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J&K: पाबंदी के दौरान अलगाववादी नेता गिलानी को दी फोन-इंटरनेट की सर्विस! BSNL के दो अधिकारी सस्पेंड

जब तक गिलानी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट नहीं किया था तब तक प्रशासन को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि अलगावादी नेता सैयद अली शाह का इंटरनेट कनेक्शन बहाल है।

Author नई दिल्ली | Updated: August 19, 2019 3:02 PM
अलगाववादी नेता अली शाह गिलानी के घर पर 8 अगस्त की सुबह तक इंटरनेट कनेक्शन बहाल था। (फाइल फोटो)

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने राज्य में पाबंदी के दौरान अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को फोन व इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने के मामले में बीएसएनएल के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। खबरों के अनुसार हुर्रियत नेता गिलानी के पास राज्य में पाबंदी के दौरान 4 दिन तक इंटरनेट सेवा उपलब्ध थी।

केंद्र सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की घोषणा के एक दिन पहले ही राज्य में सभी प्रकार की संचार सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। इन तमाम पाबंदियों के बावजूद कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी का लैंडलाइन के साथ ही ब्रॉडबैंड सुविधा 8 अगस्त की सुबह तक बहाल थी।

इंडिया टुडे की खबर के अनुसार जब तक गिलानी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट नहीं किया था तब तक प्रशासन को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि अलगावादी नेता सैयद अली शाह का इंटरनेट कनेक्शन बहाल है। इस बारे में जानकारी मिलने के बाद केंद्र और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्विटर को गिलानी समेत 8 लोगों को ट्विटर अकाउंट सस्पेंड करने के लिए पत्र लिखा था। केंद्र सरकार का कहना था कि इन ट्विटर अकाउंट के जरिये घाटी में नफरत फैलाई जा रही है।

प्रशासन की तरफ से इस बात की जांच की जा रही है कि जब किसी के लिए भी इंटरनेट उपलब्ध नहीं था तब गिलानी को इंटरनेट एक्सेस कैसे मिला। इस संबंध में कार्रवाई करते हुए सरकारी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल ने अपने दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।

विभाग की तरफ से लूपहोल सामने आने के बाद गिलानी का इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिया गया था। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकार वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने की घोषणा की थी। इससे एक दिन पहले 4 अगस्त को पूरी घाटी में लैंडलाइन फोन समेत सभी संचार सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी।

राज्य के शीर्ष राजनेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और फारुक अबदुल्ला को नजरबंद कर दिया गया था। इसके अलावा कई लोगों को भी उनके घर में नजरबंद कर दिया गया था।

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