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जम्मू-कश्मीर: 12 सरकारी अधिकारियों को ‘राष्ट्रविरोधी’ गतिविधियों के लिए किया गया नौकरी से बर्खास्त

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बर्खास्त किए गए अधिकारी शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, जल विभाग, वन विभाग और खाद्य आपूर्ति विभाग में काम करते थे।
जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (PTI Photo)

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 12 सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इन सभी अधिकारियों पर जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों में हुई हिंसा को भड़काने का आरोप है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बर्खास्त किए  गए अधिकारी शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, जल विभाग, वन विभाग और खाद्य आपूर्ति विभाग में काम करते थे। इन सभी अधिकारियों को नौकरी से निकालने जाने का आदेश राज्य सरकार ने बुधवार (19 अक्टूबर) शाम को जारी किया। मीडिया रिपोर्टे  के अनुसार राज्य सरकार कई अन्य अधिकारियों पर भी निगरानी रखे हुए है। समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार बर्खास्त किए गए अधिकारियों में कश्मीर यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार भी शामिल हैं।

एजेंसी ने एक सरकारी अधिकारी से लिखा है, “राज्य पुलिस ने इन अधिकारियों की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का ब्योरा तैयार किया था जिसे राज्य के मुख्य सचिव के पास भेजा गया। उन्होंने संबंधित विभागों के प्रमुखों को इन लोगों की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया।” कश्मीर में आठ जुलाई को हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी बुरहानी वानी के एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अब तक 90 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और एक हजार से अधिक लोग घायल हो गए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अनुसार घाटी में हिंसा भड़काने में पाकिस्तानी ताकतों का हाथ था।

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कश्मीर में पिछले ढाई दशकों में ये दूसरा मौका है जब सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। इससे पहले 1990 में पांच सरकारी कर्मचारियों को अलगाववादियों का समर्थन करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। उस समय बर्खास्तगी के विरोध में कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों ने तीन महीने तक हड़ताल की थी।

 

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  1. S
    sanjay
    Oct 20, 2016 at 9:28 am
    जम्मू कश्मीर में शान्ति स्थापित नहीं होने का कारण पाकिस्तान तो है ही साथ में भारत के अंदर भी राष्ट्रविरोधी तत्व है,जो इस कार्य में भागी है,इन्हें बेनकाब कर दंड देंना होगा,यदि इन्हें वोटबैंक के नजरिये से अनदेखा किया गया तो जो हाल पाकिस्तान का हो रहा है वही हाल इन पार्टिया का होगा!राजनीतिक पार्टिया संवैधानिक पदों पर बैठते समय उनका ध्यान सिर्फ राष्ट्र की सुरक्षा राष्ट्र धर्म प्रथम होना चाहिए न की सत्ता की आड़ में अपना राजनीतिक एजेंडा !
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