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‘हम इंतजार ही करते रहते हैं’ कश्‍मीरी पुलिसकर्मी की पत्‍नी ने लिखी भावुक पोस्‍ट

बकौल कश्मीरी पुलिसकर्मी की पत्नी, "हम पारिवारिक कार्यक्रमों में भी उनके साथ जाने का इंतजार ही करते रह जाते हैं। हम उनके साथ बाहर जाने की योजना ही बनाते रह जाते हैं। लेकिन यह बमुश्किल कभी हो पाता है। यह सिर्फ अकेले बच्चा पालने की ही बात नहीं है। हम सबसे बड़े झूठे भी हैं।"

जम्मू और कश्मीर में एक पुलिसकर्मी की पत्नी ने बेहद भावुक कर देने वाली पोस्ट लिखी है। महिला ने इसमें घाटी में आतंकियों का पुलिस व उनके रिश्तेदारों को निशाना बनाने और पुलिसकर्मियों के बलिदान पर अपनी पीड़ा साझा की है। कामकाजी महिला आरिफा तौसीफ ने लिखा है, “कैसे अधिकतर पुलिस वालों की पत्नियां अकेली अभिभावक के रूप में अपने बच्चों को पालती-पोसती हैं। उन्हें पतियों की किसी प्रकार की मदद नहीं मिल पाती, क्योंकि वह कहीं दूर ड्यूटी पर तैनात होते हैं।” महिला ने यह भी लिखा कि वे लोग पुलिस में भर्ती पतियों और रिश्तेदारों का इंतजार ही करते रहते हैं।

तौसीफ की यह पोस्ट घाटी की एक स्थानीय न्यूज साइट ने प्रकाशित की है। महिला ने आगे लिखा, “पुलिसकर्मियों की पत्नियों के लिए किशोर अवस्था में देखा गया, हर अच्छे-बुरे वक्त में साथ रहने का सपना महज सपना ही बन कर रह जाता है। हम दोपहर के खाने पर उनके लिए रुके रहते हैं। हम साथ में रात का खाना खाने के लिए भी उनका इंतजार ही करते रह जाते हैं।”

बकौल कश्मीरी पुलिसकर्मी की पत्नी, “हम पारिवारिक कार्यक्रमों में भी उनके साथ जाने का इंतजार ही करते रह जाते हैं। हम उनके साथ बाहर जाने की योजना ही बनाते रह जाते हैं। लेकिन यह बमुश्किल कभी हो पाता है। यह सिर्फ अकेले बच्चा पालने की ही बात नहीं है। हम सबसे बड़े झूठे भी हैं।” तौसीफ ने इस बात का जिक्र भी छेड़ा कि आखिर कैसे पत्नियां अपने बच्चों से झूठ बोलकर उन्हें आश्वासन देती रहती हैं कि उनके पिता आने वाले सप्ताहांत या त्योहार पर उनके साथ घर पर होंगे।

वह लिखती हैं, “हम बच्चों से झूठ बोलते रहते हैं- पापा इस शनिवार घर आ रहे हैं। हम झूठ बोलते हैं- पापा इस बार पैरेंट-टीचर मींटिंग में आएंगे। हम झूठ बोलते हैं- इस सप्ताहांत हम पिकनिक पर जाएंगे। हम झूठ बोलते रहते हैं- पापा ईद पर हमारे साथ होंगे या उस शादी में हमारे साथ जाएंगे। हम उनके बुजुर्ग और बीमार माता-पिता से भी झूठ बोलते रहते हैं- वह अब आएगा या तब आएगा। हम अपने आप से भी झूठ बोलते हैं।’’

उनके मुताबिक, “अकेले सोना सबसे तनावपूर्ण नहीं है। बल्कि आधी रात को जग जाना और फिर बेचैनी व घुटन महसूस करना है कि कोई आपको आराम पहुंचाने के लिए नहीं है।”

(भाषा इनपुट के साथ)

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