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महिलाओं की रक्षा के लिए है DV एक्ट, पुरुषों को परेशान करना इसका मकसद नहीं, बेजा इस्तेमाल करने वाली महिला पर कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

पति एजाज परवेज शाह और शमशादा बेगम के बीच 2019 से घरेलू विवाद चल रहा था। महिला ने पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था, लेकिन वो कोर्ट में इसे साबित नहीं कर पाई।

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घरेलू हिंसा के केस में कोर्ट ने महिला पर लगाया जुर्माना (प्रतीकात्मक फोटो- @pixabay)

घरेलू हिंसा के एक मामले पर सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने महिला पर ही 10 लाख का जुर्माना लगा दिया है। कोर्ट ने पाया कि महिला, अपने पति को प्रताड़ित करने के लिए इस कानून का दुरुपयोग कर रही थी।

मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू और कश्मीर की एक स्थानीय अदालत ने कहा है कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (डीवी अधिनियम) महिलाओं को हिंसा से बचाने के लिए बनाया गया था, न कि पति को परेशान करने या वैवाहिक विवाद को बढ़ाने के लिए यह कानून बनाया गया है।

जानकारी के अनुसार पति एजाज परवेज शाह और शमशादा बेगम के बीच 2019 से घरेलू विवाद चल रहा था। महिला ने पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था, लेकिन वो कोर्ट में इसे साबित नहीं कर पाई। महिला इस मामले को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गई थी, लेकिन उसे वहां भी हार मिली थी।

इस दौरान पति ने कोर्ट को बताया कि महिला ने उसे घर से भी निकाल दिया है। जबकि घर में उसका भी हिस्सा है। जिसके बाद कोर्ट ने 2020 में दिए गए एक आदेश में दोनों को घर में शांतिपूर्वक तरीके से रहने के लिए कहा था। तब महिला इसके खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। जहां से उसे हार मिली थी।

जिसके बाद पति, 2020 के आदेश को लागू करवाने के लिए कोर्ट की शरण में चला गया। अब महिला, पति की उस शिकायत को वापस करवाने के लिए कोर्ट गई थी, जो उसके खिलाफ दायर की गई थी। इसी की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महिला पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा- “यह बिल्कुल स्पष्ट है कि महिलाओं के संरक्षण (घरेलू हिंसा से) अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू संबंधों में रहने पर होने वाली हिंसा से सुरक्षा प्रदान करना है। यह वैध और वास्तविक मामलों की रक्षा के लिए है, जहां पीड़ित व्यक्ति ऐसे कार्यों में लिप्त नहीं होता है, जो कानून के उद्देश्य और उद्देश्य को विफल नहीं करते हैं। घरेलू हिंसा अधिनियम को पति को परेशान करने या प्रतिवादी को अपने ही घर से बाहर निकालने की हद तक वैवाहिक कलह को और बढ़ाने के लिए अधिनियमित नहीं किया गया है”।

अदालत ने दायर मामले को वापस लेने की अनुमति दी, लेकिन उसे प्रतिवादी-पति को मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया। क्योंकि पति याचिका के लंबित रहने के दौरान अपने ही घर में आश्रय और आवास से वंचित था।

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