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कश्मीरः पाकिस्तानी घोटाले से जुड़े हैं हुर्रियत से गिलानी के इस्तीफे के तार, अलगाववादी संगठन में अंदरुनी कलह हुई उजागर

साल 2018 में अब्दुल्ला गिलानी ने आरोप लगाए कि कश्मीरी छात्रों के लिए रिजर्व इन सीटों को पीओके में हुर्रियत के नेता गुलाम मुस्तफा सफी द्वारा बेचा जा रहा है।

jammu kashmir, syed ali shah geelani, pakistan, hurriyat conferenceहुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

करीब दो साल पहले जम्मू कश्मीर के अलगाववादी संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) के नेताओं पर पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेज रैकेट में शामिल होने के आरोप लगे थे। अब हुर्रियत के आजीवन अध्यक्ष बनाए गए सैयद अली शाह गिलानी द्वारा बीते हफ्ते अपने पद से इस्तीफा देने के बाद यह मुद्दा फिर गर्मा गया है। अपने इस्तीफे में गिलानी ने हुर्रियत के सदस्यों के भ्रष्टाचार और पाकिस्तानी सत्ता के करीबी होने के आरोप लगाए हैं। गिलानी ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर अब्दुल्ला गिलानी के नाम का ऐलान किया है, जो कि पाकिस्तानी सत्ता के करीबी नहीं समझे जाते हैं।

क्या है पाकिस्तानी मेडिकल सीट रैकेट?: बता दें कि करीब दो दशक पहले यानि कि पाकिस्तान में मुशर्रफ के कार्यकाल के दौरान वहां की सरकार ने कश्मीरी छात्रों के लिए पीओके, इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के इंजीनियरिंग और मेडिसिन कॉलेज में सीटें रिजर्व करने का फैसला किया था। इसके तहत जिन कश्मीरी छात्रों को स्थानीय कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिलता था, वो पाकिस्तान का रुख करते थे। अधिकतर सीटें पाकिस्तान सरकार द्वारा स्पॉन्सर होती थी। बताया जाता है कि इन सीटों के आवंटन की जिम्मेदारी पीओके और कश्मीर के हुर्रियत नेताओं को दी गई थी।

साल 2018 में अब्दुल्ला गिलानी ने आरोप लगाए कि कश्मीरी छात्रों के लिए रिजर्व इन सीटों को पीओके में हुर्रियत के नेता गुलाम मुस्तफा सफी द्वारा बेचा जा रहा है। बता दें कि अब्दुल्ला गिलानी कश्मीर का निवासी है और हिजबुल मुजाहिद्दीन के साथ जुड़ा हुआ था। इस दौरान वह कई साल पाकिस्तान में भी रहा, बाद में वह राजनीति में शामिल हो गया। अब्दुल्ला का बड़ा भाई एसएआर गिलानी 2001 में संसद भवन हमले में दोषी पाया गया था।

फिलहाल इस रैकेट के संबंध में भारतीय जांच एजेंसी NIA जांच कर रही है। हालांकि गुलाम मुस्तफा सफी ने पाकिस्तान से द संडे एक्सप्रेस को बताया कि ये आरोप फर्जी हैं। इस रैकेट के खुलासे से हुर्रियत की आपसी फूट भी उजागर हो गई है। बता दें कि 2018 के अंत में सैयद अली शाह गिलानी ने गुलाम मुस्तफा सफी को हुर्रियत संयोजक के पद से हटा दिया और उसकी जगह अब्दुल्ला को जनवरी 2019 में संयोजक बना दिया।

खबर है कि अब्दुल्ला गिलानी को संयोजक बनाए जाने पर भी हुर्रियत में हंगामा जारी है। दरअसल अब्दुल्ला पीओके के हुर्रियत नेताओं के बीच जाना पहचाना नाम नहीं है। इसके साथ ही सबसे अहम वह पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान का भी करीबी नहीं है।

इस बीच हिज्बुल मुजाहिद्दीन चीफ सैयद सलाहुद्दीन और पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठानों के रिश्तों में भी खटास की खबर है। दरअसल सलाहुद्दीन का कहना है कि जब भारत ने कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किया तो पाकिस्तान ने इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यही वजह है कि सलाहुद्दीन बीते कुछ महीने से पाकिस्तान द्वारा दरकिनार किया जा रहा है और इसके बरक्स एक नया आतंकी संगठन खड़ा किया जा रहा है।

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