जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक गांव के स्थानीय लोगों ने 11,000 फीट की ऊंचाई पर फंसे सेना के जवानों की मदद कर एक नई मिसाल पेश की है। गांव के लोगों ने करीब पांच घंटे तक लगातार पहाड़ों की कठिन चढ़ाई कर बर्फ में फंसे जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला।

कैसे फंसे थे आर्मी के जवान?

बताया जा रहा है कि सेना के जवान ऊंची पहाड़ी चोटियों पर एक एंटी-टेरर सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सूत्रों ने बताया कि 23 जनवरी को सैनिकों ने आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। यह ऑपरेशन उस एनकाउंटर के बाद शुरू किया गया, जिसमें आर्मी के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे, जबकि सात अन्य जवान घायल हुए थे। इसी वजह से सेना ने आतंकियों को ढूंढने और उन्हें डोडा जिले में दाखिल होने से रोकने के उद्देश्य से अभियान तेज किया।

हालांकि, खराब मौसम की वजह से सेना के जवान दुर्गम इलाके में फंस गए। ऐसे में जवानों की ओर से गुंदना आर्मी पोस्ट को संदेश भेजा गया। इसके बाद 24 जनवरी को गांव के स्थानीय लोगों से मदद मांगी गई।

गांव वालों ने कैसे किया रेस्क्यू?

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक ग्रामीण ने बताया, “हमने 25 जनवरी को सुबह करीब 8:30 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सेना ने हमें जूते और खाने के कुछ पैकेट दिए थे, जबकि हम अपने साथ खुद की शॉल लेकर चले थे। दोपहर करीब 1:30 बजे हम सेना के जवानों तक पहुंच गए और सभी को सुरक्षित नीचे ले आए।”

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील भारतवाल ने बताया कि आम नागरिकों ने सेना के साथ मिलकर एक सुरक्षित रास्ता बनाया। इसके अलावा बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने भी चित्रगाल इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। 26 जनवरी को BRO और गांव वालों की मदद से करीब 40 सेना के जवानों और 20 आम नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।