, पैरों में सूजन आया, बेहोश हुई फिर भी नहीं बचा सकी बेटे की जान

डॉक्टरों और मरीजों का कहना है कि आर्टिकल 370 को रद्द करने के बाद से घाटी में दो महीने से चल रहे प्रतिबंध के दौरान कई लोगों की जान चली गई है। लोगों की शिकायत है कि ज्यादातर मौते सही समय पर इलाज न मिलने के कारण हुई है।

Jammu Kashmirजम्मू और कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को छीन लिया गया। (PTI Photo/S Irfan)

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद लगाए गए प्रतिबंधों का असर राज्य की जनता पर पड़ रहा है। बारामुला में एक मां अपने बचने की जान बचाने के लिए अस्पताल दर अस्पताल भटकती रहीं लेकिन वह फिर भी अपने बच्चे की जान नहीं बचा सकी। यहां सजा बेगम नाम की एक महिला के 22 वर्षीय बेटे को सांप ने काट लिया था लेकिन घाटी में मोबाइल बैन की वजह से वह मौके पर एंबुलेंस नहीं बुला सकी। इसके बाद वह 16 घंटे तक लगातार इलाज के लिए अस्पताल दर अस्पताल भटकती रहीं। इस दौरान उनके पैर में सूजन भी आ गई और वह बेहोश तक हो गईं।

‘द टेलेग्राफ’ के मुताबिक घटना 13 अगस्त की है जब बेगम का बेटा आमिर फारुख दार परिवार की भेड़ों को बारामूला शहर के पास लेकर घुम रहा था। इस दौरान उसे एक जहरीले सांप ने काट लिया। किसी तरह फारुख घर पहुंचा और मां को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है। मां बेटे को लेकर तुरंत गांव के पब्लिक हेल्थ सेंटर पर गईं लेकिन वह बंद था। हेल्थ सेंटर पर ताला देख मां और ज्यादा परेशान हो गई।

इसके बाद मां लोगों से बारामुला डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल तक बेटे को किसी वाहन में ले जाने की गुहार लगाती रही। किसी तरह एक एंबुलेंस का इंतजाम किया गया और बेटे को इलाज के लिए श्रीनगर रवाना कर दिया गया। परिवार के मुताबिक इस दौरान एंबुलेंस को रास्ते में सेना के जवानों ने कई बार रोका। मां ने बताया कि आमिर इस दौरान अपनी आखें लगातार बंद कर रहा था और उसकी हालात बेहद नाजुक थी।

किसी तरह हम 2 घंटे बाद श्रीनगर के सौरा अस्पताल पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचने के बाद हमें पता चला कि अस्पताल में कोई भी एंटीवेनिन नहीं है। इस दौरान श्रीनगर में बेगम और उनका पति केमिस्ट शॉप में एंटीवेनिन की तलाश में दर-दर भटकते रहे लेकिन सभी ने स्टॉक खत्म होने की बात कही। अगले दिन सुबह 10.30 बजे सांप के काटने के 16 घंटे बाद आमिर की मृत्यु हो गई। इसके बाद माता-पिता बच्चे के मृत शरीर के साथ एंबुलेंस में वापस घर आ गए।

बहरहाल डॉक्टरों और मरीजों का कहना है कि आर्टिकल 370 को रद्द करने के बाद से घाटी में दो महीने से चल रहे प्रतिबंध के दौरान कई लोगों की जान चली गई है। लोगों की शिकायत है कि ज्यादातर मौते सही समय पर इलाज न मिलने के कारण हुई है। इंटरनेट और कम्यूनिकेश ब्लैकआउट के चलते लोग अस्पताल से संपर्क करने में असमर्थ हैं।

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