Jammu-Kashmir News: विधानसभा में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन द्वारा लाए गए कटौती प्रस्ताव पर जम्मू-कश्मीर सरकार की प्रतिक्रिया से केंद्र शासित प्रदेश के दोनों प्रांतों के बीच जारी किए गए रिजर्व्ड कैटेगरी के सर्टिफिकेटों की संख्या में भारी अंतर का पता चलता है। केंद्र शासित प्रदेश में जारी किए गए कुल 11,81,269 रिजर्व्ड कैटेगरी सर्टिफिकेटों में से, पिछले हफ्ते दिए गए उत्तर के हिसाब से 14% से भी कम सर्टिफिकेट कश्मीर के लोगों को मिले हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, घाटी में केंद्र शासित प्रदेश की कुल जनसंख्या का 56.15% हिस्सा रहता है।
जम्मू क्षेत्र में अलग-अलग रिजर्व्ड कैटेगरी के तहत कुल 10,16,309 सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं , जबकि कश्मीर के लिए यह संख्या 1,64,960 है। जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों के बीच आंकड़ों में अंतर केंद्र शासित प्रदेश में आरक्षण को लेकर विवाद को और बढ़ा सकता है। इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शनों का सामना करते हुए, उमर अब्दुल्ला सरकार ने पहले 2024 में लागू की गई न्यू रिजर्वेशन मैट्रिक्स में बदलाव की सिफारिश की थी, जब जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू था। हालांकि, कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिश पर आधारित सरकारी फाइल, जिसमें कोटा को वर्तमान 60% से घटाकर 50% करने की बात कही गई है, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास लंबित है।
राजौरी और पुंछ में ज्यादातर अनुसूचित जनजातियां
जम्मू में स्थित राजौरी और पुंछ जिलों में केंद्र शासित प्रदेश की ज्यादातर अनुसूचित जनजातियां रहती हैं। इनमें गुर्जर और पहाड़ी जनजातियां शामिल हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है कि एसटी 1 और एसटी 2 कैटेगरी के तहत जारी किए गए लगभग सभी सर्टिफिकेट इसी क्षेत्र से संबंधित हैं। इन दोनों कैटेगरी के तहत जारी किए गए कुल 7,49,963 सर्टिफिकेटों में से 6,93,781 (लगभग 93%) सर्टिफिकेट जम्मू क्षेत्र में जारी किए गए हैं। इनमें से 56,182 सर्टिफिकेट घाटी में जारी किए गए हैं।
हालांकि, ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के सर्टिफिकेट में कश्मीर के साथ भारी अंतर साफ तौर पर दिखाई देता है। केंद्र शासित प्रदेश में जारी किए गए कुल 47235 ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट में से 43,136 (या 91.32%) जम्मू में जारी किए गए हैं, जबकि घाटी में यह संख्या 4,099 है। अनुसूचित जाति कैटेगरी की बात करें तो, जम्मू में 1,39,664 सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, जबकि घाटी में 1,755 सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं।
जम्मू में 6732 ALC प्रमाणपत्र जारी किए गए
जम्मू में रिजर्वेशन कैटेगरी के तहत जारी किए गए सर्टिफिकेट की संख्या सबसे ज्यादा है। ये एएलसी और आईबी के साथ लगे क्षेत्रों के लोगों के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों को भी कवर करते हैं। जम्मू में 6,732 ALC प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं, जबकि घाटी में केवल 460 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। हालांकि जम्मू क्षेत्र में पड़ने वाली ALC की लंबाई घाटी में 350 किमी की तुलना में केवल थोड़ी ही ज्यादा है (394 किमी)। चूंकि, कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) नहीं है, इसलिए सभी 3,690 प्रमाणपत्र जम्मू के लोगों को दिए गए हैं।
ओबीसी कैटेगरी में अंतर थोड़ा कम है, जहां जम्मू में 78,324 प्रमाण पत्र और कश्मीर में 52,652 प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। पिछड़े क्षेत्रों के लोगों (आरबीए) को जारी किए गए सर्टिफिकेट में दोनों प्रांत लगभग बराबर हैं। जम्मू में 50982 प्रमाण पत्र और कश्मीर में 49866 प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
2024 के संशोधनों और कोटा नीति से पहले 43% सीटें अलग-अलग कैटेगरी के लिए रिजर्व थीं। मार्च 2024 में, संसद द्वारा जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों के तहत और ज्यादा समूहों को शामिल करने के तुरंत बाद, अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों/नौकरियों को कुल 10% से बढ़ाकर 20% कर दिया गया, जबकि ओबीसी कोटा में भी 15 नए समूहों को जोड़कर बढ़ोतरी की गई।
60% से ज्यादा सरकारी नौकरियां और व्यावसायिक संस्थानों में सीटें रिजर्व
अब जम्मू-कश्मीर में 60% से ज्यादा सरकारी नौकरियां और व्यावसायिक संस्थानों में सीटें रिजर्व हैं, हालांकि, सामान्य वर्ग (जो कोटा के हकदार नहीं हैं) में आने वाले लोग केंद्र शासित प्रदेश की आबादी का बहुमत बनाते हैं। पीडीपी के वहीद पारा द्वारा नई आरक्षण नीति को निलंबित करने की मांग वाला कटौती प्रस्ताव, हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी दोनों से समर्थन प्राप्त नहीं कर सका। पारा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया , “नई आरक्षण नीति का मकसद कश्मीरी भाषी लोगों को प्रशासन से बाहर करना है।” सिंधु जल संधि के सस्पेंड होने के बाद जम्मू कश्मीर में जल्द शुरू होंगे दो बड़े वॉटर प्रोजेक्ट्स, उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान
