जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चिंता जताई है। उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को चेतावनी दी कि भारत-US ट्रेड डील से जम्मू कश्मीर के बागवानी और ड्राई फ्रूट सेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका से मुख्य ड्राई फ्रूट प्रोडक्ट्स को जीरो ड्यूटी पर भारत में आने की इजाजत होगी और इसका नुकसान हमें होगा। विधानसभा में बजट 2026-27 पर बहस का जवाब देते हुए उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रेड डील के फ़ायदों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को खतरा है।

जम्मू कश्मीर के सेबों को तो बचाया जाना चाहिए था- अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला ने कहा, “मैं अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील जम्मू कश्मीर के लिए कैसे अच्छी है? हो सकता है उन्होंने केरल में मछली पालन को बचा लिया हो, लेकिन हमारा क्या? ट्री नट्स और ड्राई फ्रूट्स को जीरो ड्यूटी पर लाने की इजाजत दी जा रही है। ये दोनों जम्मू कश्मीर के मुख्य प्रोडक्ट हैं। हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की बात करते हैं, फिर भी फलों को ड्यूटी-फ़्री इम्पोर्ट किया जा रहा है। कम से कम जम्मू कश्मीर के सेबों को तो बचाया जाना चाहिए था।”

विधानसभा में जैसे ही उमर अब्दुल्ला ने इस एग्रीमेंट को ‘सौदा कहा, तुरंत BJP विधायकों ने उनके भाषण को बीच में ही रोक दिया। इसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी बीजेपी के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर द्वारा बार-बार शिष्टाचार बनाए रखने की अपील के बावजूद, सदन में शोर-शराबा हुआ, और BJP ने वॉकआउट की धमकी दी।

विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी कार्यवाही में रुकावट डाली, जिससे अब्दुल्ला ने सवाल किया कि इस एग्रीमेंट से असल में किसे फ़ायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “इस डील से किसे फायदा होगा? बादाम उगाने वालों को नहीं, अखरोट उगाने वालों को नहीं। कीवी उगाने वालों या शहद बनाने वालों को भी नुकसान होगा।”

‘मुश्किल हालात में तैयार किया गया बजट’

अपने भाषण में उमर अब्दुल्ला ने बजट का बचाव करते हुए कहा कि इसे मुश्किल हालात में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, “जम्मू कश्मीर के लोग बजट से खुश हैं, यह देखते हुए कि हम किन दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। हमने सभी सेक्टर में सुधार लाने की कोशिश की है। हमारी प्राथमिकता गरीब हैं। छह गैस सिलेंडर सरकार खुद दे रही है, केंद्र नहीं। राहत के उपाय केंद्र और UT सरकार दोनों की स्कीमों के ज़रिए लागू किए जाएंगे। इस साल दिहाड़ी मजदूरों को रेगुलर करने का प्रोसेस शुरू हो जाएगा।”

विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने फिर से कहा कि ट्रेड डील ट्री नट्स, ड्राई फ्रूट्स और ताज़े फलों के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की इजाज़त देती है और ये ऐसे प्रोडक्ट हैं जो J&K की इकॉनमी की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा, “हमारी कोई मरीन इंडस्ट्री नहीं है। हम सेब, केसर, बादाम और कीवी पर निर्भर हैं। अगर ये प्रोडक्ट US से ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट किए जाते हैं, तो इससे हमें नुकसान होगा। मुख्यमंत्री के तौर पर अपने लोगों के लिए बोलना मेरी ज़िम्मेदारी है। हमें इस डील से कुछ भी हासिल नहीं होगा।” पढ़ें जम्मू कश्मीर में जल्द शुरू होंगे दो बड़े वॉटर प्रोजेक्ट्स

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