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सुप्रीम कोर्ट में बोला जम्मू-कश्मीर प्रशासन- इंटरनेट नहीं मूलभूत अधिकार, आतंकी करते हैं इस्तेमाल

जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में 4 जी इंटरनेट स्पीड की मांग करने वाली याचिकाओं पर जवाब देते हुए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को शीर्ष अदालत के 10 जनवरी के फैसले के बाद हटा लिया गया है।

नई दिल्ली | Updated: April 30, 2020 8:43 AM
J&K प्रशासन ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बावजूद संविधान के दायरे में रहते हुए इंटरनेट पर अंकुश लगाया जा सकता है। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि इंटरनेट मूलभूत अधिकार नहीं है। इसके साथ ही राज्य प्रशासन ने कहा है कि पाकिस्तानी आतंकी जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। बुधवार (29 अप्रैल) को कोर्ट में प्रशासन ने यह रेखांकित करते हुए कि “पाकिस्तानी आतंकवादी संचालकों द्वारा भयानक छद्म युद्धों का समर्थन” करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए क्षेत्र में इंटरनेट की स्पीड 2G तक सीमित की गई है।

प्रशासन ने कोर्ट में यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और बोलने की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और इसके तहत किसी भी व्यापार या व्यवसाय के मद्देनजर संविधान के दायरे में रहते हुए राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था आदि के हित में इंटरनेट पर अंकुश लगाया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में 4 जी इंटरनेट स्पीड की मांग करने वाली याचिकाओं पर जवाब देते हुए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को शीर्ष अदालत के 10 जनवरी के फैसले के बाद हटा लिया गया है। पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के बाद केंद्र सरकार ने वहां इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी थी और पूरे राज्य में लॉकडाउन घोषित कर दिया था।

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अब प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी पाबंदी तो हटा दी है लेकिन इंटरनेट की स्पीड 2G तक सीमित कर दी है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अपने हलफनामे में प्रशासन ने कहा है, “अगर इंटरनेट स्पीड 2G तक सीमित नहीं की जाती है, तो उच्च गति का इंटरनेट किसी भी फर्जी समाचार / अफवाहों को फैलाने और भारी डेटा फ़ाइलों (ऑडियो / वीडियो फ़ाइलों) के हस्तांतरण को आसान करेगा जो जो आतंकी संगठनों द्वारा उकसाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जैसा कि पहले भी सुनियोजित हमलों के दौरान हो चुका है।”


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