पहलगाम आतंकी हमले के बाद बीते एक साल में जम्मू और कश्मीर के सुरक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, कई लोग इस हार्ड रीसेट कहते हैं। सेना केंद्रशासित राज्य के घने जंगलों की और भी आक्रामक तरीके से तलाशी लेने से लेकर, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्नो लेपर्ड्स और मार्खोर नाम से दो खास आतंकवाद रोधी यूनिट्स का गठन किया। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अधिकारियों ने कहा कि इन यूनिट्स को ऊंचे पहाड़ों और जंगलों में लड़ाई लड़ने के लिए खास ट्रेनिंग दी गई है।
यह तरीका जो अब डिफेंस से बदलकर पहले से ही कार्रवाई करने और हमला करने की हो गई है। इसका मतलब है कि जहां एक ओर घने जंगलों में अभी भी कई मुठभेड़ें होती रहती हैं, वहीं जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों का आखिरी बड़ा हमला पहलगाम में हुआ था।
‘अब जंगल में लड़ाई के लिए भी तैयार’
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने विस्तार से बताते हुए कहा, “पिछले तीन दशक से हम बड़े पैमाने पर शहर के अंदर लड़ाई के आदी थे, यह आसान था किसी ऐसे घर को निशाना बनाओ जहां आतंकी फंसे हों और बस खेल खत्म, लेकिन यह जंगल की लड़ाई हमारे लिए नई थी, इसके हिसाब से ढलने में हमें थोड़ा समय लगा, लेकिन अब हम इसके लिए तैयार हैं।”
पहलगाम आतंकी हमले के बाद, जम्मू कश्मीर पुलिस इलाकों में ऑपरेशन्स को मजबूत करने के लिए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के अंदर दो नई एलीट यूनिट्स बनाईं। इन दोनों यूनिट्स के नाम घाटी में पाए जाने वाले ऊंचे पहाड़ों के जंगली जानवरों के नाम पर रखे गए हैं, जो अपनी ताकत, सटीकता और फुर्ती के लिए जाने जाते हैं। एक ओर स्नो लेपर्ड्स यूनिट को ऊंचे पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों में लड़ाई के लिए तैयार किया गया, तो दूसरी ओर मार्खोर यूनिट को घने जंगलों में बंदूक की लड़ाई के लिए ट्रेनिंग दी गई है। दोनों यूनिट्स ने देश की अलग-अलग एलीट फोर्सेज के साथ खास ट्रेनिंग ली है।
सेना की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत
हालांकि ये यूनिट्स हमेशा तैनात होने के लिए तैयार रहती हैं, लेकिन सेना ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को खासा मजबूत किया है, खासकर पहाड़ी इलाकों में, जहां उसकी खास पैराट्रूपर यूनिटें ऊंची जगहों पर तैनात हैं। ऐसी ही एक यूनिट ने पिछले साल 28 जुलाई को श्रीनगर के बाहरी इलाके में दाचीगाम जंगल में पहलगाम हमलावरों सुलेमान उर्फ फैसल जट्ट, अफगान और जिब्रान को मार गिराया था।
पिछले साल दिसंबर में सेना ने पीर पंजाल पहाड़ों के दोनों ओर एक बड़ा आतंक-विरोधी अभियान चलाया। ये पहाड़ कश्मीर घाटी को एक तरफ पूंछ और राजौरी से, तो दूसरी तरफ किश्तवाड़ और डोडा से जोड़ते हैं। सेना ने एक तक पीछा किया और फिर जैश-ए-मोहम्मद के सैफुल्लाह गुट को खत्म कर दिया। साथ ही उसने पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले आतंकी नेटवर्क को भी तबाह कर दिया। उनके ठिकानों को बर्बाद किया और उन्हें अपने अड्डे बदलने पर मजबूर कर दिया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “रणनीति में पूरी तरह बदलाव आ गया था, पहले वे हमारा शिकार कर रहे थे और अब हम उनका शिकार कर रहे थे। इसके नतीजे साफ हैं, वे लगातार भाग रहे हैं और पहलगाम के बाद से किसी भी हमले की योजना नहीं बना पाए हैं।”
सेना और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल
केंद्रशासित प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने जमीन पर काम कर रही अलग-अलग सेनाओं और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल भी अपनाया है। ज्वाइंट कंट्रोल सेंटर के तहत काम करने वाला सिक्योरिटी सिस्टम हर सप्ताह मिलता है, ताकि उन्हें ऑपरेशन और खुफिया जानकारी पर तुरंत फीडबैक मिल सके और कश्मीर और जम्मू में तैनात सुरक्षा व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा,”पिछले कुछ सालों में विद्रोह का स्वरूप बदल गया है। विद्रोहियों ने अपने ठिकाने घाटी के शहरी इलाकों से हटाकर जम्मू और कश्मीर की सीमा से लगे पहाड़ों में बसा लिए हैं। इन सीमावर्ती इलाकों में अधिकार क्षेत्र को लेकर अक्सर अस्पष्टता रहती है और इन पर ध्यान नहीं दिया जाता। यह वही इलाके हैं जिनका इस्तेमाल आतंकियों ने अपने सुरक्षित ठिकानों के तौर पर किया।”
आगे कहा, “इस नए खतरे से निपटने के लिए पीर पंजाल पहाड़ों के दोनों ओर के इलाकों के बीच तालमेल बिठाना बेहद जरूरी था। अब नतीजे सामने आ रहे हैं।”
जांच में अब तक क्या आया सामने?
एनआईए के मुताबिक, दो माह पहले चीन में संबंधित न्यायिक प्राधिकरण को एक लेटर रोगेटरी भेजा गया था। इसमें हमले से जुड़े एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की सप्लाई चेन और उसके अंतिम यूजर के बारे में सही जानकारी मांगी गई थी। अधिकारियों के अनुसार, एनआईए को अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है और संभावना है कि आने वाले दिनों वह नया रिमाइंडर भेजेगी।
पिछले माह, एनआईए के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल संदीप चौधरी ने जम्मू की एक स्पेशल एनआईए कोर्ट में दिए गए एक आवेदन में कहा कि आतंकवादी हमले की साजिश और उसे अंजाम देने से जुड़ी कई चीजें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। आगे कहा गया, “ऐसा ही एक अहम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइनस GoPro कैमरा था, जो पहलगाम हमले में शामिल आतंकी मॉड्यूल की हमले से पहले की रेकी, उनकी आवाजाही और ऑपरेशन की तैयारियों को साबित करने के लिए जरूरी था।”
आतंकी कर रहे चीनी फोन का इस्तेमाल
एनआईए को यह भी पता चला कि तीन आतंकी चीनी निर्मित बने दो फोन इस्तेमाल कर रहे थे। एक अधिकारी ने कहा, “एजेंसी को चीनी कंपनी से इस बात की पुष्टि मिल गई है कि ये फोन पाकिस्तान में बेचे गए थे।”
एनआई को जांच में यह पता चला कि इस हमले की साजिश साजिद जट्ट और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा/द रेजिस्टेंस फ्रंट ने रची थी। हमलावरों की सभी गतिविधियों, ड्रोन से हथियारों की सप्लाई और पर्यटकों को निशाना बनाने का काम पाकिस्तान में बैठे साजिद नाम के हैंडलर ने ही की थी। जांच के दौरान एजेंसी ने 1113 लोगों से पूछताछ की, जिनमें 543 धोक (अस्थायी डेरों) में रहने वाले लोग, 117 ट्टू वाले, 67 जानवरों के मालिक, 52 स्थानीय खाने-पीने के सामान बेचने वाले, 19 दुकानदार, 42 फोटोग्राफर, टिकट काउंटर और जिपलाइन पर काम करने वाले 36 लोग, 31 शॉल बेचने वाले, 25 टैक्सी ड्राइवर और 23 अन्य संदिग्ध शामिल थे।
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