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‘केंद्र विरोधी’ बयान के बाद बोले जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक, नौकरी नहीं जाएगी, लेकिन ट्रांसफर का है ख़तरा

सत्यपाल मलिक ने कहा कि केंद्र उन पर दो सदस्यों वाली सज्जाद लोन की पार्टी 'पिपुल्स कॉन्फ्रेंस' की सरकार बनाने का दबाव डाल रहा था। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग कर दी। मलिक ने कहा कि उन्हें लोग इसके लिए भले गालियां दें, लेकिन वह जानते हैं कि उन्होंने सही कदम उठाया।

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक। (एक्सप्रेस फोटोः प्रवीण जैन)

जम्मू-कश्मीर में सियासी उठा-पटक के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक अपने बयानों से लगातार चर्चा में हैं। शनिवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में उनके केंद्र विरोधी बयान से राजनीतिक तूफान अभी थमा भी नहीं था कि उनका दूसरा बयान सुर्खियों में है। मंगलवार को जम्मू में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि (केंद्र सरकार के खिलाफ टिप्पणी के बाद) उनकी नौकरी तो नहीं जाएगी, लेकिन ट्रांसफर ख़तरा जरूर है।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग करने के बाद आचोलनाओं के घेरे में आए राज्यपाल ने शनिवार को अपनी सफाई दी थी। उन्होंने इसके लिए सीधे-सीधे केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार बताया। सत्यपाल मलिक ने कहा कि केंद्र उन पर दो सदस्यों वाली सज्जाद लोन की पार्टी ‘पिपुल्स कॉन्फ्रेंस’ की सरकार बनाने का दबाव डाल रहा था। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग कर दी। मलिक ने कहा कि उन्हें लोग इसके लिए भले गालियां दें, लेकिन वह जानते हैं कि उन्होंने सही कदम उठाया।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में महबूूबा मुफ्ती की पीडीपी, उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉनफ्रेंस और कांग्रेस ने संयुक्त रूप से सरकार बनाने का दावा राज्यपाल सत्यापाल मलिक के सामने पेश किया था। लेकिन, राज्यपाल ने विधानसभा ही भंग कर दी। जिसके बाद अब 6 महीने के भीतर चुनाव का प्रावधान है।

राज्यपाल सत्यापाल मलिक के ताजा बयान पर ‘पिपुल्स कॉन्फ्रेंस’ के नेता सज्जाद लोन ने गहरी नाराज़गी जाहिर की है। एनडीटीवी के मुताबिक लोन ने कहा कि राज्यपाल का बयान बेहद ही अनुचित है। उन्होंने कहा कि सत्यपाल मलिक मीडिया में मेरी छवि धूमिल नहीं कर सकते। यह कतई सही नहीं है कि आप हर कश्मीरी को भ्रष्ट शख्स के तौर पर पेश करें। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का बयान कश्मीर की आवाम के लिए बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है।

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