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आतंकी संगठन हिजबुल में शामिल हुआ महबूबा मुफ्ती के नेता का बेटा, एके-47 संग वायरल हुई बीटेक स्टूडेंट की फोटो

जम्मू कश्मीर में पीडीपी नेता जफर इकबाल मनहास के भतीजे कामरान जहूर ने हथियार उठा लिया है। कामरान बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। पिछले दो दशक के दौरान दहशतगर्दों के साथ मिलने वाला कामरान अपने गांव का पहला युवक है।

कामरान जहूर मनहास बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। (फोटोः फेसबुक से)

जम्मू और कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पार्टी के नेता जफर इकबाल मनहास के भतीजा आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। बीटेक कर चुका कामरान जहूर मनहास शादाब करेवा गांव का रहने वाला है। यह इलाका दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में आता है।

बुधवार को कामरान की हाथ में एक-47 राइफल पकड़े तस्वीर वायरल हो रही है। पीडीपी नेता व विधान परिषद् के सदस्य जफर इकबाल मनहास ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकता। जफर ने कहा कि हम सपने में भी नहीं सोच सकते कि वह ऐसा कर सकता है।

जफर ने कहा कि कामरान 20 दिन पहले पड़ोस के मुलगा शहर जाने का कह कर घर से गया था। वह कुलगाम में पढ़ाई कर रहा है। अब हमें पता चल रहा है कि उसने दहशतगर्दों से हाथ मिला लिया है। दो दशक से अधिक समय में इस गांव में आतंकी संगठन में शामिल होने वाला कामरान पहला युवक है। दक्षिण कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कामरान के आतंकी संगठन में शामिल होने की पुष्टि की।

इससे पहले साल 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में युवाओं का आतंकी संगठनों की तरफ रुझान बढ़ा है। आतंकी बुरहान की मौत के बाद आतंकी संगठनों ने उसे घाटी में पोस्टर बॉय बना दिया। उसकी मौत को कुर्बानी कह कर प्रचारित किया गया। राज्य में सेना के ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ और आतंकरोधी कार्रवाई बढ़ने के बावजूद स्थानीय स्तर पर आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।

साल 1988 से कश्मीर में भारतीय शासक के खिलाफ सैन्य विद्रोह और घुसपैठ बढ़ गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में युवाओं ने भी हथियार उठा लिया। हालांकि, इन तमाम घटनाओं के बीच साल 2010 में उमर अब्दुल्ला सरकार ने 1989-2009 के बीच पाकिस्तान जाकर आतंक का प्रशिक्षण लेने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए योजना पेश की।

इनमें वे लोग शामिल थे जो अपनी मर्जी से हथियार छोड़ शांति से जीवन बसर करना चाहते थे। इसके अलावा भी राज्य सरकारों की तरफ से कई नीतियां बनाई गईं जिससे लोग आतंक की तरफ न मुड़ें। इन प्रयासों का ही नतीजा था कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने उत्तर कश्मीर के बारामुला को आतंकी मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया।

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