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J&K में अब भी खौफ: ग‍िरफ्तारी के डर से घायल होने पर भी नहीं जा रहे अस्‍पताल, गुलाम नबी को बैरंग लौटाया द‍िल्‍ली

स्थानीय लोगों ने कहा कि भारतीय सुरक्षाबल घायल प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से स्थानीय अस्पताल शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पर कड़ी नजर रख रहे थे। इसके चलते सुरक्षाबलों संग टकराव में जो लोग पैलेट गन से घायल हुए उन्होंने इलाज कराने के लिए हॉस्पिटल जाने से परहेज किया।

Author नई दिल्ली | Published on: August 21, 2019 1:29 PM
श्रीनगर में लालचौक की तस्वीर। (Express photo by Shuaib Masoodi)

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त होने के करीब तीन सप्ताह बाद प्रदेश में हालात अभी सामान्य होते नजर नहीं आते। प्रदेश में लोग अभी भी खौफ में हैं। इलाज की जरुरत होने के बाद भी लोग हॉस्पिटल का रुख नहीं कर रहें कि कहीं गिरफ्तार ना हो जाएं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने ऐसे कुछ लोगों का साक्षात्कार लिया है जिन्होंने कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर बात की।

हालांकि लोग इस कदर डरे हुए है कि साक्षात्कार के दौरान एजेंसी को अपना जाहिर करने से इनकार दिया। एक शख्स एजाज (25) ने कश्मीर मामले में बात की। उन्होंने कहा, ‘हमारी कोई आवाज नहीं है। हम भीतर से गुस्से में हैं। अगर दुनिया भी हमारी नहीं सुनेगी तब हमें क्या करना चाहिए? बंदूकें उठा लें?’ कश्मीर के सौरा में रॉयटर्स ने दो दर्जन से अधिक लोगों का साक्षात्कार लिया। यहां मुश्किल से ही कोई एक शख्स मिला जिसने 370 पर पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कदम का स्वागत किया।

पिछले एक सप्ताह में एजेंसी ने जिन लोगों के साक्षात्कार लिए उनमें से अधिकतर लोगों ने मोदी को ‘जालिम’ की तरह पेश किया। बातचीत में कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि भारतीय सुरक्षाबल घायल प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से स्थानीय अस्पताल शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पर कड़ी नजर रख रहे थे। इसके चलते सुरक्षाबलों संग टकराव में जो लोग पैलेट गन से घायल हुए उन्होंने इलाज कराने के लिए हॉस्पिटल जाने से परहेज किया। इन लोगों को डर है कि हॉस्पिटल गए सुरक्षाकर्मी उन्हें हिरासत में ले लेंगे।

घायलों की मदद करने वाले फिजियोथेरेपिस्ट यावर हमीद ने रॉयटर्स से कहा, ‘हम तब तक हॉस्पिटल नहीं जाते जब तक कुछ गंभीर नहीं होता या आंखों पर चोट ना आई हो।’ बता दें कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखने के लिए सरकार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। इसी कड़ी में कांग्रेस के सीनियर लीडर और राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम आजाद को मंगलवार (20 अगस्त, 2019) को जम्मू-कश्मीर एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया। कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके आजाद को वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई और शाम को वापस दिल्ली रवाना कर दिया गया।

कांग्रेस प्रवक्ता अब्दुल रशीद चौधरी के मुताबिक आजाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती से जुड़े एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कश्मीर जा रहे थे। मामले में जम्मू के एसएसपी तेजिंदर सिंह ने कहा, ‘उनकी यात्रा से शांति भंग होने की आशंका के चलते उन्हें वापस दिल्ली भेज दिया गया।’ जानना चाहिए 370 हटने के चलते कश्मीर में दूरसंचार सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है। खानयर के निवासी अब्दुल मजीद ने बताया, ‘पिछले दो सालों से हमारे लैंडलाइन फोन ही काम नहीं कर रहे। हम दोबारा पुराने वक्त में पहुंच गए हैं।’

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